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मुख्यमंत्री ने माना कि प्रदेश में वन क्षेत्र तेजी से सिमट रहा है,जिसके कारण प्रदूषण भी बढ़ रहा है-कांग्रेस


मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के ये ब्यान स्वमेव सिद्ध करता है कि हरियर छत्तीसगढ़ योजना में अरबो रु का घोटाला हुवा है और पौधे लगे ही नही है-विकास तिवारी

रायपुर/11 जुलाई 2018। एक ओर जहां रमन सिंह प्रदेश में विकास के झूठे दावे करते है, विकास यात्रा निकालते है वहीं दूसरी ओर खुद ही अपने इन दावों को पोल खुद के ही वक्तव्यों में खोलते पाये जाते है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सीनियर पैनलिस्ट और मीडिया प्राभारी विकास तिवारी (विकास खोजो कार्यक्रम) ने सरकार के मुखिया डॉ रमन सिंह द्वारा विश्व जनसँख्या दिवस पर अपने ट्विटर हेंडलर से एक संदेश में कहा है कि तेजी से बढ़ती आबादी के कारण ग्लोबल वार्मिंग प्रदूषण और तेजी से सिमटते वन क्षेत्रफल जैसी समस्या के रूप में उभर रहा है आइए विश्व जनसंख्या दिवस पर परिवार नियोजन के प्रति जनचेतना जागरूक करें। विकास तिवारी ने कहा कि पिछले 14 वर्षो में 1500 करोड़ का घोटाला वृक्षारोपण के नाम पर इसी रमन सरकार द्वारा किया गया है। हरियर छत्तीसगढ़ योजना में जमकर कमीशनखोरी की गयी। जिन्होंने खुद ही प्रदेश के पर्यावरण का सर्वनाश किया है जो हरियर छत्तीसगढ़ घोटाले के दोषी है वो बढ़ती जनसंख्या को दोष देकर अपना पल्ला झाड़ रहे है जबकि राज्य में बढ़ते प्रदूषण,राज्य वार्मिंग और वन क्षेत्रफल के तेजी से घटने के कारण खुद सरकार के मुखिया ही है,बढ़ती जनसंख्या नही है।

मीडिया प्राभारी विकास तिवारी ने जानकारी देते हुये कहा कि छत्तीसगढ़ में प्रतिवर्ष करोड़ों पौधे के रोपण होने के बावजूद 15 वर्षों में छत्तीसगढ़ में जंगल कम हो गए हैं। छत्तीसगढ़ में बीते 15 सालों में जंगल बढ़ने के बजाए घट गए। जबकि सालाना बारिश के मौसम में 500 करोड़ से ज्यादा की रकम प्लांटेशन में खर्च की जाती है। हर साल वन विभाग दावा करता है कि वो एक करोड़ से ज्यादा पौधे लगा रहा है। लेकिन ये पौधे कहां लग रहे हैं यह रहस्य बना हुआ है। राज्य के हाई कोर्ट ने भी नोटिस जारी कर वन विभाग से पूछा है कि आखिर पौधे लग कहां रहे है, और लग रहे हैं तो जंगल का रकबा क्यों घट गया? दरअसल वृक्षारोपण होने के बावजूद वर्ष 2001 से 2015 तक लगभग 3700 वर्ग किमी जंगल कम हो गया है। इसका खुलासा सरकार की रिपोर्ट में हुआ है। मामले की जांच को लेकर हाई कोर्ट का नोटिस जारी होने के बाद वन विभाग के मंत्री महेश गागड़ा और आला अफसर जवाब नहीं दे पा रहे है। राज्य में 8-10 सालों में सिर्फ कागजों में पौधा रोपण हुआ और उस पर खर्च हुई रकम अफसरों की तिजोरी में चली गई। आरटीआई में प्राप्त जानकारी के मुताबिक सरकार और उनके अफसरों ने पौधा रोपण के नाम पर 15 सौ करोड़ से ज्यादा की रकम डकार ली।

मीडिया प्राभारी विकास तिवारी ने बताया कि हरिहर छत्तीसगढ़ योजना वर्ष 2017 में ही 8 करोड़ 2 लाख पौधे लगाए गए हैं। 2016 में 7 करोड़ 60 लाख पौधे लगाए गए थे और 2015 में 10 करोड़ पौधे लगाए गए थे। छत्तीसगढ़ निर्माण के पश्चात लगातार वृक्षारोपण होने के बावजूद वर्ष 2001 से 2015 तक लगभग 3700 वर्ग किमी जंगल कम हो गया है। बावजूद मुख्यमंत्री रमन सिंह विश्व जनसँख्या दिवस के मौके पर बढ़ते प्रदूषण,वन क्षेत्रफल में तेजी से सिमटने का दोष बढ़ती जनसँख्या पर मढ़ रहे है जबकि इसका असली कारण प्रदेश सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी है जो कि स्वयं मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के कोरबा में दिये गये ब्यान के बाद भी बदस्तूर जारी है।

 

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