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राजनांदगांव जिले में हुये शिक्षा अधिकार भर्ती गड़बड़ी पर आज हाईकोर्ट से आयेगा फैसला

राजनांदगांव। शिक्षा का अधिकार के अंतर्गत प्रवेश हेतु ऑन लाईन प्रवेश की प्रक्रिया 9 मई से लेकर 5 जून तक की गई थी। फार्म भरने के पश्चात नोडल अधिकारियों ने भरे गये फार्मस की जांच पड़ताल कर आवेदनों को स्वीकृत किया। 11 जून को लॉटरी निकाला गया और उस दिन पालकों को यह मौखिक जानकारी दिया गया कि कक्षा-1 में प्रवेश नहीं दिया जावेगा, क्योंकि 256 प्राईवेट स्कूलों ने कक्षा-1 की सीट्स की गलत जानकारी अपलोड कर दिया गया था, जिसके पश्चात 12 जून को कक्षा-1 की सीट्स की जानकारी को आरटीई वेब पोर्टल से बदल दिया गया। यदि जानकारी गलत अपलोड हो गया था तो इसे जिला शिक्षा अधिकारी, नोडल अधिकारियों और प्राईवेट स्कूलों ने गरीब बच्चों से फार्म भरवाने के पूर्व सुधार क्यों नहीं किया गया, जबकि प्राईवेट स्कूलों को जानकारी अपलोड करने के पश्चात उसकी हार्ड कॉपी जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत करना था और उस जानकारी को जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय, रायपुर भेजना था। यदि जानकारी गलत अपलोड हो गया था तो जिला शिक्षा अधिकारी ने इस पर उस समय आपत्ति क्यों नहीं किया और समय रहते इसको सुधार क्यों नहीं गया, जबकि इसके लिये स्कूलों और जिला शिक्षा अधिकारी को पर्याप्त समय दिया गया था।
गरीब बच्चों के फार्म भरने के पश्चात जब नोडल अधिकारियों के द्वारा फार्मस की जांच व पड़ताल किया जा रहा था तो फार्मस को रिजेक्ट क्यों नहीं किया। 11 जून के पश्चात जिला शिक्षा अधिकारी ने सिर्फ कुछ नामी स्कूलों की कक्षा-1 की जानकारी की ही क्यों बदला गया, बाकी स्कूलों की जानकारी क्यों बदला नहीं गया। अब बाकी 253 प्राईवेट स्कूलों ने अपने द्वारा अपलोड किये गये कक्षा-1 की आरक्षित सीट्स में गरीब बच्चों प्रवेश देने से क्यों इंकार किया जा रहा है। पीड़ित पालकों की सिर्फ एक ही मांग है कि जो जानकारी दिखाकर उनसे फार्म भरवाये गये थे उन्हीं जानकारी के अनुसार अब भर्ती लिया जावे।
छत्तीसगढ़ पैरेट्स एसोसियेशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल के द्वारा हाईकोर्ट में याचिका क्रमांक डब्ल्यूपीपीआईएल 62/2018 दायर किया गया है, जिसे शुक्रवार को स्वयं चीफ जस्टिस महोदय इस केस की सुनवाई करेगें। श्री पॉल का कहना है कि राजनांदगांव में शिक्षा का अधिकार भर्ती में हो रही मनमानी और गड़बड़ी की दस्तावेजी साक्ष्य के साथ जिले के सभी बड़े जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी शिकायत किया गया था, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुआ, जबकि जिला शिक्षा अधिकारी, नोडल अधिकारियों और निजी स्कूलों के द्वारा जिले में लगभग 1000 सीट्स में कम भर्ती किये जाने की योजना बनाई जा रही है।
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