October 1, 2020
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आजादी के बाद दूसरी बार 15 अगस्त को पड़ रही नागपंचमी

Image result for 38 साल बाद दूसरी बार 15 अगस्त को पड़ रही नागपंचमीनई दिल्ली। इस बार नागपंचमी का पर्व बहुत ही विशेष है। दरअसल आजादी के बाद दूसरी बार 15 अगस्त के दिन नागपंचमी का पर्व आ रहा है। 38 साल पहले 15 अगस्त 1980 को नागपंचमी पड़ी थी। ज्योतिष के अनुसार भारत देश की कुंडली में पूर्ण कालसर्प योग है। इसलिए इस बार यह पर्व खास बन रहा है। इस दिन देश में सुख-समृद्धि और शांति के लिए उपाय किए जा सकते हैं। इसके साथ ही इस दिन कई विशेष योग भी बन रहे हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी मनाई जाती है। इस बार पंचमी 15 अगस्त को आ रही है इसलिए यह अवसर विशेष बन पड़ा है। क्योंकि भारत की कुंडली में सर्पयोग है। इसलिए इस बार यह पर्व खास बन रहा है। इस दिन श्रद्धालु सुख-समृद्धि और शांति के लिए उपाय कर सकते हैं। इसके साथ ही इस दिन कई विशेष योग भी बन रहे हैं। साल 2018 में सावन का महीना आने वाली 28 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। ये महीना 28 जुलाई से शुरू होकर 26 अगस्त रक्षाबंधन को समाप्त होगा। इसी बीच हरियाली तीज का पर्व 13 अगस्त को व नागपंचमी 15 अगस्त को और 26 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस वर्ष के सावन में 19 साल बाद ऐसा संयोग बन रहा है, जब सावन का महीना 29 से 28 के बजाय पूरे 30 दिन का होगा। साथ ही दूसरा संयोग ये है कि भारत देश के आजाद होने के बाद ये दूसरा मौका होगा जब नागपंचमी का पर्व 15 अगस्त को पड़ रही है। इस महासंयोग से इस बार की नागपंचमी का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा।
विशेष दर्शन, पूजन व काम्य अनुष्ठान के लिए दिन शुभ
इस बार देश की कुंडली में पूर्ण कालसर्प योग है। पूर्ण कालसर्प योग के कारण ही इस बार नागपंचमी का महत्व ज्यादा है। इस बार इस दिन विशेष योग बन रहे है। शुभ कार्यों के लिए इस नागपंचमी में विशेष योग बन रहे है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि के समय पुष्य नक्षत्र तथा चंद्रमा व चार अन्य ग्रह सूर्य, बुध, शुक्र, शनि की साक्षी में पंचग्रही योग था। साथ ही इस दिन ही कालसर्प योग भी था। शायद इसीलिए प्राकृतिक आपदा, आतंकवाद जैसी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं।

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