July 24, 2021
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झोलाछाप डाॅक्टर बेलगाम, ले रहे मरीजों की जान ग्रामीण क्षेत्रों में हावी झोला छाप डाॅक्टर

हरितछत्तीसगढ़ विवेक तिवारी 
पत्थलगांव। झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से आए दिन कोई न कोई मरीज मौत के मुंह में जा रहा है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग उन पर अंकुश लगाने में नाकाम है। विभाग के पास ऐसे डॉक्टरों की अनुमानित संख्या तक नहीं है। ऐसे में कार्रवाई तो दूर, उनकी पहचान करने में ही काफी वक्त लग सकता है। जानकार बताते हैं कि झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या घटने के बजाए दिनोंदिन बढ़ रही है। विदित हो कि गांवों में स्वास्थ्य केंद्रों में ईलाज की कमी से कहीं न कहीं ऐसे डॉक्टरों के पनपने का कारण बन रही है। बेहतर ईलाज का अभाव यहीं, वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोग झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करने के लिए विवश है।

झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या की सही जानकारी इसलिए पता नहीं चल पाता है कि ऐसे डॉक्टर कार्रवाई के डर से एक जगह ज्यादा दिनों तक टिक कर नहीं रहते। हर गांव में कोई न कोई झोलाछाप डॉक्टर ग्रामीण जानकारों की मानें तो ग्रामीण क्षेत्रों में अपना प्रेक्टिस करने वाले लगभग 90 प्रतिशत झोलछाप डॉक्टरों के पास कोई डिग्री नहीं होती। इसके अलावा कोई डिग्री न होने के बावजूद मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। गांवों में विभिन्न नामों से झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें चल रही हैं। ऐसे में ग्रामीणें के द्वारा कई बार षिकायत के बावजुद भी इस मामले में अब तलक कोई ठोस कार्रवाही नही हुई है। ऐस में झोलाछाप डॉक्टरों की लगातार बढ़ती संख्या के लिए विभाग द्वारा झोलाछाप डाॅक्टरों पर कार्रवाई न होना भी बड़ा कारण माना जा रहा है। कई षिकायत होने के बाद और मामला दर्ज कराने के बाद क्या हुआ, इसकी जानकारी किसी को नहीं होती है। झोलाछाप डाॅक्टर के कारनामें से पूर्व में एक ग्रामीण की मौत ग्राम पालीडीह के ग्रामीणों ने बताया कि लालेष्वर सिदार पिता टीको राम सिदार निवासी कमरगा थाना लैलुंगा जो कि पिछले 4 से 5 सालों से यहां रहकर भयावह बिमारियों का ईलाज करना एवं ईलाज के एवज में मोटी रकम वसूलने का आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि इंजेक्षन लगाने पर वहां पक जाना आम हो गया है, जिसकी षिकयत के बावजूद इस पर काई ठोस कार्रवही नही की गई है। वहीं ग्रामीणों ने बताया कि गांव के निवासी राम प्रसाद सिदार एक गंभीर बिमारी से ग्रसित था जिसका ईलाज इसी के द्वारा किया जा रहा था, जब उसके हाथ से बेहतर ईलाज न हो पाया तो उसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल में ले जाया गया देर से दखिल कराने से वहां उसकी मृत्यु हो गई। ग्रामीण व गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के डाॅक्टर इसकी षिकायत एसडीएम, बीएमओ व थाने में करा चुके है पर अभी तक कोई ठोस कर्यवाही न हो से आहत नजर आ रहे हैं।

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