January 20, 2022
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छत्तीसगढ़:सरपंच का तुगलकी फरमान बेबस किसानों की फसल मवेशियों से चरवाने करा दी मुनादी मवेशी नही भेजने पर जुर्माना, मना करने पर गुर्गो से पिटवाने की धमकी

हरित छत्तीगसढ़ शिव प्रताप सिंह जशपुर

आपने किताबों या टीवी में राजाओं के तुगलकी फरमान के बारे में तो जरुर पढ़ा या देखा होगा,, लेकिन आज हम आपको जशपुर जिले के एक ऐसे पंचायत सरपंच के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि अपने तानाशाही और तुगलकी फरमान से पूरे पंचायत के लोगों को परेशान कर रहा है, यहाँ तक कि उसके फरमान का विरोध करने वालों के ऊपर लाठी डंडे भी बरसाए जा रहे हैं,,,,,  आइये आज हम आपको उस गाँव के बारे मेे बताते  हैं जहाँ के किसान सरपंच के तुगलकी फरमान से परेशान हो चुके हैं और उनके पास भूखों मरने तक कि नौबत आ चुकी है,,, आप तस्वीरों में देख सकते हैं कि किस तरह से किसानों की धान, बैंगन, टमाटर, अरहर की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं,, मवेशी धान की फसलों को चौपट कर रहे हैं,,, लेकिन बेचारे असहाय, कमजोर और लाचार किसान रोती हुई आंखों से अपनी फसलों को बर्बाद होते देखने को मजबूर हैं,,, अपनी ही फसलों पर मवेशी चराने को मजबूर हो चुके हैं,,,, अपने सरपंच के तुगलकी फरमान से ये किसान बेबस हो चुके हैं,, इनके सामने सरपंच के आदेश मानने के अलावा कोई रास्ता ही नहीं है,,, क्योंकि सरपंच साहब इन्हें इनके घर तोड़वाने की धमकी देते हैं और विरोध में आवाज उठाने वाले के ऊपर लाठी डंडे से पिटाई भी करा देते हैं,,,,,,जशपुर जिले के पत्थलगांव इलाके के ग्राम पंचायत राजाआमा के सरपंच की दबंगई से पूरे गांव के लोग परेशान हैं,,, दरअसल खमगड़ा जलाशय के किनारे रहने वाले किसानों के घर एवं खेत के डुबान क्षेत्र में आने पर ये सभी किसान पहाड़ी क्षेत्र में रहकर खेतीबाड़ी से अपना गुजर बसर कर रहे थे,, लेकिन ग्राम पंचायत राजाआमा के सरपंच गुलाब साय पैंकरा ने किसानों की फसलों को मवेशियों से चरवा दिया,,, जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया तो सरपंच गुलाब साय पैंकरा ने अपने गुर्गों से उनकी पिटाई करवा भी दी,, सरपंच की तानाशाही इतने में ही खत्म नहीं हुई तो उसने मुनादी कराकर सभी ग्रमीणों को अपनी मवेशी लेकर खेतों में चरवाने का फरमान सुना दिया यहाँ तक कि फसलों पर मवेशी नहीं चराने वालों पर 500 सौ रुपये का जुर्माना लगाने की बात भी कही,, अब इन ग्रामीणों के फसल बर्बाद होने पर इन्हें अपनी रोजी रोटी का डर सताने लगा है, और ग्रामीणों के द्वारा दबी जुबान में संबंधित अधिकारी से शिकायत की भी बात कही जा रही है,,,,

जब सरपंच के इस तुगलकी फरमान के बारे में लोगों को जानकारी मिली तो उन्होंने भी इसका विरोध किया,, ग्राम पंचायत सुरंगपानी क्षेत्र की जनप्रतिनिधि रत्ना पैंकरा ने भी इस फरमान का विरोध किया और मामले में शिकायत की बात भी कही है,,,जब हमने तहसीलदार मायानंद चन्द्रा से इस मामले में पुछा तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही,, लेकिन इस फरमान का विरोध भी किया और मामले में मौके पर जाकर जांच के बाद तुगलकी फरमान सुनाने वाले सरपंच के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की बात कही है।

इस पूरे मामले में जब हमने ग्राम पंचायत राजाआमा के सरपंच साहब से संपर्क किया तो साहब ने इसे वन समिति का फैसला बताते हुए हमसे मिलने से इनकार कर दिया,, लेकिन एक बात तो साफ है कि आज भी ग्रामीण इलाकों में सरपंच अपने आपको राजा समझते हैं और अपने सुविधा अनुसार फैसला देकर ग्रामीणों को फैसला मानने पर विवश कर देते हैं,,, अब इस पूरे मामले में तुगलकी फरमान सुनाने वाले तानाशाह सरपंच के खिलाफ क्या कार्यवाही की जाती है यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

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