July 25, 2021
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जाने पत्थलगांव विधानसभा चुनावी विश्लेषण में किसके सर सेहरा बंधेगा और किसकी होगी मात

35 वर्ष बाद विधान सभा चुनाव वर्ष 2013 में कांग्रेस का अभेद गढ़ माने जाने वाले पत्थलगांव विधान सभा से भा.ज.पार्टी के राजनीती में अबोध प्रत्यासी शिवशंकर पैंकरा ने, आदिवासी मुख्यमंत्री के  नाम से चुनाव लड़ने वाले अजेय योद्वा श्री रामपुकार सिंह को करारी शिकस्त दे दी। परीणाम के बाद राजनीती के धुरंधर विषेषज्ञो द्वारा अब तक विश्लेषण ही किया जा रहा है कि कांग्रेस का हार कैसे हुआ। खोज जारी है और आगे भी जारी रहेगा परन्तु महज चार वर्ष के अल्प अवधि में पत्थलगांव विधानसभा में परिवर्तन अपनी चरम पराकाष्ठा पर है। प्रिंट मिडिया,सोशल मिडिया तक में लोग अफवाहों और ओपीनियन के
तीर चला-चला कर सिर्फ अपने आप को संतुष्ट कर पाये है, पर चुनाव में परिवर्तन का राज जाननें में आज भी असमर्थ है। विधान  सभा अंर्तगत कांग्रेस पार्टी का अपना गुटबाजी जो जग जाहिर है, संगठन 5-6 गुटो में बट गया समझ में आता है पर कांग्रेस के मूल मतदाता भी टूटकर बिखरते जा रहे है। तो कुछ भाजपा की झोली में समाहित हो चुके हैं। हार का ढीकरा समर्पित नेताओं के सिर पर भी फोड़ा गया, जो पार्टी के लिए आज भी नासूर बना हुआ है।
आपसी मतभेद के कारण पार्टी का जनता से सम्पर्क पूरे चार वर्षो तक शून्य  रहा है। कांग्रेस की सबसे बडी ताकत थी तो वह है क्रिश्चियन उरांव की आंख मूंदे ईश्वर का स्वरूप मानकर कांग्रेस को वोट करते रहे है। रामपुकार सिंह गोंड़ समाज से आते है, उनका समाजिक बाहुल्यता विधान सभा में उरांव, कवंर, नांगवंशी के बाद चौथे नम्बर पर आता है। तथा दूसरे आदिवासी भुंइहर, संवरा, पूनिया, खैरवार, मिलाकर पांचवे स्थान पर है।
वर्तमान में उरांव समाज के प्रतिनिधियो ने बाहुल्यता के आधार पर ब्लाक एंव जिला कांग्र्रेस कमेटी के पास विधायक टिकट की दावेदारी कर दी परन्तु संगठन की और से विरोधात्मक उतर के बाद पूरा समाज एक साथ पार्टी के खिलाफ बगावत कर दिया । और समाज के लोगों को कांग्रेस पार्टी संगठन के क्रिया कलाप में भागलेने पर प्रतिबंधित कर दिया है।
कंवर समाज पूर्ण रूप से भाजपा के मतदाता एंव समर्थक रहे है, समाज का विश्वास अर्जित करते हुए शिवशंकर पैंकरा ने अल्प समय में जनताओ का समस्या और कार्यो को ईमानदारी से सही अंजाम तक पहुॅचाया लोगो के बीच अपना छवि अच्छे नेताओं के रूप में स्थापित कर लिया।
नागवंशी समाज मूलतः कांग्रेस के दूसरे नं. के मतदाता थे पर 70 वर्षो से जाति संबधी मत्रात्मक त्रुटि की समस्याओ का दंश झेल रहे थे, ऐसे परिस्थीति में वर्तमान विधायक ने लगातार उनसे सम्पर्क कर आदिवासी समाज के हित मे सरकार को दबाव बनाते रहे है और दुख सुख के भागीदारी रहे, विधायक का मेहनत तब रंग लाया जब डा.रमन सिंह जी भी सरकार ने छत्तीसगढ़ के 18 आदिवासीयो के मात्रात्मक त्रुटि में सुधार किया साथ ही साथ विधानसभा में निवासरत दूसरे आदिवासी समाज सांवरा, भुईहर तथा  खैंरवार भी सरकार के काम से लाभान्वित हुऐ। उल्लेखित लाभन्वित समाज आज भाजपा के झोली मे न सही पर शिवशंकर पैंकरा के ईरादो और उनके झोली पर जा टिका है।
छत्तीसगढ़ मे कांग्रेस के विभाजन के बाद पत्थलगांव मे भी जोगी कांग्रेस का सुगबुगाहट शुरू हो गया है, जनता कांग्रेस के सुप्रिमों अजीत जोगी  की नजर पत्थलगांव विधानसभा के क्रिश्चियन मतदाताओं के उपर टिकी है। आज उरांव समाज से प्रत्याशी तय होता है तो जाहिर है, मुकाबला भाजपा औार जोगी कांगेंस के बीच ही होगा कांगेस तो अपना सर्वस्त्र लुटा चुका है।
Image result for पत्रकार कलमस्पेशल रिपोर्ट नीरज गुप्ता 

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