July 26, 2021
Breaking News

बधाई हो ओपी चौधरी बगैर चुनाव लड़े ही खरसिया विधायक भी बन गये ,इस्तीफा क्या लिया बना दिए विधायक

रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने आईएएस की नौकरी से इस्तीफा क्या दे दिया अभी उनका विधिवत किसी पार्टी में प्रवेश भी नही हुवा है वही सोशल मिडिया में ओपी चौधरी  के समर्थको ने खरसिया विधायक के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है पूर्व में रायपुर कलेक्टर का बोर्ड वाली अम्बेसडर कार में एडिट कर रायपुर कलेक्टर की जगह फोटो शॉप का उपयोग कर खरसिया विधायक चपका दिया गया है वही ओपी चौधरी  के समर्थको द्वारा सोशल मिडिया में राजनीति में प्रवेश लेने पर बधाई देने का दौर शुरू हो गया है
ओपी चौधरी
बहरहाल ये तो तय है की अब ओपी चौधरी सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने वाले है अटकलें लगाई जा रही हैं कि चौधरी रायगढ़ की खरिसया विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।यही वजह है की उनके समर्थको ने उन्हें अभी से ही खरसिया विधायक मान लिया है /
खरसिया से वर्तमान में कांग्रेस के उमेश पटेल विधायक हैं, जो कांग्रेस के दिवंगत नेता नंदकुमार पटेल के बेटे हैं। यह सीट कांग्रेस का गढ़ रही है। चौधरी के जिस खरसिया सीट से चुनाव लड़ने की अटकलें हैं। इस सीट पर अघरिया  समुदाय के वोटरों की भूमिका निर्णायक होती है और चौधरी भी इसी समुदाय से आते हैं। कहा जा रहा कि चौधरी जल्द ही दिल्ली में भाजपा में शामिल होंगे।खास बात यह है कि चौधरी रायगढ़ के ही बयांग के रहने वाले हैं। वे दंतेवाड़ा और जांजगीर के कलेक्टर भी रह चुके हैं। इस्तीफा देने के बाद ओपी चौधरी ने माटी की सेवा करने की भी बात कही है भाजपा एक युवा और चर्चित आईएएस को इस सीट से चुनाव मैदान में उताने की तैयारी कर रही है. मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के करीबी माने जाने वाले ओपी चौधरी भाजपा की टिकट से चुनाव लड़ सकते है भाजपा को एक ऐसे आईएएस अधिकारी का साथ मिल गया  है जो अगहरिया समुदाय के लिए किसी रोल मॉडल से कम नहीं हैं। इस समुदाय का रायगढ़ खरसिया समेत प्रदेश के अन्य इलाको में खासी तादात है 
जाने इस युवा आईएएस के बारे में 
8 साल की उम्र में चौधरी के पिता का निधन हो गया था। ऐसे में मां ने मेहनत करके उन्हें पढ़ाया। इसी वजह से 12वीं में ही उन्होंने आईएएस बनने का फैसला ले लिया था। पीईटी में चयन होने के बावजूद उसे छोड़ दिया क्योंकि वह खुद को जिलाधिकारी के तौर पर ही देखना चाहते थे। 23 साल की उम्र में आईएएस अधिकारी बनने और इतनी बड़ी सफलता के बावजूद वो हमेशा अपनी जमीन से जुड़े रहते हैं। इस संबंध में जब उनसे पूछा गया था तो उन्होंने कहा, ‘जैसे ही आप बड़े ओहदे पर आते हैं, आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। ऐसे में आपकी परवरिश और संस्कार ही आपको जमीनी हकीकत से जोड़े रखती है। आज जमीनी हकीकत के जितने नजदीक होते हैं, उतने ही उसपर खरे उतरते हैं।’
विवेक तिवारी की रिपोर्ट 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *