July 26, 2021
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प्राथमिक शाला मौहारखार स्कूल की जर्जर स्थिति बनी 10 वर्षीय बच्ची तुलसी यादव की मौत का कारण।

प्राथमिक शाला मौहारखार स्कूल की जर्जर स्थिति बनी 10 वर्षीय बच्ची तुलसी यादव की मौत का कारण।

*स्कूल के बाहर स्कूल की शिक्षिका द्वारा पढ़ाने के दौरान बच्ची को सांप ने काटा, बच्ची की हुई आकस्मिक मौत।*

*स्थानीय निवासियों ने स्कूल की जर्जर स्थिति सुधरने तक किया स्कूल बंद करने का फैसला,बच्चों को स्कूल भेजने के लिए किया मना।*

*दिनांक:-26-08-2018*

*संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।*


*करगीरोड कोटा:-रानीसागर पंचायत के अंतर्गत आने वाले मौहारखार प्राथमिक शाला में पांचवी क्लास में पढ़ने वाली 10 वर्षीय छात्रा तुलसी यादव पिता मनोज यादव निवासी मौहारखार की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई, स्कूल के पास रहने वाले स्थानीय निवासियों ने बताया कि स्कूल की शिक्षिका द्वारा बच्चों को स्कूल के बाहर पढ़ाया जा रहा था, उस दौरान यह घटना घटी घटना घटने के बाद 10 वर्षीय छात्रा तुलसी यादव को कुछ समझ में नहीं आया बार-बार पैरों को झटकारते हुए काफी देर बाद शिक्षिका ने देखकर बच्ची को बच्ची के घर लेकर जाया गया, बच्ची के पिता को इसके बारे में जानकारी दी गई उसके बाद करीब 1:15 बजे के आसपास बच्ची को कोटा हॉस्पिटल ले जाया गया जहां पर झटका आने के दौरान ऑक्सीजन और दवाइयां दी गई, जैसा कि कोटा हॉस्पिटल के डॉक्टर द्वारा बताया गया बच्ची को हॉस्पिटल से लाने के बाद बच्ची की तबीयत फिर से खराब होने लगी मुंह से झाग आने पर तत्काल उसे फिर से कोटा हॉस्पिटल लेकर परिवार द्वारा लेकर जाया गया जहां से उसे बिलासपुर रिफर कर दिया गया बिलासपुर पहुंचते ही बच्ची की मौत हो गई मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल बच्ची के पोस्टमार्टम के बाद वापस कोटा लाने की तैयारी है।*

*प्राथमिक शाला मोहारखार की जर्जर स्थिति को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है,कि स्कूलों की हालत क्या होगी 60 से 65 बच्चों की स्कूल में उपस्थिति रहती है,प्रधान पाठक के बगैर दो महिला शिक्षकों द्वारा बच्चों को पढ़ाया जाता है,स्कूलों की जर्जर स्थिति के अलावा अतिरिक्त कमरे जो बनाए गए हैं, स्कूल के बगल से उसकी भी हालत इतनी जर्जर है ,कि बच्चे वहां पर बैठ कर पढ़ नहीं सकते बरसात के दिनों में पूरा पानी टपकता और बरसता है, इन वजहों से आज शिक्षिका द्वारा बच्चों को बाहर पढ़ाया जा रहा था, स्थानीय बच्चों के अन्य पालको द्वारा भी यह बताया गया कि इससे पूर्व भी बच्चों को बाहर पढ़ाया जाता रहा है,आज स्कूलों की जर्जर स्थिति के वजह से स्कूल के बाहर बच्चों को पढ़ाया जा रहा था, उस दौरान नीचे जहां पर बिल नुमा जगह से सांप निकल कर एक 10 वर्षीय छात्रा की मौत का कारण बना, शिक्षा विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारी लाख दावा करें की सरकारी स्कूलों में स्कूलों की जर्जर स्थिति, पढ़ाई की जर्जर स्थिति को देख कर आने वाले समय में कहीं ऐसा ना हो कि पालक अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने के बजाए घर में रखना पसंद करें, जहां पर जान माल की सुरक्षा ना हो वहां पर कोई भी पालक गण अपने बच्चों को क्यों पढ़ाएगा।*

*इस पूरे मामले पर स्कूल के पास रहने वाले बच्चों के स्थानीय पालकों ने स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका पर भी गंभीर आरोप लगाए उनके द्वारा बताया गया, कि स्कूल में पढ़ाने वाली शिक्षिका बच्चों से मारपीट करती हैं, बच्चों को पढ़ाने के बजाय बाहर निकल कर मोबाइल में बात करती रहती हैं ,शिकायत की बात करने पर उल्टे बच्चों के बालकों को ही डांट दिया जाता है, इस बारे में रानीसागर पंचायत सरपंच मुन्नीबाई की भूमिका भी संदिग्ध है ,स्कूल के बाहर बाउंड्री वॉल पर लाखों रुपए खर्च कर दिया गया पर स्कूल के अंदर की जगहों को स्कूल के कमरों को, स्कूल के किचन के लिए पंचायत के सरपंच को कोई सरोकार नहीं आज जो घटना घटी है, जो लापरवाही बरती गई है ,जिसकी वजह से एक 10 वर्षीय मासूम छात्रा की मौत हो गई शिक्षा विभाग और शिक्षा विभाग के शिक्षिका के अलावा रानीसागर पंचायत के सरपंच भी दोषी है ,लाखों रुपए का बंदरबांट लाखों रुपए का भ्रष्टाचार की शिकायतें भी इस पंचायत के बारे में आ चुकी है ,पंचायत के सरपंच मुन्नी बाई से इस बारे में जानकारी लेने पर उनको स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षकों के नाम ही मालूम नहीं था।*

आज की इस पूरी घटना से यह स्पष्ट होता है,कि शिक्षा विभाग लाख दावा करें कि सरकारी स्कूलों का स्तर अच्छा हो गया है ,स्कूलों में अच्छी पढ़ाई हो रही है ,यह केवल कागजों में ही दिखाई पड़ती है,वास्तविकता से इसका कोई लेना देना नहीं है, स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक और शिक्षिकाओं को संविलियन होना है ,पर बच्चों की पढ़ाई से उनका कोई सरोकार नहीं है इस बात की जानकारी से ताज्जुब होगा कि सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक और शिक्षिकाओं के खुद के बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं शिक्षक-शिक्षिकाओं के अलावा शिक्षा विभाग के आलाधिकारियों के बच्चे भी प्राइवेट स्कूल में पढ़ते हैं ,इससे तो यही पता चलता है, कि सरकारी स्कूलों का स्तर क्या होगा आज कि वर्तमान स्थिति में अगर आपको सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाना होगा तो उनकी सुरक्षा और जान-माल का दायित्व शिक्षा विभाग को नहीं बल्कि स्वयं आपको करना पड़ेगा पढ़ाई के दौरान अगर किसी छात्र-छात्राओं के साथ अगर कोई घटना या दुर्घटना हो जाती है ,तो इस पर शिक्षा विभाग और शिक्षक क्या करेंगे बस घटना की जानकारी बच्चों के माता-पिता को देकर अपनी औपचारिकता पूरी कर लेंगे शिक्षा विभाग का पूरा सिस्टम विकलांग हो चुका है ,उसे खुद बैसाखी की जरूरत है ,शासन से आने वाली लाखों करोड़ों रुपए राशि शिक्षा विभाग द्वारा कहां कर दी जाती है, आज तक जानकारी नहीं हो पाई शिक्षा विभाग द्वारा कागजों पर ही सरकारी स्कूलों का बखान कर रही है ,वास्तविकता से शिक्षा विभाग को कोई सरोकार नहीं।

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