July 25, 2021
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पांच साल की मूकबधिर से दुष्कर्म कर हत्या वाले को फांसी; पॉक्सो एक्ट के तहत प्रदेश में पहला फैसला

Death sentence to accused by killing a silent girlमानसिक व शारीरिक रूप से अशक्त मूक-बधिर अव्यस्क बालिका के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी जघन्य हत्या के मामले में जिला न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी को फांसी व दो सह अभियुक्तों को पांच-पांच साल की सजा सुनाई है। दुष्कर्म के मामले में दुर्ग कोर्ट में पहली बार फांसी की सजा सुनाई गई।पांच साल की मूकबधिर से दुष्कर्म कर हत्या के मामले में दुर्ग विशेष न्यायाधीश ने आरोपी को फांसी की सजा दी है। वारदात को राम सोना (24) ने 25 फरवरी 2015 को खुर्सीपार में अंजाम दिया था।दुर्ग विशेष न्यायाधीश शुभ्रा पचौरी ने आरोपी की मां कुंती सोना और अन्य आरोपी अमृत सिंह उर्फ केली (२३) को साक्ष्य छिपाने के आरोप में 5-5 साल की सजा सुनाई है। इस मामले में फैसला शुक्रवार रात 8 बजे तक आया। दुर्ग न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता राज कुमार तिवारी के अनुसार पॉक्सो एक्ट 2012 में बना, अधिनियम के बनने के बाद छत्तीसगढ़ में यह पहली फांसी की सजा है। मामले की पैरवी कर रहे अतिरिक्त लोक अभियोजक कमल वर्मा ने बताया कि खुर्सीपार का राम सोना (24) पड़ोस में रहने वाली साढ़े पांच साल की मासूम को उठाकर अपने घर ले गया। पहले राम सोना ने उसके साथ दुष्कर्म किया, फिर ईंट-पत्थर से मारकर उसकी हत्या कर दी। बच्ची को मौत के घाट उतारने के बाद लाश काे घर पर ही छिपा दिया। कुंती सोना ने बेटे को देख लिया, पर राम, कुंती और दोस्त अमृत सिंह ने लाश को प्लास्टिक की बोरी में भरकर रेलवे ट्रैक के पास फेंक दिया। तीनों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। घटना के बाद राम फरार हो गया था।पॉक्सो एक्ट के तहत विशेष न्यायाधीश श्रीमती शुभ्रा पचौरी की अदालत ने रात आठ बजे राम सोना को मृत्युदंड व कुंती व अमृत को साक्ष्य छिपाने के मामले में पांच-पांच वर्ष की सजा सुनाई गई। इस दौरान मौजूद पीड़ित परिवार ने कहा, हमारी बच्ची को अंततः न्याय मिल गया।

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