July 24, 2021
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खरसिया कांग्रेस का गढ़, इसे ढहाना युवा आइएएस ओपी चौधरी के लिए आसान नही

छत्तीसगढ़ में भाजपा के पितृ पुरुष लखीराम अग्रवाल की जन्म स्थली खरसिया विधानसभा सिट में अब तक कांग्रेस का ही कब्जा रहा है एसे में राज्य के युवा आइएएस ओपी चौधरी के इसी सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत हाशिल करना आसान नही होगा यहा से कांग्रेस के अलावा अब तक किसी भी पार्टी ने चुनाव नहीं जीती है,पिछले 35 साल से कांग्रेस के अभेद गढ़ के रूप में तब्दील हो गए खरसिया को जीतने की जुगत में लगी भाजपा आईएएस से इस्तीफा देने वाले ओपी चौधरी को वहां से प्रत्याशी बना सकती है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष स्व. नंदकुमार पटेल ने यह सीट पांच बार जीती थी और उनके बेटे उमेश पटेल पिछले चुनाव में यहां से कांग्रेस के विधायक बने। पटेल परिवार नंदेली गांव का है और चौधरी इसी से नजदीक बायंग गांव के निवासी तो हैं ही, पिछले आठ साल से इस क्षेत्र के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने में भी लगे हैं। माना जा रहा है कि भाजपा इसे भी संभावना के रूप में देख रही है। कलेक्टरी छोड़कर खरसिया से चुनावी रण में उतरने को तैयार ओपी चौधरी भी वहां के मौजूदा कांग्रेसी विधायक उमेश पटेल की तरह अघरिया समाज के ही हैं।यहां अघरिया व कोलता समाज के लोगों की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है। साहू समाज भी इतना ही है। पिछले तीन चुनाव से भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल अघरिया समुदाय के व्यक्ति को ही उम्मीदवार बनाती रही है, लेकिन समीकरण हमेशा कांग्रेस के पक्ष में रहा। छत्तीसगढ़ में भाजपा के संस्थापक रहे लखीराम अग्रवाल ने 1990 में इस सीट भाग्य आजमाया था। 90 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नंद कुमार पटेल के खिलाफ उन्हें टिकट दिया था, लेकिन अग्रवाल 3893 वोट से वह चुनाव हार गए थे।

खरसिया सीट से विधायक

– 1977, 1980 और 1985 लक्ष्मी प्रसाद पटेल

– 1990, 1993, 1998, 2003 व 2008 नंद कुमार पटेल

– 2013 उमेश पटेल

आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में भी जनता पार्टी की आंधी के बावजूद इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रहा। कांग्रेस के लक्ष्मी प्रसाद पटेल ने 20 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी।

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