July 24, 2021
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भोजली पर्व” धूमधाम से मनाया गया,,भोजली महोत्सव के रूप में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

“भोजली पर्व” धूमधाम से मनाया गया,,भोजली महोत्सव के रूप में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

*सांस्कृतिक कार्यक्रम में कोटा विधायिका डॉ रेणु जोगी भी हुई शामिल।*

*दिनाँक:-27-08-2018*

*संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।*

*करगीरोड कोटा:- छत्तीसगढ़ के प्रथम त्यौहार छेरछेरा,हरेली के त्योहारों के साथ भोजली पर्व का भी विशेष महत्व रहता है,रक्षाबंधन के दूसरे दिन ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भोजली पर्व को विशेष रूप से मनाती हैं, एक प्रकार से पूजती हैं, इसी कड़ी में कोटा नगर व कोटा नगर के आसपास वार्डों कोटा नगर से लगे गांव से छोटे-छोटे बच्चे युवतियां,और महिलाएं,अपने सरो पर भोजली को रखकर गीत गाती हुई कोटसागर तालाब में विसर्जित करती हैं,पिछले साल की भांति इस साल भी भोजली महोत्सव का आयोजन वार्ड पार्षद मनोज साहू और सहयोगियों द्वारा आयोजित किया गया, साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए गए, कोटेश्वर धाम में भोजली महोत्सव का यह दूसरा वर्ष है।*


*भोजली महोत्सव में इस वर्ष चुनावी वर्ष होने के कारण राजनीतिक दलों के नेता को भी मुख्य अतिथि के रुप में शामिल कर आमंत्रण दिया गया था, जिसमें कि वर्तमान कोटा विधायिका रेणु जोगी आमंत्रित थी, उनके साथ नगर के ही शिव प्रसाद मिश्रा, लल्लन महाराज, विमल गुप्ता, पूर्व जनपद उपाध्यक्ष मनोज गुप्ता, पूर्व जनपद अध्यक्ष बैकुंठनाथ जयसवाल विधायक प्रतिनिधि, विकास सिंह ठाकुर ,सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए साथ ही विशेष रूप से सिद्धिविनायक मंदिर के महंत दिव्यकांत शर्मा भी उपस्थित रहे, कार्यक्रम तो वैसे भोजली का था पर मंच पर आसीन सभी बुद्धिजीवी, गणमान्य,नेतागण छजका के विराजमान थे, डॉ रेणु जोगी जो कि अभी वर्तमान में कांग्रेस विधायिका है ,पर मंच में कांग्रेस नेताओं या कार्यकर्ताओं की उपस्थिति नहीं रही, पूरे मंच पर जोगी कांग्रेस के नेताओं का कब्जा रहा, जैसा कि पूर्व में भी डॉ. रेणु जोगी के कार्यक्रम में रहता है, कार्यक्रम तो भोजली पर्व का था ,पर मंच में आसीन सभी नेता गणों को देखते हुए कब राजनीतिक कार्यक्रम में बदल गया पता ही नहीं चला, मंदिर के पास भोजली महोत्सव का कार्यक्रम चल रहा था, वही नीचे लोगों ने दुकाने लगा कर रखी थी ,मेले जैसा माहौल था, महिलाओं, बच्चों और युवतियों द्वारा खरीददारी भी की जा रही थी, यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए कोटा थाना प्रभारी कृष्णा पाटले सहित पुलिस के जवान मुस्तैद थे, जो कि पूरे कार्यक्रम के दौरान यातायात व्यवस्था बनाए हुए थे।*

सावन महीने की सप्तमी को छोटी॑-छोटी टोकरियों में मिट्टी डालकर उनमें अन्न के दाने बोए जाते हैं,ये दाने धान गेहूं जौ के होते भाग्य है,ब्रज और उसके निकटवर्ती प्रान्तों में इसे भुजरियाँ, कहते हैं, इन्हें अलग-अलग प्रदेशों में इन्हें फुलरिया, धुधिया, धैंगा और ‘जवारा,मालवा या भोजली भी कहते हैं, तीज या रक्षाबंधन के अवसर पर फसल की प्राण प्रतिष्ठा के रूप में इन्हें छोटी टोकरी या गमले में उगाया जाता हैं,जिस टोकरी या गमले में ये दाने बोए जाते हैं, उसे घर के किसी पवित्र स्‍थान में छायादार जगह में स्‍थापित किया जाता है उनमें रोज़ पानी दिया जाता है, और देखभाल की जाती है,दाने धीरे-धीरे पौधे बनकर बढ़ते हैं, महिलायें उसकी पूजा करती हैं एवं जिस प्रकार देवी के सम्‍मान में देवी-गीतों को गाकर जवांरा जस-सेवा गीत गाया जाता है वैसे ही भोजली दाई (देवी) के सम्‍मान में भोजली सेवा गीत गाये जाते हैं,सामूहिक स्‍वर में गाये जाने वाले भोजली गीत छत्‍तीसगढ की शान हैं, खेतों में इस समय धान की बुआई व प्रारंभिक निराई गुडाई का काम समापन की ओर होता है,किसानों की लड़कियाँ अच्‍छी वर्षा एवं भरपूर भंडार देने वाली फसल की कामना करते हुए फसल के प्रतीकात्‍मक रूप से भोजली का आयोजन करती हैं,सावन की पूर्णिमा तक इनमें ४ से ६ इंच तक के पौधे निकल आते हैं, रक्षाबंधन की पूजा में इसको भी पूजा जाता है,और धान के कुछ हरे पौधे भाई को दिए जाते हैं,या उसके कान में लगाए जाते हैं, भोजली नई फ़सल की प्रतीक होती है,और इसे रक्षाबंधन के दूसरे दिन विसर्जित कर दिया जाता है,नदी,तालाब और सागर में भोजली को विसर्जित करते हुए अच्छी फ़सल की कामना की जाती है।

कार्टून

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