October 20, 2021
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बासुकीनाथ में जल्द पूरी होती है मुराद, देवघर जाएं तो बासुकीनाथ जरुर जाएं..

बासुकीनाथ धाम में जलाभिषेक नहीं तो बाबा की पूजा नहीं

वासुकिनाथ अपने शिव मन्दिर के लिये जाना जाता है। वैद्यनाथ मन्दिर की यात्रा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक वासुकिनाथ में दर्शन नहीं किये जाते। यह मन्दिर देवघर से 42 किलोमीटर दूर जरमुण्डी गाँव के पास स्थित है। यहाँ पर स्थानीय कला के विभिन्न रूपों को देखा जा सकता है। इसके इतिहास का सम्बन्ध नोनीहाट के घाटवाल से जोड़ा जाता है। वासुकिनाथ मन्दिर परिसर में कई अन्य छोटे-छोटे मन्दिर भी हैं। ऐसी मान्यता है कि बासुकीनाथ मंदिर में मांगी गयी मुराद जल्द पूरी होती है. एक मिथक के मुताबिक देवघर मंदिर में जहां श्रद्धालुओं के ‘दीवानी मुकदमों’ की सुनवाई होती है वहीं बासुकीनाथ में ‘फौजदारी मुकदमों’ की. इसका मतलब यही हुआ कि बासुकीनाथ मंदिर में बैद्यनाथ मंदिर की तुलना में मुराद जल्द पूरी होती है.झारखंड के देवघर जिला में स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ धाम में जो कांवड़िये जलाभिषेक करने पहुंचते हैं, वे बासुकीनाथ मंदिर में जलाभिषेक करना नहीं भूलते। लोगों की ऐसी मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के दरबार में यदि दीवानी मुकदमों की सुनवाई होती है तो बासुकीनाथ में फौजदारी मुकदमे की सुनवाई होती है। जब तक बासुकीनाथ मंदिर में जलाभिषेक नहीं किया जाता तब तक बाबा बैद्यानाथ धाम की पूजा अधूरी मानी जाती है।भक्तों को विश्वास है कि बाबा बासुकीनाथ के दरबार में मांगी गई मुराद जरूर व तुरंत पूरी होती है।

कहा जाता है कि प्राचीन काल में बासुकीनाथ घने वनों से आच्छादित इलाका था, जिसे उन दिनों दारूक वन का इलाका कहा जाता था। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी वन में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग का निवास था। शिव पुराण में मिले वर्णन के अनुसार यह दारूक वन दारूक नाम के राक्षस के अधीन था। माना जाता है कि दुमका का नाम भी इसी दारूक वन से पड़ा है।

सुत्रों के मुताबिक, एक बार बासु नाम का एक व्यक्ति कंद की खोज में भूमि खोद रहा था। इस दौरान बासु का औजार भूमि में दबे शिवलिंग से टकरा गया और वहां से दूध बहने लगा। बासु यह देखकर भयभीत हो गया और भागने लगा। उसी वक्त एक आकाशवाणी हुई, “भागो मत, यह मेरा निवास स्थान है। तुम पूजा करो।” आकाशवाणी के बाद बासु वहां पूजा-अर्चना करने लगा और तभी से शिवलिंग की पूजा होने लगी जो आज भी जारी है।

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