October 1, 2020
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गणेश और विश्वकर्मा जयंती एक साथ का संयोग

Image result for श्रीगणेश पर्व विश्वकर्मा जयंती का संयोगभाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी 17 सितंबर को गणेश व विश्वकर्मा जयंती पर्व एक साथ मनाया जाएगा ज्योतिष कालगणना के हिसाब से यह दुर्लभ है। देवों में प्रथम पूजित गणेश जहां विघ्नों को दूर करने वाले हैं वहीं भगवान विश्वकर्मा निर्माण कार्यों के लिए आदि शिल्पी माने जाते हैं।इस बार भगवान श्रीगणेश पर्व के दौरान ही ब्रह्मांड के शिल्पकार भगवान विश्वकर्मा की जयंती का संयोग पड़ रहा है। 13 सितंबर को सुबह से दोपहर तक शुभ मुहूर्त में जहां घर-घर भगवान गणेशजी की प्रतिमाएं प्रतिष्ठापित की जाएंगी वहीं तीन दिन पश्चात 17 सितंबर को ब्रह्मांड शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती मनाई जाएगी।  व्यवसायिक कार्य साधना व गृह निर्माण की कामना की दृष्टि से यह उत्तमफलदायी साबित होगा। उत्तम कार्य सिद्घि के लिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है व्यवसाय जगत से जुड़े लोगों द्वारा विश्वकर्मा जयंती के दिन कल पुर्जों के अलावा व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में विश्वकर्मा भगवान की पूजा की जाती है ज्योतिषाचार्य मूलचंद शास्त्री की माने तो भगवान विश्वकर्मा अंगिरा ऋषि के पुत्र हैं जिनका स्वभाव ही शुभ लक्षणों को अंगीकार करना है इस आशय से भगवान विश्वकर्मा शुभ लक्षणों से निर्माण कार्यों को परिपूर्ण करते हैं। भगवान गणेश रिद्घि व सिद्घी पति के अलावा शुभ व लाभ के पिता है भगवान गणेश शुभ लक्षणों के प्रदाता हैं इसलिए गणेश पूजा व विश्वकर्मा पूजा का शुभ होने की वजह से विशेष लाभ का योग बन रहा है इस अवसर पर गणपति व विश्वकर्मा की एक साथ पूजा किए जाने से सर्व सुभ लक्षणों के साथ लाभ की प्राप्ति होगी। यह कई वर्षों बाद आया है भवन निर्माण की आकांक्षा रखने वाले भक्तों के लिए यह अत्यंत फलदायी होगा विघ्नविनाशक होने के कारण भगवान गणेश की पूजा विधान में योग लक्षण का सभी ओर से फलदायी होते हंै। चतुर्थी के दिन सुबह 7 बजे से शाम 6.42 बजे तक विश्वकर्मा व गणेश पूजन विधि-विधान से उत्तम फलदायी होगा। 

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