July 25, 2021
Breaking News

मनी लांड्रिंग में फंसे पूर्व IAS के बाद अब CA पर ED ने कसा शिकंजा, जब्त की सम्पत्ति

हरित छत्तीसगढ़ रायपुर

रायपुर. मनी लांड्रिंग मामले में पूर्व आईएएस बाबूलाल अग्रवाल के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय-ईडी (छत्तीसगढ़) ने पूर्व आईएएस के सीए सुनील अग्रवाल की 20 लाख की सम्पत्ति जब्त कर ली है।ईडी की जांच के बाद धनशोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत यह संपत्ति जब्त की गई है। ईडी के आला अधिकारियों ने बताया कि जब्त संपत्ति में देवपुरी स्थित एक भूखण्ड जिसका खसरा क्र.-84/23 तथा 84/25 व माप 1233 वर्ग फीट है।
बताया जा रहा है कि सीए ने यह राशि बाबूलाल अग्रवाल के लिए मनी लॉन्ड्रिंग करके प्राप्त की थी। ईडी के आला अधिकारियों ने बुधवार को सीए से पूछताछ की। उस जांच में उसने अपना अपराध स्वीकार किया। उसने अपने भतीजे आलोक अग्रवाल एवं चाचा विनोद अग्रवाल के साथ खरोरा व आसपास के ग्रामीणों से संपर्क कर उनके नाम से पैन कार्ड जारी करवाया और अधिकांश की आयकर रहित आयकर विवरणी दाखिल की। उसने इन पैन कार्ड, आयकर रिर्टन, फोटोग्राफ व अन्य दस्तावेजों को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, रामसागर पारा और पंडरी ब्रांच में कुल 446 खाते खोलने में प्रयोग किया। इसमें जाली हस्ताक्षरों का उपयोग किया गया। अधिकारियों ने बताया कि सुनील अग्रवाल ने कहा कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के बैंक अधिकारियों ने प्राइम इस्पात लिमिटेड के निदेशक बाबूलाल अग्रवाल के भाई पवन अग्रवाल और अशोक कुमार अग्रवाल से मिलकर यह खाते खोले।
सुनील अग्रवाल इन दिनों रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है। ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम-2002 के अंतर्गत यह कार्रवाई की है। देवपुरी स्थित सुनील अग्रवाल की जमीन जिसका खसरा नंबर 84/23-84/25 (1223 वर्गफीट) है, इस पर ईडी ने कब्जा किया है। ईडी अधिकारियों के मुताबिक बाबूलाल अग्रवाल के साथ काम करते हुए सीए ने कमीशन के रूप में रुपए हासिल करते हुए सम्पत्ति खरीदी थी। इससे पहले जांच में आरोपी ने अपराध स्वीकार किया है।
सीए अग्रवाल पर फर्जी शेल कंपनियां खोलने के भी आरोप हैं, जो कि बीएल अग्रवाल के इशारे पर किया गया थ। गत दिनों ईडी नई दिल्ली की टीम ने रायपुर सहित अन्य शहरों में दबिश दी थी। इसमें अधिकारियों को सीए सुनील के बारे में पुख्ता सबूत हाथ लगे थे।

ये है मामला
आईएएस अग्रवाल ने कालेधन को सफेद करने के लिए सीए अग्रवाल की मदद से खरोरा और उसके आसपास के ग्रामीणों के नाम से 446 बेनामी खाते खुलवाए। वषज़् 2006 से 2009 के बीच इन खातों में 39 करोड़ रुपए जमा किए गए। 12 दिसंबर 2008 को 67 बेनामी खातों में 1.68 करोड़ रुपए की राशि जमा हुई। यहीं से आयकर विभाग को पहली बार संदेह हुआ। इन खाता धारकों की जांच हुई। ग्रामीणों के दस्तावेज और हस्ताक्षरों का मिलान किया गया तो फजीवज़ड़े का खुलासा हुआ। मामले की जांच सीबीआई ने भी शुरू की। बाद में आईएएस अग्रवाल ने इस मामले को पीएमओ के जरिए एसीबी के पास शिफ्ट कराने के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की रिश्वत देने का सौदा किया। इस पर वे सीबीआई के हत्थे चढ़ गए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *