September 24, 2021
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भक्तिमय हुआ पत्थलगांव, सैकड़ों महिलाओं ने कलश यात्रा से किया नवरात्रि का शुभारंभ

हरीत छत्तीसगढ़ विवेक तिवारी पत्थलगांव।
शारदीय नवरात्रि आज से शुरू हो चुकी है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है जिसकी शुरुआत प्रथमा यानी पहले दिन कलश स्थापना के साथ होती है। पत्थलगांव में पूरा माहौल भक्तिमय हो चुका है।
माता के जयघोष के साथ नवरात्र का आगाज गुरुवार को हो गया। शारदीय नवरात्र के पहले दिन गुरुवार को पत्थलगांव शहर के सत्यनारायण मन्दिर समेत अम्बिकापुर मार्ग दुर्गा मंदिर,मंडी प्रांगण,बाजार पारा समेत अन्य सार्वजनिक पंडालों से विशाल कलश शोभा यात्रा निकाली गई। जिसमें सैकड़ों की संख्या में बच्चियों व महिलाओं ने माथे पर कलश लेकर नगर के सत्यनारायण मन्दिर से जल भरकर पूजा स्थल तक लेकर आई। इधर जशपुर मार्ग बाजार पारा पंडाल से भी विशाल कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें सेकड़ो महिलाओं व बच्चों ने हिस्सा लिया। गाजे बाजे के साथ मईया के जयघोष के बीच सभी स्थलों के लिए सत्यनारायण मन्दिर से कलश में जल भरकर लाया गया। इस यात्रा में शामिल युवकों की टोली बाजे की धून पर थिरकते भी दिखाई दिये।
सत्यनारायण मन्दिर में दिनभर रही गहमागहमी
शरद ऋतु के नवरात्र का काफी महत्व है। जिसके कारण गुरुवार को पत्थलगांव में विराजे माता के स्थलों पर पूजा पाठ विधिवत ढंग से हो रही है। नवरात्र के पहले दिन सत्यनारायण मन्दिर के यजमान बाबा महाराज सपत्नी महिलाओ व बच्चों की अगुआई में कलश यात्रा में शामिल होकर मन्दिर प्रांगण से जल लाकर मंदिर में कलश रखकर विधिवत पूजा शुरू करते हुए मां से सुख शांति की कामना का आशीर्वाद लिया। विदित हो कि नवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है।हर वर्ष की तरह इस बार भी पत्थलगांव में शारदीय नवरात्र धूमधाम से मनाया जा रहा है,21 सितंबर से शुरू होकर नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का आखरी उपवास यानी नवमी 29 सितंबर को होगी।
पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा
शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है। माना जाता है कि देवी के इस रूप का नाम शैलपुत्री इसलिए पड़ा क्योंकि उनका जन्म हिमालय के यहां हुआ था। मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। अगर हमारे जीवन में स्थिरता और शक्ति की कमी है तो मां शैलपुत्री की पूजा अवश्य करनी चाहिए। महिलाओं के लिए तो मां शैलपुत्री की पूजा काफी शुभ मानी गई है। नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना करें और उस दिन व्रत करने का संकल्प लें। घट स्थापना प्रतिपदा तिथि को की जाती है। घट यानि कलश..इसे भगवान गणेश का रूप माना जाता है और किसी भी तरह की पूजा में सबसे पहले पूजा जाता है।
कलश स्थापना का विशेष महत्व
नवरात्रों में कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कलश की स्थापना करने से परेशानियां दूर होती हैं और घर में खुशहाली व संपन्नता आती है। कलश स्थापना के साथ ही नवरात्र के व्रत की शुरुआत होती है। कलश स्थापना के लिए सबसे पहले एक पाटे पर लाल कपड़ा बिछाकर थोड़े से चावल रखें। ये चावल गणेश जी के प्रतीक स्वरूप होते हैं। इसके बाद मिट्टी, तांबा, पीतल, सोना या चांदी जिस का भी संभव हो उसका कलश रखें। उस कलश में मिट्टी भरें और साथ ही उसमें थोड़े से समूचे जौ भी डाल दें। इसके बाद कलश पर रोली से स्वास्तिक बना कर मौलि यानी कि रक्षा सूत्र से बांध दें। फिर नारियल व आम के पत्ते रखते हुए कलश के ढक्कन को चावल से भर दें। इसके बाद उस पर फल, मिठाई पान, सुपारी, पैसे आदि चढ़ाकर दीप जलाएं।
भूलकर भी नवरात्र में न करें ये काम –
नवरात्रि का व्रत रखने वालों को इस दौरान न ही अपने बाल कटवाने चाहिए और शेविंग भी नहीं करवानी नहीं चाहिए।
– यदि आप इस दौरान कलश की स्थापना करते हैं और अखंड ज्योति जला रहे हैं तो इस समय घर को खाली छोड़कर कहीं भी न जाएं।
– नवरात्रि में नॉन वेज, प्याज, लहसुन आदि की मनाही होती है।
-नवरात्रि के पूरे नौ दिन तक नींबू काटना अशुभ माना जाता है।
– नवरात्रि के इन नौ दिनों में दोपहर के समय सोना नहीं चाहिए।

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