August 3, 2021
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छत्तीसगढ़, 7वीं बार डीएड की परीक्षा में बैठे 46 गुरुजी नकल में फंसे,नकल से बनेंगे गुरुजी तो कैसे संवारेंगे भविष्य

हरित छत्तीसगढ़ रायपुर

रायपुर। अब तक दसवीं या बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों को नकल करते देखा और सुना होगा, मगर जब गुरुजी ही नकल करने लगे तो देश का भविष्य कैसा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ में जो गुरुजी छह बार डीएड की परीक्षा में पास नही हुए थे उनमें से कुछ गुरुजी को डीएड की परीक्षा में बैठने का अवसर दिया था। इनमें से 46 लोगो के नकल प्रकरण सामने आए हैं। अब इनका परीक्षा परिणाम निरस्त करने की प्रक्रिया चल रही है। विदित हो कि कुछ गुरुजी डीएड की परीक्षा छह बार देने के बावजूद भी परीक्षा पास नहीं कर पाए थे लिहाजा उन्हें सातवीं बार परीक्षा में बैठाया गया। इस सम्बंध में मिली जानकारी के मुताबिक माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) से डीएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) करने वाले 4 हजार 500 गुरुजी छह बार परीक्षा के अवसर में भी पास नहीं हो सके तो सातवीं बार परीक्षा ली गई। इनमें 46 गुरुजी नकल करते पकड़े गए।गौरतलब हो कि सरकारी विभागों में विभागीय परीक्षा पास करने की अनिवार्यता है। शिक्षा के अधिकार के कानून के तहत भी शिक्षकों का ट्रेंड होना जरूरी है। नकल प्रकरण सामने आने के बाद परिणाम को निरस्त हो जाने से अब इनके पास सिर्फ एक और अवसर बचा है।नियमानुसार डीएड की परीक्षा के लिए अधिकतम छह बार ही परीक्षा के लिए अवसर देने का प्रावधान था। परीक्षा में बैठने के बाद कुछ गुरुजी छह बार में भी परीक्षा पास नहीं कर पाए। लिहाजा उन्हें सातवीं बार परीक्षा में बैठाया गया था जहाँ 46 गुरूजी नकल मारते पकडे गए। बहरहाल यह सोचने वाली बात है कि उस देश व प्रदेश का भविष्य क्या होगा, जहा बच्चों को काफी अर्से से शिक्षण देने वाले शिक्षक को शिक्षण कार्य से सम्बंधित विषय की डीएड जैसी परीक्षा को भी छह बार से ज्यादा परीक्षा देने के बावजूद पास नही हो सके और आखिरकार सातवी बार मे उन्हें नकल का सहारा लेना पड़ जाए।

 

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