July 24, 2021
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छत्तीसगढ़ में ये 13 जीवनरक्षक दवा नही है खाने लायक, बीमारी में इनसे कोई फायदा नही होने वाला

हरित छत्तीसगढ़ रायपुर

 छत्तीसगढ़ में आपूर्ति हो रही 13 जीवनरक्षक दवाओं को खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला ने जांच के दौरान फेल पाया है। 13 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। विदित हो कि खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला ने 10 महीने में 45 से अधिक दवाओं के सेंपल लिए। इनमें उत्तराखंड, उप्र व राजस्थान की दवा निर्माता कई कंपनियाें के 13 नमूने फेल पाए गए हैं जिनमें कुछ नामचीन कंपनियां भी शामिल हैं उनकी दवाइयां खाने लायक नहीं हैं. बीमारी में इन दवाइयों को खाने से कोई फायदा नहीं होने वाला. इन कंपनियों की दवाइयां मानकों पर फेल साबित हुई हैं. यह खुलासा हुआ है कि खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला की सर्वे में जिसमे 13 दवा कम्पनियो के सैंपल फेल हुए हैं. लेबोरेट्री में जो दवाएं फेल हुई हैं, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग उन निर्माता कम्पनी पर केस करने की तैयारी में हैं।

ये है वह दवाएं जो हुईं लेबोरेट्री में फेल हो गयी
1– आईबुप्रोफेन 400 एमजी, पैरासिटामॉल-325 एमजी
निर्माता- राजस्थान ड्रग फॉर्मसुटिकल लिमिटेड, जयपुर, राजस्थान।
क्या मिला- दवा पानी में निर्धारित समय में घुल नहीं रही।
2- विक्रम एंटी कोल्ड टेबलेट
निर्माता- विक्रम लेबोरेट्रिज प्रा. लि., मेरठ, मुजफ्फरनगर ।
क्या मिला- दवा स्ट्रिप से बाहर निकलते ही चूर हो रही है। इसकी वजह से उसकी लेबोरेट्री जांच नहीं हो सकी।
3- कोफुरा सनिप्रो-500 सिप्रोफ्लोक्सिन हाईड्रोक्लोराइड
निर्माता- सुन्न्विा ड्रग्स एंड फॉर्मूलेशन, रुडक़ी उत्तराखंड।
इसकी एक्सपायरी डेट- 4/2019 है।
क्या मिला- घुलनशील प्रक्रिया में समय से पहले ही फेल।
4- सिप्रोफ्लोक्सिन टेबलेट
निर्माता- सनलाइफ साइंस, रुडकी हरिद्वार।
एक्सपायरी डेट- 8/2018
क्या मिला- मिसब्रांडिंग, मिसलिडिंग पार्टिकुलर्स।
5- ओफ्लोक्सिन टेबलेट
निर्माता- सेनेट लेबोरेट्रिज, रुड़की उत्तराखंड
क्या मिला- एक स्ट्रिप की 10 दवाओं को तौलने पर लगभग सभी के भार में अंतर।
इन कंपनियों की दवाएं भी हुईं फेल
1– एसीपी फोर्ट टेबलेट, निर्माता- हेलेक्स हेल्थ केयर प्रा. लि. स्र्ड़की हरिद्वारा।
2- कोफुरा रिलीफ, निर्माता- जिजार्क हेल्थकेयर, रुड़की, उत्तराखंड।
3- रिक्सल, निर्माता- एसिंटा फॉर्मासुटिकल्स प्रा. लि. रुडक़ी, उत्तराखंड।
5- टोक्सेस, निर्माता- एब्बोट हेल्थकेयर प्रा. लि., हिमाचल प्रदेश।
कारवाई जरूरी
हालांकि इतने बड़े स्तर पर दवाइयों की गुणवत्ता में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई होना तय है. इन दवाइयों की बिक्री पर रोक भी लग सकती है.विदित हो कि छत्तीसगढ़ में आंखफोड़वा कांड हो चुके हैं, जिनमें कई लोगों की आंखें खराब हुईं थी। बिलासपुर नसबंदी कांड में 16 महिलाओं की जान गई थी। इनमें इस्तेमाल हुए दवाएं अमानक पाई गई थीं।
राज्य में 2 हजार करोड़ का कारोबार
प्रदेश में दवा का सालाना कारोबार 2 हजार करोड़ रुपए का है। रायपुर दवा बाजार मध्य-भारत में सबसे बड़ा है। यहां से ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश दवाएं सप्लाई होती हैं। सूत्र बताते हैं कि ड्रग टेस्टिंग लैबोरेट्री में जांच न होने का फायदा दवा निर्माता कंपनियां उठाती रहीं।

 

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