November 30, 2021
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देखी है कहीं ऐसी भक्ति,शरीर पर किल और सलाखे दाग देवी मां की स्तुती,साथ ही लोगो को नशापान से दूर रहने कर रहे जागरूक

हरित छत्तीसगढ़ जशपुर विवेक तिवारी।

पत्थलगांव- नवरात्र की आठवें दिन देवी माँ की उपासना बेहद ही सात्विक व उत्सवी माहौल मे किया गया। गुरुवार की दोपहर मांदर की थाप पर नंगे पैर मुंह में लोहे की सलाखें हाथो मे त्रिशुल घोंपकर पहुंचे दर्जनों महिला पुरूष बैगाओं ने बाजारपारा और सत्यनारायण दुर्गा मंदिर मे पारंपरीक अंदाज मे देवी माँ की स्तुति करी। बिखरे व खुले बाल हवा में लहराते अस्त्र कंठ में विद्युत जैसी चमकती माला धारण किए महिला पुरूष बैगाओं द्वारा माता के जसगीत गाते हुए शरीर मे किल और सलाखों से दागा जा रहा था उनके द्वारा किया जा रहा प्रर्दशन बेहद ही आक्रामक ,कांतिमय और अद्भुत दिखाई दे रहा था।
बैगाओं द्वारा मांदर की थाप पर झुपते हुए अस्त्र के साथ दिए गए प्रस्तुती से यहां का उत्साह और भी चरम पर पहुंचकर उपस्थित लोगों के भीतर भी रोमांच भर दीया। मक्कापुर कोदोसरमा देवी धाम से पहुंचे इन बैगाओं ने बाजारपारा पंडाल मे ही कांटो का सेज बिछाया उसपर सवार होकर जीभ मे लोहे की सलाखें घोपी और फिर झुपते झुपते माता देवी की स्तुति करनी शुरू कर दी। लोगो की माने तो झुपने के दौरान इनके उपर देवी का छाया आ जाता है जिस वजह से ये झुमते रहते है और अपने उपर किल और सलाखे से दागते है लेकिन इनको जरा भी तकलिफ नही होती है। विदीत हो कि नवरात्रि में देवी भक्ति के विविध रूप देखने मिल रहे हैं। कोई भक्त अपने शरीर पर जवारे बो कर माता को प्रसन्न करने में जुटा है तो किसी ने नंगे पैर नौ दिनों तक निराहार व्रत रखा हुआ है। वहीं पत्थलगांव क्षेत्र मे ग्रामीण स्तर पर मौजुद देवी धाम के बैगाओं द्वारा मुंह मे सलाखे,हाथ मे त्रिशुल व नंगे पैर घंटो तक झुपने की भक्ति को देखने लोग दूर दूर से पहुंचे थे। मक्कापुर पंचायत से पहुंचे बैगाओं ने बाजारपारा दुर्गा पंडाल मे प्रस्तुती देकर पैदल ही सड़कों से होते हुए सत्यनारायण मंदिर पहुंचकर माता की स्तुती करी। पैदल झुमते गाते निकले बैगाओं के आकर्षक रैला को देखने लोगों का हुजुम उमड़ पड़ा। इस दौरान भारी संख्या मे महिलाएं, बूढे, बच्चे श्रद्धालु भी शामिल रहे। बच्चों मे उत्साह और रोमांच देखा गया बच्चें प्रदर्शन कर रहे बैगाओं के साथ सेल्फी लेते नजर आए। सत्यनारायण मंदिर मे पूजा मे बैठे बाबा महाराज ने बताया कि देवी धाम के बैगाओं से जो भी सच्चे मन से मनोकमना मागंता है उसकी मन्नत पूरी होती है और ऐसा हुआ भी है जिस कारण इन बैगाओं की ख्याति चहुंओर फैलने लगी है। उन्होने बताया कि इस नवरात्र के समय बैगा मंदिर में पहुचकर झुमने लगते है और सैकड़ो नुकीले कील से सजी बैठकी में बैठ कर अपने शरीर में किल सलाखे तक चुभा देते है लेकिन मां की कृपा इन पर बनी रहती है जिस कारण इनको बिलकुल भी तकलिफ नही होती है। उन्होेने बताया कि इन बैगाओं द्वारा गांव मे नशाबंदी का भी अभियान चलाया जा रहा है उनके द्वारा लोगों को भक्ती भाव से जोड़कर नशा छोड़ने का सकंल्प दिलाया जा रहा है।विदित हो कि जशपुर जिले के पत्थलगांव के पंचायत मक्कापुर के सिकिरमा गांव से आये इन बैगाओं द्वारा आसपास के दर्जनों गावो में अस्थायी धाम स्थापित कर गांव वालों को माता की भक्ति से जोड़कर नशापान से दूर रहने का संकल्प दिलाया जाता है जिसकी वजह से इन बैगाओं की ख्याति दूर दूर तक फैली हुई है।

फोटो शरीर पर किल और सलाखे दाग देवी मां की स्तुती करते बैगा

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