September 24, 2021
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बेहतर प्रशासक की छवि वाले नितीश और मोदी एक बार फिर हुए साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जो कभी गठबंधन के साथी रहे. फिर राजनीतिक दुश्मन बने और अब दोबारा एक साथ नजर आयेंगे विदित हो की जब अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में नीतीश कुमार रेलमंत्री थे. उसके बाद मोदी के प्रधानमन्त्री उम्मीदवार बनने के बाद से ही दोनों में दुरी आने लगी  गुजरात  मुख्यमंत्री रहते तक मोदी के साथ नितीश की खूब निभती थी. प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा नोटबंदी का फैश्ला पर जहा पूरा विपक्षी कुनबा मोदी की आलोचना में डूबा हुवा था वही मोदी के नोटबंदी के फैसले को मिले नीतीश के समर्थन ने दोनों नेताओं के बीच निजी और राजनीतिक रिश्ते बदल दिए है और उसके बाद शराबबंदी हो या फिर राष्ट्रपति उम्मीदवार को समर्थन का सभी में दोनों नेताओ ने एक दुसरे की खुलकर सराहना करते हुए समर्थन दिया और उसी का नतीजा है की आज चार साल के बाद दोनों एकसाथ एक मंच पर नजर आ रहे है जिससे पूरे  बिहार का  राजनितिक माहौल गर्म गया है.  जहा 2013 में बीजेपी-जेडीयू अलगाव के बाद मोदी-नीतीश दोनों नेताओं के एक दूसरे को लगातार भला-बुरा कहा। लेकिन पिछले 6 महीने से स्थितियां बदली नजर आ रही है। विपक्ष के नोटबंदी के विरोधों के बीच नीतीश ने नोटबंदी का समर्थन कर दिया। इसके बाद से कयासों का दौर शुरू हो गया है कि नीतीश मोदी के प्रति नरम होने लगे है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी ने भी बिहार सरकार के शराबबंदी के फैसले को ले कर नीतीश की सार्वजनिक तारीफ कर नितीश के प्रति झुकाव जाहिर कर चुके थे.

गौरतलब हो की  1995 में जब बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व के बीच नरेंद्र मोदी उभर रहे थे उसी समय बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद नीतीश कुमार की समता पार्टी एनडीए का हिस्सा बनने जा रही थी। पीएम मोदी उस साल बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव बनकर दिल्ली पहुंचे। वहीं 1996 का लोकसभा चुनाव समता पार्टी ने बीजेपी के साथ मिलकर लड़ा। इसके बाद समता पार्टी जिसका विलय बाद जेडीयू में हो गया, उसका बीजेपी के साथ 17 सालों तक रिश्ता रहा जब तक नरेंद्र मोदी पार्टी की तरफ से पीएम उम्मीदवार घोषित नहीं हुए।

पिछले 20 सालों में शायद भारत की राजनीति में दो ही ऐसे राजनेता रहे जिनका ग्राफ लगातार ऊपर ही चढ़ता गया। नरेंद्र मोदी बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव, फिर महासचिव (1998), उसके बाद 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद आज भारत के प्रधानमंत्री है। वहीं बीजेपी से गठबंधन के बाद नीतीश कुमार भी बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में छा गए। अटल सरकार में नीतीश 1998 से 2004 तक केंद्रीय मंत्री रहे और उसके बाद 2005 से लगातार बिहार के मुख्यमंत्री है। खास बात यह है कि दोनों नेताओं की छवि बेहतर प्रशासक की है।

राजनीति में प्रचलित कहावत है कि कोई भी व्यक्ति स्थायी दुश्मन या दोस्त नहीं होता। 5 साल पहले आंतरिक सुरक्षा पर मुख्यमंत्रियों की बैठक में नीतीश दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों से गर्मजोशी से मिलते दिखे लेकिन मोदी के सामने से गुजरने के बाद भी उन्होनें हाथ नहीं बढ़ाया। पत्रकारों ने दोनों की फोटो एक साथ लेने के लिए आग्रह भी किया लेकिन न तो नीतीश हिले और ना ही मोदी रुके। लेकिन आज बदले हालात में आज नीतीश और मोदी की हाथ मिलाती तस्वीरें मीडिया में छाई हुई है।

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