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हरित छत्तीसगढ़

जीएसटी को लेकर सरकार ने लोगों को त्योहारों का बड़ा तोहफा दिया है, लेकिन कुछ शर्तें भी पूरी करनी होंगी। यानी एक और राहत मिलेगी तो दूसरी ओर परेशानी भी।
दरअसल, जीएसटी लागू होने से पहले के स्टॉक को नई कीमत वाले स्टिकर के साथ बेचने की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ा दी गई है। इसकी मियाद 30 सितंबर को खत्म हो रही थी, लेकिन अभी दुकानदारों के पास काफी मात्रा में पुराना माल बचा हुआ था। इसके मद्देनजर सरकार ने मोहलत देने का फैसला किया है। अब 31 दिसंबर, 2017 तक पुराना स्टॉक बेचने की छूट होगी। वित्त मंत्रालय की मंजूरी के बाद उपभोक्ता मामले मंत्रालय ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी।सरकार ने संशोधित मूल्य दरों वाले स्टिकरों के साथ माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पहले के सामान को बेचने की समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर कर दी है। उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार (29 सितंबर) को यह जानकारी दी। कई कंपनियों तथा व्यापारियों के प्रमुख संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने कहा था कि उनके पास जीएसटी से पहले का काफी भंडार पड़ा है और उन्हें इसे निकालने के लिए और समय की जरूरत है.
जीएसटी को एक जुलाई से लागू किया गया है. सरकार ने पैकेटबंद उत्पादों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के साथ संशोधित मूल्य छापकर इसे बेचने के लिए तीन महीने का (30 सितंबर तक का) समय दिया था। इस बिना बिके सामान पर एमआरपी होगा जिसमें जीएसटी पूर्व से दौर के सभी कर शामिल हों।जीएसटी क्रियान्वयन के बाद इनमें से काफी उत्पादों के अंतिम खुदरा मूल्य में बदलाव हुआ है क्योंकि जहां कुछ उत्पादों पर कर प्रभाव घटा है तो कुछ पर बढ़ा है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने ट्वीट किया, ‘‘पैकेटबंद जिंसों पर उद्योग जीएसटी की वजह से स्टिकर, स्टाम्पिंग, ऑनलाइन प्रिटिंग के जरिये संशोधित मूल्य दिखा सकता है। अब यह सीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर की जा रही है।
यदि सरकारी विभागों, स्थानीय प्राधिकरणों और सरकारी एजेंसियों को टीडीएस काटना आवश्यक है तो उन्हें जीएसटी के तहत 20 लाख रुपये की प्रारंभिक सीमा के बावजूद पंजीकरण करवाना होगा।

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