July 26, 2021
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गुजरात मे दलितों के मुछ रखने पर हो रहे कथित हमले:रवीश कुमार ने उठाये सवाल

 गुजरात मे दलितों के मुछ रखने पर लगातार हो रहे हमले कम होने का नाम नही ले रहे बीते शाम कुछ अज्ञात लोगों ने गुजरात के गांधीनगर गांव में एक दलित किशोर पर ब्लेड से हमला कर दिया। इसी गांव में इससे पहले दरबार जाति के सवर्णों ने दो युवकों की मूँछ रखने के लिए दो दलितों की पिटाई कर दी। पिछले एक हफ्ते में इस रह का ये तीसरा हमला है। हमले के बाद सानंद और उसके आसपास के करीब 300 दलितों ने अपने व्हाट्सऐप की डिस्प्ले पिक्चर पर मूँछ का लोगो लगाया है जिस पर “मिस्टर दलित” लिखा हुआ है और राजमुकुट का चिह्न बना हुआ है। दो दिन पहले ही आनंद के बोरसाड़ गांव में एक दलित को कथित तौर पर एक मंदिर में गरबा देखने से नाराज सवर्णों ने पीट-पीट कर मार डाला।मूँछ रखने की वजह से ब्लेड मारकर घायल कर दिया। बीते एक हफ्ते में कथित तौर पर मूँछ रखने को लेकर दलित युवकों की सवर्णों द्वारा पिटाई का यह तीसरा मामला है। इसी हफ्ते गुजरात मे ही एक दलित युवक को कथित तौर पर सवर्णों ने इसलिए पीट कर मार डाला क्योंकि वो एक मंदिर में हो रहा गरबा देख रहा था। इंडियन एक्सप्रेस द्वारा बुधवार को तीसरी घटना के प्रकाशित होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अपना क्षोभ जाहिर किया। एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने घटना पर कमेंट करते हुए दलितों के खिलाफ गुस्से के पीछे बढ़ती बेरोजगारी को एक वजह बतायी है। नीचे रवीश कुमार की पूरी पोस्ट दी जा रही जिसे आप पढ़ सकते हैं।
रवीश कुमार की फेसबुक पोस्ट- मूँछ रखने के कारण क्या किसी को पीटा जा सकता है? गरबा देखने के लिए क्या किसी को इतना मारा जा सकता है कि वह मर जाए? क्या इसके पीछे किसी जाति के प्रति घिन है? फिर वो कौन सी चीज़ है जिसके कारण बारात निकलने या गरबा देखने पर किसी दलित की हत्या कर दी जाती है? झगड़े और हत्या के कई कारण हो सकते हैं लेकिन क्या यह हमारे समाज की क्रूरतम सच्चाई आज भी मौजूद नहीं है? अगर हम समाज के भीतर बैठे इस घिन के बारे में सोच लेंगे तो क्या बहुत बुरा हो जाएगा? समाज में काफी हद तक अश्पृश्यता तो समाप्त हुई है लेकिन उसके बचे रहने का प्रतिशत भी कम नहीं है। अश्पृश्यता का यह नया रूप है घिन। ये घिन ही है जो किसी को किसी की निगाह में कमतर बनाती है और उसके प्रति समाज का व्यवहार बदल देती है।

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