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रामनवमी के दिन बन रहे हैं ये शुभ संयोग,कर लें ये काम, कभी नहीं आयेगी कोई बाधाएं,
भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव “रामनवमी” पर्व के दिन यानी की चैत्र मास की नवमी तिथि जो इस वर्ष 12 व 13 अप्रेल  को मनाई जायेगी । धर्म के जानकारों का कहना हैं की इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते है, वे कभी निष्फल नहीं जाते है, उनका शुभ फल स्थाई रूप से आजीवन मिलता रहता हैं । जाने रामनवमी के दिन कौन कौन से शुभ कार्यों को करना चाहिए ।12 अप्रैल 2019 दिन शुक्रवार को सुबह 10:18 बजे से 13 अप्रैल दिन शनिवार को सुबह दिन में 08:16 बजे तक अष्टमी तिथि होगी उसके बाद नवमी तिथि लग जाएगी। 13 अप्रैल दिन शनिवार को महानवमी का व्रत होगा क्योंकि 13 अप्रैल को सुबह 08:16 बजे के बाद ही नवमी तिथि लग जाएगी जो 14 अप्रैल की सुबह 6 बजे तक ही विद्यमान रहेगी।नवरात्रि के व्रत के बाद नवमी के दिन उत्तर भारत के कई राज्यों में कन्या पूजन किया जाता है। इस बार नवरात्रि में के नवें दिन रामनवमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन रविवार 14 अप्रैल को नवमी वैष्णव मतानुसार महानवमी रवीपुष्य नक्षत्र और सर्वार्थसिद्धि योग सुबह 9 बजकर 37 मिनट तक होगा। ज्योतिषी धीरेंद्र तिवारी के अनुसार श्रीराम के अवतरित होने की प्रचलित मान्यता चैत्र मास, शुक्ल पक्ष, नवमी तिथि, मध्याह्न काल और पुनर्वसु नक्षत्र है।

अगर आप भी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं तो यह राम नवमी आपके लिए खुशियों का संदेश लाई है। इस राम नवमी को अगर सामान्य विधि-विधान से लेकिन संपूर्ण मन और चित्त से पूजन और उपाय किए जाए तो निश्चित रूप से अपार धन संपदा की प्राप्ति होती है।
* रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम की पूजा-अर्चना करें।

* नया घर, दुकान अथवा प्रतिष्ठान में पूजा-अर्चना कर प्रवेश किया जा सकता है।

* नवरात्रि के नौवें दिन यानी रामनवमी के दिन मां दुर्गा के नवमें स्वरूप सिद्धिदात्री की उपासना करें एवं अपनी शक्तिनुसार मां दुर्गा के नाम से दीप प्रज्ज्वलित करें।
* गरीब-असहाय लोगों को अपने सामर्थ्य अनुसार दान-पुण्य करें।
* राम का जन्मोत्सव इसी तरह मनाएं जैसे घर में कोई नन्हा शिशु जन्मा हो।

* नवमी के दिन कुंआरी कन्याओं को भोजन कराएं।

* कन्याओं को उपहारस्वरूप चीजें भेंट करें।
* किसी प्रकार के शुभ कार्य करने की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण दिवस है।
* श्रीराम नवमी के दिन रामरक्षास्त्रोत, राम मंत्र, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदर कांड आदि के पाठ से ना सिर्फ अक्षय पुण्य मिलता है बल्कि धन संपदा के निरंतर बढ़ने के योग जाग्रत होते हैं।
* किसी भी नए कार्य की शुरुआत, नया व्यवसाय आरंभ कर सकते हैं।

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