September 24, 2021
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सामाजिक गतिविधी के जीवित रखने कर्मा का आयोजन, घुंघरुओं की झनकार, ढोलक की थाप पर सामूहिक नृत्य

हरित छत्तीसगढ़ विवेक तिवारी पत्थलगांव। सामाजिक गतिविधी के जीवित रखने कर्मा पर्व का आयोजन किया जाता है। पूर्वजों के समय से ही इसे मुख्य त्यौहार के रुप में मनाते आ रहे हैं। इसे आदिवासी एकजुटता का प्रतीक के रुप में मनाया जाता है। ये सभी बातें पत्थलगांव शांतिनगर स्थित चर्च में कर्मा नृत्य के दौरान जोसेफ बड़ा ने बताई।  जोसेफ बड़ा ने करमा के बारे जानकारी देते हुए कहा कि करमा महोत्सव में करमा डगाल काटकर पुजा स्थल में रखकर इसकी पुजा अर्चना की जाती है और सुबह इस करम डगाल के चारों ओर नृत्य किया जाता है और सुबह नाच गाने के साथ सम्मान के साथ दोपहर तक इस करम डाल का विसर्जन किया जाता है और प्रसाद का भी वितरण किया जाता है। हबिल तिर्की ने बताया कि करम डगाल का पुजा करने का मतलब है कि हमारे आदिवासी समाज का मुख्य उद्देष जंगल की रक्षा करना है और पहाड़ पर्वत व जंगल ही हमारे आदिवासी का आस्था का प्रतीक है जिसकी रक्षा करना और जंगल को हरा भरा रखना ही हमारा मुख्य उद्देष्य है। करमा राजा करम को खोजता है और धरम का अर्थ है कि हम सभी को भाई स्वरुप देखें और सभी इंसानों के साथ-साथ जानवरों को भी सम्मान देना सीखें। हमारे करमा महोत्सव का आयोजन रखने का उद्देष्य प्रमुख रुप से यह है कि करमा हमारे सामज की पहचान है और हमारी संस्कृति की रक्षा करने के लिये इस कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। फ्रांसिस तिर्की के द्वारा चर्च के दौरान इस उत्सव के माध्यम से पूर्वजों की कहानी को विस्तृत जानकारी समाज के लोगों को प्रदान की गई। आज के परिवेष में यह कहानी समाज को संगठित करने एवं अपनी परंपरा को जीवित रखते हुये यह कार्यक्रम को अयोजित करने की बात कही। सुषील कुजुर ने बताया कि घुंघरुओं की झनकार, ढोलक की थाप और सामूहिक रूप से एक ही स्वर में नृत्य गायन यह वह कर्मा नृत्य है, जो पूरे आदिवासी का यह लोक मांगलिक नृत्य है। यह नृत्य जनजाति की खुशी का इजहार करने का तरीका है। कर्मा नृत्य संपूर्ण आदिवासी समाज का प्रचलित लोक नृत्य है। फ्रांसिस तिर्की ने बताया कि कर्मा ही हमारा जीवन है। हमारी रग-रग में कर्मा नृत्य घुला है। हमारी जनजाति हर छोटी से बड़ी खुशी इसी नृत्य के द्वारा जाहिर करती है। हम लोग हर शुभ कार्य करने से पहले यह नृत्य करते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान सभी कर्मा नृतक अपने पारंपरिक परिधान वेषभुषा व वाद्ययंत्र धारण कर नृत्य किया और इस करमा उत्सव में अधिक से अधिक लोग शामिल हुए। इस कार्यक्रम में कर्मा अयोजक जोसेफ बड़ा, हबिल तिर्की, फादर महंत, फादर पंखरास्युस, सुषील कुजुर, फ्रांसिस तिर्की के साथ युवाओं में अनुप लकड़ा, अनुप मिंज, उमेष खलखो, संजम तिर्की, सुनील बड़ा, समीर कुजुर, विक्की एक्का, विनीत तिर्की, ललित मिंज, राजू तिग्गा, सुबोध मिंज एवं समाज के सभी अन्य लोग भी शामिल रहे।

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