July 26, 2021
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पटाखे पर बैन के बाद त्रिपुरा गवर्नर ने कहा जल्द ही हिंदुओं के चिता जलाने पर भी लग सकती है रोक

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का हवाला देते हुए दीपावली के मौके पर पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने से एक तरफ जहां पटाखा कारोबारियों में हलचल मची है, वहीं इस मुद्दे पर राजनीति भी खूब हो रही है. खासकर सोशल मीडिया पर तो इस आदेश के पक्ष और विपक्ष में खेमे तैयार हो गए हैं. संवैधानिक पद पर बैठे लोग भी लड़ाई में कूद पड़े हैं.पटाखों की बिक्री पर बैन के बाद त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत रॉय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। तथागत रॉय ने कहा है कि हो सकता है प्रदूषण का हवाला देकर कल को हिन्दुओं के चिता जलाने पर भी रोक लगा दी जाए। गवर्नर तथागत रॉय ने ट्वीट किया, ‘कभी दही हांडी,आज पटाखा ,कल को हो सकता है प्रदूषण का हवाला देकर मोमबत्ती और अवार्ड वापसी गैंग हिंदुओं की चिता जलाने पर भी याचिका डाल दे।’ तथागत रॉय राजनीतिक सामाजिक मुद्दों पर अपनी मुखर राय के लिए जाने जाते हैं। बता दें कि 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का हवाला देकर दिवाली से पहले पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इंडिया टुडे से बात करते हुए तथागत रॉय ने कहा कि एक हिन्दू होने के नाते उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निराशा हुई है। क्योंकि अदालत ने हिन्दू समाज से दिवाली उत्सव का एक अहम हिस्सा छीन लिया है।त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय ने आगे बढ़ते हुए कड़े शब्दों में एक ट्वीट किया है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हिंदुओं की भावनाओं पर ठेस लगी है. राज्यपाल ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘कभी दही हांडी,आज पटाखा ,कल को हो सकता है प्रदूषण का हवाला देकर मोमबत्ती और अवार्ड वापसी गैंग हिंदुओ की चिता जलाने पर भी याचिका डाल दे !’उनके ट्वीट पर सैकड़ों लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं. कुछ ने राज्यपाल का समर्थन करते हुए लिखा है, ‘ हिन्दू बहुसंख्यक होने के कारण, योग अथवा प्राणायाम करके हिन्दू अधिक CO2 छोड़के प्रदुषण बढ़ाते है. Court: हिन्दू एक मिनट में एक ही सांस लें.’चेतन भगत ने ट्वीट कर कहा कि आखिर हिन्दुओं के त्योहारों के साथ ही ऐसा क्यों होता है। चेतन भगत ने कहा कि पर्यावरण को बचाने के कई और भी तरीके हैं, जैसे बिजली का कम उपयोग, एससी को बंद करना, इनपर भी अदालतों और स्वयंसेवी संगठनों का ध्यान जाना चाहिए।भगत ने कहा कि केवल हिंदुओं के त्योहार पर बैन लगाने की हिम्मत क्यों दिखाई जाती है? क्या जल्द ही बकरियों की बलि और मुहर्रम के खूनखराबे पर भी रोक लगेगी? जो लोग दिवाली जैसे त्योहारों में सुधार लाना चाहते हैं, मैं उनमें यही शिद्दत खून-खराबे से भरे त्योहारों को सुधारने के लिए भी देखना चाहता हूं।’

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