November 29, 2021
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खुशबूदार बासमती चावल की खेती पर छत्तीसगढ़ में भी लगी रोक

रायपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने (आईसीएआर) छत्तीसगढ़ में खुशबूदार धान बासमती की खेती पर रोक लगा दी है।दुनिया में अपनी खुशबू और स्वाद के लिए पहचाने जाने वाले भारतीय बासमती चावल को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। खराब क्वालिटी के कारण विदेशों से सप्लाई लौटने पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने 22 राज्यों में बासमती की खेती पर पाबंदी लगा दी है। अब सिर्फ उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर में ही बासमती धान की खेती होगी। हालांकि इस रोक का राज्य के किसानों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि यहां बासमती की खेती बहुत कम होती है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार वैसे भी छत्तीसगढ़ में बासमती को खुशबू में टक्कर देने वाली धान की कई किस्मों की पैदावार होती है। इनमें जवाफूल, विष्णुभोग के साथ ही मलाई केसर जैसी धान है, जिनकी देश ही नहीं विदेशों में भी भारी डिमांड हैं।कुछ वर्षों में लगातार रासायनिक खाद के उपयोग से बासमती की क्वालिटी पर खासा प्रभाव पड़ा। बीज भी दोयम दर्जे का डाला गया। इसी के साथ खुशबू और स्वाद में भी कमी आई। सप्लाई लेने वाले देशों ने जब बासमती की जांच कराई तो उसे अपने मानकों पर जहरीला माना। मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ में बासमती का व्यवसायिक उत्पादन नहीं होता है। कहीं- कहीं, आधा- एक एकड़ में कोई किसान बासमती बोता था।
इन राज्यों में खेती पर रोक भारतीय कृषि
अनुसंधान परिषद ने आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, बिहार, ओडिशा, केरल, कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु, त्रिपुरा, नगालैंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, राजस्थान, मेघालय, गोवा, छत्तीसगढ़, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम, तेलंगाना पर रोक लगाई है। इन सभी राज्यों में पहले बासमती की खेती होती थी

बासमती लंबा एवं सुगंधित चावल है जो भारतीय उप महाद्वीप के हिमालय की पहाड़ियों के विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्रों में कई सदियों से उगाया जा रहा है। बासमती धान का चावल लंबा और पतला होता है। इसकी विशेषता यह है कि पकाने पर यह अपने मूल आकार से दोगुना हो जाता है। यह मुलायम और सुगंधित होता है।
भारत सरकार के बीज अधिनियम तहत वर्ष 1966 से अभी तक बासमती चावल की 29 किस्में खेती के लिए अधिसूचित की गई हैं। जिनका देश के 7 राज्यों के लगभग 81 जिलों में खेती की जाती है। बासमती चावल की प्रमुख किस्में में बासमती 217, बासमती 370, टाइप 3 (देहरादूनी बासमती) पंजाब बासमती 1 (बउनी बासमती), पूसा बासमती 1, कस्तूरी, हरियाणा बासमती 1, माही सुगंधा, तरोरी बासमती (एच.बी.सी 19/ करनाल लोकल), रणबीर बासमती, बासमती 386, इम्प्रूव्ड पूसा बासमती 1 (पूसा 1460), पूसा बासमती 1121 (संशोधन के पश्चात्), वल्लभ बासमती 22, पूसा बासमती 6 (पूसा 1401), पंजाब बासमती 2, बासमती सी.एस.आर 30 (संशोधन के पश्चात्), मालविया बासमती धान 10-9 (आई.ई.टी 21669), वल्लभ बासमती 21 (आई.ई.टी 19493), पूसा बासमती 1509 (आई.ई.टी 21960), बासमती 564, वल्लभ बासमती 23, वल्लभ बासमती 24, पूसा बासमती 1609, पंत बासमती 1 (आई.ई.टी 21665), पंत बासमती 2(आई.ई.टी 21953), पंजाब बासमती 3, पूसा बासमती 1637 और पूसा बासमती 1728 जिनकी खेती की जाती है।

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