September 25, 2021
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अस्पताल से डॉक्टर नदारद मरीजो का कौंन करे उपचार, बेबस मरीज लाचार प्रबन्धन

हरित छत्तीसगढ़ संजय तिवारी

पत्थलगांव अस्पताल में देर से आना डॉक्टर्स की आदत में शुमार हो गया है। यहां भले मरीज घंटों इनका इंतजार किया करें, लेकिन यहां के डॉक्टरों का समय इनके हिसाब से ही चलता है। अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के ढर्रे को सुधारने के लिए जिम्मेदार कितनी भी कोशिश कर लें, लेकिन व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण पत्थलगांव अस्पताल की डाक्टरो रूमें कई बार सूनी पड़ी रहती है। मरीज डॉक्टरों के इंतजार में बैठे रहते हैं। ब्लाक के सबसे बड़े अस्पताल में शहर सहित दूर-दराज से मरीज अपना उपचार कराने के लिए आते हैं। शनिवार को कई ऐसे मरीज जो सुबह 8 बजे से पहुंच गए, लेकिन 12 बजे तक कई डॉक्टर अपने कैबिन में नहीं पहुंचे थे। डॉक्टर्स के नहीं आने के कारण मरीजों को खासी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सुबह से कर रहे डॉक्टर का इंतजार

शहर निवासी राजू तिवारी ने बताया कि उन्हें बुखार ने जकड़ लिया है। इसके लिए वे संबंधित डॉक्टर का इंतजार कर रहे हंै। उन्होंने बताया कि 9 बजे यहां आ गए थे। इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्र के फुलेता से आए जहर साय ने बताया कि उन्हें लकवा की समस्या है, उनका इलाज डॉ. पी सुथार के पास चल रहा है। वह सुबह 8 बजे से आकर अस्पताल के बाहर बैठे हैं।और डॉक्टर का पता नहीं है इस तरह से कई ऐसे मरीज यहां संबंधित डॉक्टरों का इंतजार करते देखे गए।

निजी प्रेक्टिक्स पर दे रहे ज्यादा ध्यान

सरकारी अस्पताल के ज्यादातर चिकित्सक पत्थलगांव अस्पताल में इलाज न करते हुए निजी प्रैक्टिस पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। ज्यादातर डॉक्टर्स ने अपने निवास स्थानों पर अपने क्लीनिक खोल रखे हैं। वहां तगड़ी फीस वसूलकर इलाज करते हैं। ऐसे में नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा लोगों तक कैसे पहुंचेगी, ये बड़ा सवाल है। सरकार भले ही लोगों को सुविधाएं देने के लिए तमाम कोशिशें कर ले, लेकिन निचने स्तर पर हालात बहुत खराब है।

अस्पताल खुलने का समय तय, नहीं रहते डॉक्टर

सरकारी अस्पताल में शासन द्वारा डॉक्टरों की उपस्थित के लिए समय तय किया गया है। इस समय में मरीज रहें या नहीं, डॉक्टर्स को उपस्थित होना जरुरी है।  अस्पताल के बिगड़े हुए इस ढर्रे में सुधार के लिए अस्पताल प्रशासन ने निर्देशित किया है कि यहां डॉक्टर सुबह 8 बजे अपने केबिन में पहुंच जाएं पर अस्पताल में नियमो की धज्जियां उड़ाई जा रही है इधर ओपीडी में मरीज बैठे-बैठे इंतजार ही करते रहते हैं।

बाहर से आने वाले मरीज परेशान

सरकारी अस्पताल की ओपीडी में शनिवार की सुबह 10 बजे तक कई डॉक्टरों के कैबिन खाली पड़े हुए थे। इस दौरान मरीज बाहर बैठकर इंतजार करते रहे। अस्पताल के बाहर चस्पा समय-सारणी में डॉक्टरों का ओपीडी में बैठने व राऊंड के साथ ही रात्रिकालीन ड्यूटी का उल्लेख है। बाहर से आने वाले मरीजों को इसकी जानकारी नहीं होने से वे घंटो तक इंतजार ही करते रहते हैं।

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