November 29, 2021
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आज दीवाली 3 शुभ मुहूर्त, 1 घंटे की पूजा देगी सबसे ज्यादा लाभ,जाने शुभ मुहूर्त और विधि

आज दीवाली 3 शुभ मुहूर्त, 1 घंटे की पूजा देगी सबसे ज्यादा लाभ,जाने शुभ मुहूर्त और विधि
दीवाली शाम में 5.38 बजे से 8.14 बजे तक प्रदोष काल रहेगा। इस बीच शाम 7.05 बजे से रात 9 बजे तक वृष लग्न में पूजा करना विशेष शुभप्रद माना जा रहा है। इसके साथ ही निशीथ काल और महानिशीथ काल में भी पूजा का शुभ समय है।दीपावली पूजन शुभ मुहूर्त, इस समय पूजन से मिलेगा लाभ इस साल दिवाली 19 अक्टूबर यानि गुरुवार को मनाई जाएगी। स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक अमावस्या के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर सभी देवताओं की पूजा इस विधि से करनी चाहिए।

लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: शाम 07:11 से लेकर रात को 08:16 तक
महानिशा काल पूजा मुहूर्त: रात्रि 11:40 से लेकर रात को 12:31 तक
दिवाली पूजा विधि
दिवाली के दिन शाम के समय घर के पूजा घर में लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्तियों को रखें। फिर पूजा चौकी पर स्वस्तिक बनाकर और चावल रखकर स्थापित करना चाहिए। मूर्तियों के सामने एक जल से भरा हुआ कलश रखें। इसके बाद मूर्तियों के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर शुद्धि मंत्र का उच्चारण करते हुए उसे मूर्ति पर, परिवार के सदस्यों पर और घर में छिड़कना चाहिए।
इस वर्ष विक्रम संवत् 2074 में कार्तिक कृष्ण अमावस्या बृहस्पतिवार 19 अक्टूबर सन् 2017 को सूर्योदय के पूर्व ही आरंभ होकर रात्रि 12 बजकर 42 मिनट तक विद्यमान रहेगी। हस्त उपरांत चित्रा नक्षत्र संपूर्ण दिन व रात पर्यन्त भोग करेगा। बृहस्पतिवार में हस्त नक्षत्र से बना शुभ योग और चित्रा नक्षत्र से बना चर योग कार्यसिद्धि दायक है जो वैधृति के दोष को र्निमूल कर देता है। चित्रा नक्षत्र मृदु-मित्र संज्ञक है, अतः दीपावली पर्व 19 अक्टूबर बृहस्पतिवार को ही र्निविवाद रूप से सारे देश में मनाया जाएगा।

इस दिन प्रातः 8 बजकर 40 मिनट तक तुला उपरांत 10 बजकर 59 मिनट तक वृश्चिक लग्न रहेगा। तुला में उच्च राशि का सूर्य बुध व बृहस्पति सहित विराजमान है। चित्रा नक्षत्र मृदु व चर संज्ञक है। इसमें सभी विवाह आदि मंगल कार्य सफल होते हैं। इन लग्नों (तुला, वृश्चिक) में ऑटोमोबाइल, वर्कशाप एवं तांबा, पीतल, कांसा एवं स्टील का व्यवसाय करने वाले व्यक्ति महालक्ष्मी पूजन करें तो विशेष प्रशस्त रहेगा। पूर्वाह्न 11 बजे से 1 बजकर 03 मिनट तक धनु लग्न रहेगी। धनु लग्न का स्वामी बृहस्पति एकादश लाभ भाव में विराजमान है, इच्छित कामनाओं की पूर्ति का संकेत है। कुछ व्यापारी दीपावली पूजन के लिए धनु लग्न को श्रेष्ठ मानते हैं, इसमें कल-कारखानों, ट्रांसपोर्टरों डॉक्टरों एवं होटल का व्यवसाय करने वालों के लिए लक्ष्मी पूजन का विशेष मुहूर्त है।

अपराह्न 1 बजकर 4 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक मकर लग्न अभिजित मुहूर्त रहेगा, लग्नेश शनि द्वारा दृष्ट लग्न अत्यन्त बलवती समझी जाती है। इसमें अमृत का चौघडि़या मुहूर्त भी उत्तम है। अमृत का चौघडि़या वकीलों चार्टड एकाउंटेंटों, प्रॉपर्टी डीलरों को अकूत लक्ष्मी देने वाला है। 02 बजकर 46 मिनट से 04 बजकर 13 मिनट तक कुंभ और 05 बजकर 38 मिनट तक मीन लग्न रहेगी जो शुक्र मंगल द्वारा दृष्ट होने के कारण अनेक दोषों को निवारण करने की क्षमता रखती है, क्योंकि मीन लग्न शुक्र की उच्च राशि है इस लग्न में दीपावली महालक्ष्मी पूजन करने वाले यजमान व कराने वाले द्विजाचार्य भी मालामाल होंगे। मीन लग्न में विशेषकर तेजी मंदी का व्यापार करने वालों, फाइनेन्सरों और बैंकों को पूजा करनी चाहिए। सायंकाल 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 13 मिनट तक मेष लग्न रहेगी, जो अमृत का चौघडि़या की उपलब्धि मनोकामना पूर्ति कराने में सहायक बनेगी।

प्रदोषकाल जिसका दीपावली-महालक्ष्मी पूजन में सर्वाधिक महत्व है। सायंकाल 5 बजकर 47 मिनट से रात्रि 8 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। प्रदोषकाल में ही मेष, वृष लग्न और शुभ अमृत का चौघडि़या भी विद्यमान रहेंगे, प्रदोषकाल का अर्थ है दिन रात्रि का संयोग। दिन विष्णुरूप और रात्रि लक्ष्मी रूपा है, प्रदोष काल के स्वामी (अधिपति) अवढ़र दानी आशुतोष भगवान सदाशिव स्वयं हैं। इसमें चित्रा नक्षत्र से बना चर योग व्यापारियों व गृहस्थियों के लिए दीपावली महालक्ष्मी, कुबेर, दवात-कलम, तराजू, बाट, तिजोरी इत्यादि पूजन के लिए अक्षय श्रीप्रद एवं कल्याणकारी सिद्ध होगी। कदाचित् यदि इस लग्न में पूजनादि कृत्य की सुविधा प्राप्त न हो सके तो भी अभिष्ट पूजनार्थ पूजा स्थल में दीपक जलाकर प्रतिज्ञा संकल्प अवश्य कर लेना चाहिए। पुनः अपनी आस्था व सुविधानुसार अग्रदर्शित लग्न किसी शुभ चौघडि़या, महानिशीथकाल और सिंह लग्न में महालक्ष्मी पूजन करना चाहिए।
रात्रि 9 बजकर 08 मिनट से 11 बजकर 23 मिनट तक मिथुन, कर्क लग्न जिन पर बृहस्पति की सम्पूर्ण दृष्टि रहेगी, महानिशीथकाल जिस पर धन की देवी लक्ष्मी की संपूर्ण दृष्टि भी पड़ रही है, इस अवधि में महालक्ष्मी पूजन, काली की उपासना विशेष प्रयोग व तंत्र अनुष्ठान आदि किए जाएं तो विशेष रूप से प्रशस्त एवं श्लाघ्य रहेंगे। उत्तर रात्रि लग्न सिंह 1 बजकर 37 मिनट से 03 बजकर 59 मिनट तक रहेगी। यह भी व्यापार में अत्यन्त लाभ और लक्ष्मी की स्थिर प्रीति कराने वाली है।

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