September 17, 2021
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आज गोवर्धन पूजा जाने शुभ मुहर्त और पूजन विधी

गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्लपक्ष की प्रतिपदा को मनाई जाती है। इस साल गोवर्धन पूजा 20 अक्टूबर यानि। दिवाली के अगले दिन है। गोवर्धन पूजा को अन्नकूट पर्व के नाम से भी जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने इंद्र की पूजा करने के बजाय गोवर्धन की पूजा की थी।

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन उत्सव मनाया जाता है. गोवर्धन को ‘अन्नकूट पूजा’ भी कहा जाता है. सामान्य भाषा में कहा जाए तो दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा की जाती है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा की बजाय गोवर्धन की पूजा शुरू करवाई थी. इस दिन गोबर घर के आंगन में गोवर्धन पर्वत की चित्र बनाकर पूजन किया जाता है. इस दिन गायों की सेवा का विशेष महत्व है. गोवर्धन पूजा का श्रेष्ठ समय प्रदोष काल में माना गया है.इस दिन एक अन्य मान्यता है कि जो व्यक्ति उदास रहता है वह पूरे साल भर दुखी रहता है। साथ ही इस दिन व्यक्ति पूरे मनोभाव से गोवर्धन भगवान की पूजा करता है वह साल भर सुखी और खुशी रहता है।

गोवर्धन पूजा 2017 शुभ मुहूर्त
सुबह का मुहूर्त- सुबह 06:28 बजे से 08:43 बजे तक

शाम का मुहूर्त – 03:27 बजे से सायं 05:42 बजे तक

प्रतिपदा – रात 00:41 बजे से शुरू (20 अक्टूबर 2017)

प्रतिपदा तिथि समाप्त – रात्रि 1:37 बजे तक (21 अक्तूबर 2017)

पूजन विधि
इस दिन घर के आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत्त का चित्र बनाएं। फिर उस पर अक्षत, रोली, चंदन, फूल, दूर्वा, जल, बताशा, फल, दूध आदि चढाएं। फिर तिल या घी के दीपक जलाएं। इसके बाद गायों को स्नान करने के बाद उसे आरती दिखाकर मिठाई खिलाएं। अन्नकूट शब्द का अर्थ
अन्नकूट शब्द का अर्थ होता है अन्न का समूह. विभिन्न प्रकार के अन्न को समर्पित और वितरित करने के कारण ही इस पर्व का नाम अन्नकूट पड़ा है. इस दिन बहुत प्रकार के पक्वान, मिठाई आदि का भगवान को भोग लगाया जाता है.छोटी मगर काम की बातें
– ऐसा माना जाता है कि अगर गोवर्धन पूजा के दिन कोई दुखी है तो वह साल भर दुखी रहता है.
– इस दिन जो शुद्ध भाव से भगवान के चरणों में सादर समर्पित, संतुष्ट, प्रसन्न रहता है वह पूरे साल भर सुखी और समृद्ध रहता है.
– ऐसा माना जाता है कि भगवान वामन द्वारा दिए गए वरदान के कारण असुर राजा बालि इस दिन पाताललोक से पृथ्वी लोक आते हैं.
– जरात, महाराष्ट्र राज्यों में इसी दिन से नव वर्ष की शुरूआत होती है.
– ये पर्व वज्र भूमि में ज्यादा लोकप्रिय है.

 

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