July 25, 2021
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अब तो सरकार ने भी माना, GST की टैक्स दरों में पूरी तरह से बदलाव की जरूरत

अब तो सरकार ने भी माना, GST की टैक्स दरों में पूरी तरह से बदलाव की जरूरत
देश के बड़े आर्थिक सुधार जीएसटी के अब पूरी तरह से लागू हो जाने के बाद अब टैक्स रेट्स में बदलाव की जरूरत है। राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि टैक्स रेट्स में बदलाव कर ही छोटे और मझोले कारोबारों से टैक्स का बोझ कम किया जा सकता है। अधिया ने कहा कि एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स और वैट जैसे दर्जनों भर केंद्रीय और राजकीय करों को खत्म करने वाले जीएसटी को स्थिर होने में एक साल का वक्त लग सकता है। अढिया ने एक इंटरव्यू में कहा कि जीएसटी जिसमें एक दर्जन से अधिक केंद्र और राज्य कर शामिल हैं, जिन्हें स्थिर होने में करीब एक साल लगेगा। लागू होने के करीब चार महीने में नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में समस्याएं और अनुपालन से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं। इस संबंध में नई प्रणाली से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था जीएसटी काउंसिल ने कई बदलाव किए हैं।जीएसटी रिटर्न फाइल करने और करों का भुगतान करने में छोटे और मझोले व्यवसायियों की परेशानियों को हल करने और नई कर प्रणाली को इंडस्ट्री फ्रेंडली बनाने के लिए विभिन्न पक्षों में सुधार किया जा रहा है। जीएसटी काउंसिल ने 100 से अधिक वस्तुओं पर कर दरों को युक्तिसंगत बनाया है और निर्यातकों को रिफंड की प्रक्रिया को आसान बनाया जा रहा है।अधिया ने कहा, ‘जीएसटी में टैक्स रेट्स में बड़े सुधार की जरूरत है। ऐसा भी संभव है कि एक चैप्टर में दिए गए गुड्स अलग-अलग टैक्स रेट में आ गए हों। हमें चैप्टर के हिसाब से वस्तुओं पर नजर डालनी चाहिए और यह देखा जाना चाहिए कि छोटे और मझोले कारोबारियों पर बोझ ज्यादा न हो। अगर ऐसा पाया जाता है कि इन पर और आम आदमी पर टैक्स का बोझ है तो उसे कम किया जाना चाहिए। इससे जीएसटी की स्वीकार्यता बढ़ेगी।’जीएसटी काउंसिल की 23वीं मीटिंग वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में 10 नवंबर को गुवाहाटी में होनी है। अधिया ने कहा कि हम जितनी जल्दी हो सके इसे करने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि फिटमेंट कमिटी इस पर काम करने के लिए कितना समय लेती है।राजस्व सचिव ने कहा, ‘इसमें पूरी तरह से बदलाव की जरूरत है… यह संभव है समान चैप्टर से कुछ वस्तुओं को विभाजित किया जाए। यहां वस्तुओं के चैप्टरवाइज समानीकरण करने की आवश्यकता है। इसमें जहां यह लगे कि छोटे और मझोले व्यवसायियों और आम आदमी पर कर के बोझ को कम किया जा सकता है, हमें कमी लानी होगी। इससे जीएसटी का सही ढंग से अनुपालन संभव होगा।’

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