July 24, 2021
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बाबुओं को बचाने वाला बिल राजस्थान में पेश, बीजेपी के दो विधायकों ने भी किया विरोध,सड़क पर उतरी कांग्रेस, हिरासत में कई नेता

राजस्थान में पूर्व व मौजूदा जजों और सरकारी बाबुओं को ‘बचाने’ वाला वसुंधरा सरकार का विवादास्पद अध्यादेश विधानसभा में पेश किया गया. इस विवादस्पद विधेयक के पेश होते ही सदन में हंगामा शुरू हो गया, जहां कांग्रेस नेताओं के साथ बीजेपी के भी दो नेताओं घनश्याम तिवारी और एन रिजवी ने इस बिल का विरोध किया. इस दौरान सदन में भारी हंगामे के चलते विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई.राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने आज ( सोमवार, 23 अक्टूबर) विधानसभा में उस विवादित बिल को पेश कर दिया है जिसके तहत जजों, मजिस्ट्रेटों और अन्य सरकारी अधिकारियों, सेवकों को सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा और सरकार की मंजूरी के बिना इनके खिलाफ न तो कोई जांच होगी न ही मीडिया में उनके खिलाफ कुछ छापा जा सकेगा। यह अपराध दंड संहिता (राजस्थान संशोधन) बिल हाल ही में लाए गए अध्यादेश का स्थान लेगी। बिल पेश होते ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इसका पुरजोर विरोध किया, सदन में हंगामा किया और विधान सभा से वॉक आउट किया। इसके बाद हंगामा बढ़ता देख स्पीकर ने सदन की कार्यवाही कल तक के लिए स्थगित कर दी।

‘अपराध का लाइसेंस देगा नया कानून’

इस बीच ‘दंड विधियां (राजस्थान संशोधन) अध्यादेश, 2017’ के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका दाखिल की गई है.

याचिका में इस अध्यादेश को ‘मनमाना और दुर्भावनापूर्ण’ बताते हुए इसे ‘समानता के साथ-साथ निष्पक्ष जांच के अधिकार’ के खिलाफ बताया गया है.

इसमें कहा गया है कि इससे ‘एक बड़े तबके को अपराध का लाइसेंस दे दिया गया है.

‘सरकारी बाबुओं के काले कारनामे छिपाने की कोशिश’

वहीं एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी इस विवादित कानून का विरोध किया है. एडिटर्स गिल्ड ने इसे ‘पत्रकारों को परेशान करने, सरकारी अधिकारियों के काले कारनामे छिपाने और भारतीय संविधान की तरफ से सुनिश्चित प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने वाला एक घातक कानून’ बताया है.इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने काली पट्टी बांधकर प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुवाई में अध्यादेश के खिलाफ जयपुर में राजभवन तक शांतिपूर्ण मार्च किया। इस दौरान कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि राज्य की बीजेपी की वसुंधरा राजे सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान हुए करप्शन पर पर्दा डालने के लिए ही इस तरह का तुगलकी अध्यादेश लाया है।

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