November 29, 2021
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नदी तट पर हो रहा लाल ईट का अवैध निर्माण, मिल रहा स्थानीय प्रशासन का मौन समर्थन

नदी तट पर हो रहा लाल ईट का अवैध निर्माण, मिल रहा स्थानीय प्रशासन का मौन समर्थन

हरितछत्तीसगढ़ बसन्त चन्द्रा

चंद्रपुर:-  शासन के सारे निति- नियमो के बाद भी  ग्राम पंचायतो व् नगरीय निकायों की मनमानी अब सर चढ़ कर बोलने लगी है | निति – नियमो की व्याख्या भी ये मनमर्जी से कर रहे मानो विधायिका की तरह ये कानून बनाने का अधिकार रखते हो | नदी किनारे जमीं खोदती JCB

  मामला ग्राम पंचायत चंद्ली, बालपुर, कलमा, गोपालपुर, बरहागुडा, चंद्रपुर  जनपद- डभरा, जिला – जांजगीर चाम्पा के है | जहा पर अन्य राज्यों से आये लोगो और ग्राम पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और उनके करीबी रिश्तेदारों द्वारा शासकीय, अशासकीय भूमि पर बिना खनिज विभाग, पर्यावरण विभाग की स्वीकृति व् ग्राम पंचायत की सहमती / अनुमति बिना ही लाल ईट का निर्माण वर्षो से मांड नदी / महानदी  तट के करीब ही किया जा रहा जो की सर्वथा अनुचित है| जबकि खनिज विभाग के नियमानुसार नदी तट के समीप किसी भी तरह के खनन, ईट निर्माण अदि गौण खनिज सम्बन्धी कार्य प्रतिबंधित होते है | कुछ समय  पूर्व समाचार प्रकाशन के दौरान खनिज विभाग के अधिकारी के.के. बंजारे ने कार्यवाही की बात कही थी | वही उस समय की अनुविभागीय अधिकारी – डभरा ( राजस्व ) ने कार्यवाही का आश्वाशन दिया था जो आज महीनो बाद भी कही नजर न आ रहा | समय समय पर राजस्व अमले के रेवेन्यु इंस्पेक्टर, पटवारी कोटवार के द्वारा पंचनामा कार्यवाही की बात कही जाती रही है | वही नगर पंचायत द्वारा भी नोटिस दिया गया है, पर भी किसी ईट भट्ठे को बंद होते न देखा गया है | जो की अपने आप में बहुत बड़ा प्रश्न है | नदी के तट से सटा कर अवैध  ईट निर्माण अब भी जारी है | बल्कि बड़े बड़े  JCB मशीन लगा कर नदी के कुछ फीट दूर ही मट्टी खोदा जा रहा | जानकारी अनुसार राजस्व प्राप्ति व् ईट निर्माण हेतु प्राथमिक अनुमति/ सहमती, ग्राम पंचायत / नगर पंचायत  द्वारा दिया जाता है |

 

 

सभी नियम कायदों की जानकारी होने पर भी ग्राम पंचायत / नगर पंचायत द्वारा नियम कानूनों को तोड़ने में मौन सहमती दिया जा रहा | जो इनके द्वारा दिए जा रहे सह को प्रकट करता है| इस सम्बन्ध में RTI ( सुचना के अधिकार 2005) तहत जानकारी मांगे जाने पर इन अवैध भट्टों को संरक्षण देते हुए, अवैध ईट निर्माताओ के बचाव की नियत से ग्राम पंचायत चंद्ली ने राज्य सरकार व् ग्राम पंचायत के नियम कायदों की अनदेखी करते हुए, बिना पर्यावरण विभाग व् खनिज विभाग से अनुमति प्राप्त, ग्राम पंचायत से बिना सहमती लिए हुए नदि तट पर बने इन ईट भट्टों को कर मुक्त करने सम्बन्धी प्रस्ताव देने की जानकारी दी | वही ग्राम पंचायत बालपुर ने प्रत्येक ईट भट्ठों से 10000/- की राशि वसूल ली| ग्राम पंचायत कलमा व् गोपालपुर ने इस मामले में मौन साध इन ईट भट्ठों को अपना समर्थन दिया | वही ग्राम पंचायत बरहागुडा ने सारी हद पार करते शासकीय भूमि व् म्निजी भूमि पर नदी किनारे भट्ठों से प्रति लाख 600/- की रकम सरकारी कागजो पे दिखा उसे वैध करार दिया|

 

नियम कायदों को ताक में रख कर ऐसे अवैध लाल ईट भट्ठों को दिया जा रहा मौन समर्थन समझ से परे है | सारे मामले पर गौर करे तो स्पष्ट रूप से इन अवैध लाल ईट भट्टों को संरक्षण देने की नियत से पंचायत / अधिकारियो द्वारा किया गया गोलमाल है | इन स्थानों पर ईट निर्माण हेतु मट्टी खोदे जाने से तटो का कटाव तेजी से हो रहा व् कलमा बैराज के डूब क्षेत्र में आने की वजह से बाढ़ की आशंका भी बलवती हो रही साथ ही इन भट्टों में ईट पकाने हेतु अवैध कोयले, लकड़ी व् रेट का प्रयोग भी धड़ल्ले से किया जा रहा | जिस संबंध आज तक किसी अधिकारी या जिम्मेदार जनप्रतिनिधि ने कोई पहल न की है| ग्राम पंचायत द्वारा इन भट्ठों को संरक्षण देने की नियत से किये पंचायत प्रस्ताव आदि की जानकारी समय समय पर जनपद अधिकारी डभरा को भी दी गयी परन्तु अब तक उस पर कोई ठोस कार्यवाही न हुई है बल्कि धड़ल्ले से ईट निर्माताओं द्वारा निर्माण / विक्रय आदि जारी है | और शासन की बड़ी बड़ी पर्यावरण बचाने की योजना व् राजस्व प्राप्ति की कार्यवाही दम तोड़ रही | मनमर्जी शासकीय / अशासकीय भूमि पर ऐसा निर्माण व् उसका निकायों द्वारा समर्थन भ्रस्टाचार की पराकाष्ठा है | सारे नियम कायदों का खुल्ला उलंघन करने वाले अधिकारी, पदाधिकारी अवैध कार्यो को संरक्षण दे रहे | जिनपर समय रहते उचित नकेल कसने की आवश्यकता है |

 

अनुविभागीय अधिकारी डभरा: श्री बजरंग दुबे – लाल ईट का निर्माण प्रतिबंधित है | ऐसे में यदि नियमो को ताक में रख निर्माण किया जा रहा तो जरुर आवश्यक कार्यवाही होगी | और ऐसे अवैध संचालित ईट भट्ठों पर रोक लगाईं जायेगी|

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