January 20, 2022
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मंगलवार को नहाय-खाय के साथ छठ पूजा हुवा शुरू छठ पूजा, जानिए इसका महत्व

मंगलवार को नहाय-खाय के साथ छठ पूजा हुवा शुरू

हरित छत्तीसगढ विवेक तिवारी संजय तिवारी/पत्थलगांव:आस्था, समर्पण, शक्ति और सेवा भाव से जुड़ा चार दिवसीय छठ पर्व मंगलवार से नहाय-खाय के साथ आरंभ हो गई। सोमवार के बाजार को पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड अंचल के लोगों में उल्लास देखा गया और वह पूजा की तैयारी में सोमवार के बाजार में नए नए प्राकृतिक फल फूल और पूजा की सामाग्री लेने में जुटे थे। भगवान भास्कर की आराधना का लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा सुबह नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया. पत्थलगांव के पुरानी बस्ती समेत अन्य भागों में मंगलवार की सुबह इस महापर्व की शुरुआत व्रतियों और श्रद्धालुओं ने नहाय-खाय के साथ की. यहंा पूरन तालाब,झरिया नाला सहित अन्य भागों में आज सुबह व्रतियों और श्रद्धालुओं ने विभिन्न नदियों एवं तालाबों में स्नान करने के बाद चने की दाल, कद्दू की सब्जी व अरवा चावल से बनाये प्रसाद का ग्रहण किया.

 

उल्लास से परिपूर्ण इस पर्व में सेवा और भक्ति भाव का विराट रूप दिखता है। चार दिन तक छठ के पारंपरिक गीत ‘कांच की बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए’, ‘जल्दी जल्दी उग हे सूरज देव…’, ‘कइलीं बरतिया तोहार हे छठ मइया’ आदि से पूरा माहौल ही छठ के रंग में रंगा रहता है। इसके बाद खरना (लोहंडा) होगा जिसमें व्रतधारी दिन भर का उपवास रखेंगे तथा शाम को स्नान करने के बाद गन्ने के रस अथवा गुड, दूध और चावल की बनी खीर के साथ चावल के आटा का पिट्ठा तथा घी चुपडी रोटी का प्रसाद तैयार करेंगे. इस प्रसाद को भगवान सूर्य को अर्पित करने के बाद उसे व्रती ग्रहण करेंगे तथा श्रद्धालुओं के बीच वितरित करेंगे. खरना के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरु हो जायेगा और शाम को वे अस्ताचलगामी सूर्य को पहला अर्घ्य देंगे. प्रात व्रतियों द्वारा उदीयमान सूर्यदेव को दूसरा अर्घ्य देने के साथ चार दिवसीय लोक आस्था का यह पर्व संपन्न हो जाएगा.

दिवाली के बाद सूर्य भगवान के उपासना का सबसे बड़ा त्योहार छठ आता है। चार दिनों तक चलने वाला छठ पर्व नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है।

वहीं वार्ड क्रमांक 12 के पार्सद श्यामनारायण गुप्ता कहते हैं कि छठ पर्व को लेकर कई लोक कथाएं प्रचलित हैं। इनमें से एक यह है कि लंका पर विजय के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन भगवान राम और सीता ने उपवास कर सूर्यदेव की आराधना की थी। सप्तमी को सूर्योदय के समय पुन: अनुष्ठान कर सूर्यदेव का आशीर्वाद लिया था।हिन्दू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तक चलता है। यह त्योहार बिहार और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस त्योहार को परिवार के सुख और समृद्धि के लिए मनाया जाता है।मान्यता के अनुसार, जब पांडव जुए में कौरवों से अपना सारा राज-पाट हार गए थे तब द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था तब दौपद्री की सभी मनोकामनाएं पूरी हुईं थी। वही एक अन्य कथा के अनुसार लंका पर विजय प्राप्‍त करने के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी छठ के दिन भगवान राम और माता सीता ने व्रत किया था और सूर्यदेव की पूजा की थी।

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