November 29, 2021
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छठ पर अस्तांचलगामी सुर्य को दिया गया अध्र्य, पूरन तालाब,प्रेमनगर नाला के घाटों पर बड़ी संख्या में जुटे श्रुद्धालु

छठ पर अस्तांचलगामी सुर्य को दिया गया अध्र्य, पूरन तालाब,प्रेमनगर नाला के घाटों पर बड़ी संख्या में जुटे श्रुद्धालु

हरित छत्तीसगढ़ विवेक तिवारी/संजय तिवारी पत्थलगांव । खरना पूजा के साथ-साथ उगते हुए सुर्य को अध्र्य देने के बाद उत्तर भारत के सबसे बड़े त्यौहार छठ पर्व का शुभारंभ हो चुका है। इसी क्रम में छठ पर्व के दूसरे दिन आज गुरूवार को क्षेत्र में बसे उत्तर भारतीय समेत अन्य श्रृद्धालु परिवारों ने सैकड़ो की संख्या में नदी घाटों पर पहुंचकर पूजा के लिए गन्ने का मंडप सजाकर ऋतुफलो के साथ कमर तक पानी में अस्तांचल गामी सुर्य को अध्र्य दिया। कल शुक्रवार की सुबह उगते हुए सुर्य को अध्र्य देने के बाद व्रती महिलाएं अपने व्रतों का पारण करेगी।
हर साल की भांति इस साल भी श्रृद्धलुओं ने छठ पर्व के अवसर पर आज शाम शहर के पुरन तालाब,प्रेमनगर नाला,किलकिला नदी के विभिन्न घाटों में विधिविधान से पूजा अर्चना कर अस्तांचल गामी सुर्य को अध्र्य दिया। छठ का यह पर्व यहां बसे उत्तर भारतीय लोगों द्वारा प्रतिवर्ष पारंपारिक श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाता रहा है। छठ पर्व से कुछ दिन पूर्व से ही इसकी तैयारी उत्तर भारतीय परिवारों में शुरू हो जाती है और छठ पूजा के लिये नया सूपा , टुकनी के अलावा सभी प्रकार के फलों व पकवानों की खरीददारी की जाती है। इस वजह से शहर में भी पिछले तीन दिनों से भीड़भाड़ का महौल देखा गया। पिछले कुछ दिनों से यहां केे लोगों में छठ पर्व को लेकर खासा उत्साह भी देखा जा रहा है। कल बुधवार को छठ पर्व के पहले दिन श्रद्धालु द्वारा उगते हुए सुर्य की पूजा अर्चना कर पर्व की शुरूआत की गई। जिसके बाद घर में लौकी की सब्जी और चावल की रोटी बनाकर इसका सेवन किया गया। इस दौरान व्रती महिलाओं द्वारा उपवास रखकर भी छठ पर्व के दौरान व्रत का पालन किया जाता है। ये महिलाएं दिन भर उपवास रहकर शाम के समय प्रसाद के रूप में खीर व रोटी भोग लगाकर इसे ग्रहण करती है। खरना पूजा के साथ शुरू हुए इस पर्व के दूसरे दिन आज शहर के विभिन्न स्थानों पर श्रृद्धालु महिलाओं व पुरूषों की भारी भीड़ लगी रही। इस आयोजन के लिये छठ घाटों पर पंडाल सजाकर पूजन की व्यवस्था की गई थी, जहां व्रती महिलाओं और श्रद्धालु पुरूष सिर पर ऋतुफल और पूजन सामग्री की टोकरी लेकर शाम के समय पहुंचे और गन्ने का मंडप सजाकर ऋतुफल के साथ पूजा अर्चना करते हुए डूबते हुए सुर्य को अध्र्य दिया गया। छठ पर्व के अंतिम दिन कल शुक्रवार की सुबह श्रृद्धालुओं द्वारा उगते हुए सुर्य देव को फलों का अध्र्य देकर उपवास का पारण किया जाएगा। इस विशेष पूजा के लिये बांस की टुकनी व सूपा हर साल नया खरीदकर सभी प्रकार के फल व शुद्ध घी में बना आटे का पकवान तैयार कर सुर्य देव को प्रसाद के रूप में चढ़ाये जाने की प्राचीन परंपरा रही है जिसका पालन व्रती परिवार पूरी श्रद्धा के साथ करते आ रहें है। कल पूजा के बाद लोगों को प्रसाद देकर व्रती महिलाएं व पुरूष स्वंय प्रसाद ग्रहण करने के बाद अपना-अपना उपवास संपन्न करेंगे।

दिवाली के बाद सूर्य भगवान के उपासना का सबसे बड़ा त्योहार छठ आता है।चार दिनों तक चलने वाला छठ पर्व नहाय खाय के साथ शुरू हो चुका है। 25 अक्टूबर को खरना, 26 अक्टूबर को सांझ का अर्ध्य और 27 अक्टूबर को सूर्य को सुबह का अर्ध्य के साथ ये त्योहार संपन्न होगा।

हिन्दू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से आरंभ होकर सप्तमी तक चलता है। यह त्योहार बिहार और उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है। इस त्योहार को परिवार के सुख और समृद्धि के लिए मनाया जाता है।

मान्यता के अनुसार, जब पांडव जुए में कौरवों से अपना सारा राज-पाट हार गए थे तब द्रौपदी ने छठ का व्रत किया था तब दौपद्री की सभी मनोकामनाएं पूरी हुईं थी। वही एक अन्य कथा के अनुसार लंका पर विजय प्राप्‍त करने के बाद रामराज्य की स्थापना के दिन कार्तिक शुक्ल षष्ठी यानी छठ के दिन भगवान राम और माता सीता ने व्रत किया था और सूर्यदेव की पूजा की थी।

छठ पूजा का शुभ मुहूर्त

छठ पूजा के दिन सूर्यादय – 06:41 बजे सुबह
 
छठ पूजा के दिन सूर्यास्त- 06:05 बजे शाम 

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