October 22, 2021
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एमआरपी पर GST क्या सही है जाने सच

जीएसटी को गलत तरीके से चार्ज करने वाले व्यपारियो के बारे में शिकायत की जारी है। कई उपभोक्ताओ ने शिकायत की है कि कुछ खुदरा विक्रेता उत्पादों के एमआरपी के ऊपर चार्ज कर रहे हैं, उसके बाद फिर उसके ऊपर जीएसटी चार्ज कर रहे हैं। सरकार ने ये स्पष्ट कर दिया है कि खुदरा में बेचा जाने वाले उत्पाद की अधिकतम कीमत एमआरपी है और इससे ऊपर कुछ चार्ज करना अपराध है।MRP चुकाने के बावजूद GST वसूले जाने की बात  इन दिनों देखने को मिल रही है

 नियम के मुताबिक आपको एमआरपी देने के बाद अलग से जीएसटी देने की जरूरत नहीं है. जीएसटी पहले से एमआरपी में जुड़ा हुआ है. लेकिन अगर दुकानदार ऐसा कर रहा है, तो सतर्क हो जाइए अगर इस तरह का कोई भी बिल आपको मिलता है तो आप केंद्र सरकार के हेल्पलाइन नंबर के ज़रिए उसकी शिकायत कर सकते हैं.केंद्र सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर इसकी शिकायत कर सकते हैं. ये नंबर 1800-103-9271 है .जीएसटी के नाम पर किसी उत्पाद पर अगर आपसे एमआरपी से ज्यादा पैसे लिए जा रहे हैं तो ये सरासर गलत है.जीएसटी एक्सपर्ट के मुताबिक कई दुकानदार जानबूझकर एमआरपी के ऊपर जीएसटी के नाम पर चार्ज कर रहे हैं और लोग भी अज्ञानतावश पैसे दे रहे हैं. लेकिन ये बात एकदम साफ हैं कि कोई भी एमआरपी के ऊपर कोई दूसरा टैक्स नहीं लगा सकता. कई जगहों पर दुकानदार एमआरपी पर जीएसटी वसूल रहे हैं. एमआरपी बोले तो मैक्सिमम रीटेल प्राइस यानी अधिकतम खुदरा मूल्य. यानी कोई भी दुकानदार अपनी दुकान पर रखे किसी भी पैकेज्ड प्रोडक्ट पर ज्यादा से ज्यादा उतना ही पैसा ले सकता है, जिसका पैकेट पर लिखा है. अपनी लागत और मुनाफे के मुताबिक वो छपे दाम से कम ले सकता है, लेकिन उससे ज्यादा नहीं.जीएसटी लागू होने के बाद उपभोक्ता से किसी उत्पाद के एमआरपी पर जीएसटी लिया जाना गलत है. एमआरपी में जीएसटी जुड़ा हुआ हैं इसीलिए ग्राहक को एमआरपी के ऊपर कोई पैसा देने की ज़रूरत नही हैं. लेकिन दुकानदार आपसे एमआरपी के बाद भी जीएसटी के नाम पर कुछ रुपए वसूल रहे हैं तो सतर्क हो जाए क्योंकि यह उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ है.कंज्यूमर अफेयर मिनिस्ट्री ने बताया है कि एमआरपी में जीएसटी पहले से शामिल है, इसलिए उससे ज्यादा दाम में कोई चीज आपको नहीं मिल सकती. इसके अलावा अगर किसी प्रोडक्ट का एमआरपी जीएसटी के तहत बढ़ रहा है, तो कंपनी को इस बात की जानकारी न्यूजपेपर या दूसरे मीडियम में ऐड के जरिए देनी होगी. साथ ही, कंपनी को पुराने स्टीकर के साथ नए एमआरपी का स्टीकर भी अपने प्रोडक्ट पर चिपकाना होगा. कंपनियों और दुकानदारों को इस कवायद के लिए मंत्रालय ने 60 दिन का समय दिया है.

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