September 17, 2021
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राजधानी के बुढा तालाब में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं का उमड़ा सैलाब धरना प्रदर्शन ; केंद्रों में ताले

3 अगस्त को निकालेंगे विशाल रैली विधानसभा घेरने को नही मिला परमिशन तो बुढा तलब पर ही करेंगे घेराबंदी 

काम तो अध्यापक व बाबू का लिया जा रहा लेकिन मजदूरी कलेक्टर दर  के बराबर भी नहीं दी जा रही है: पदमावती  साहू 


हरित छत्तीसगढ़ रायपुर
। प्रदेश भर से लाखों की संख्या मे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन सुत्रिय मांगो को लेकर तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन मे बैठी हुई है। 31 जुलाई से शुरू हुए धरना प्रर्दषन के दुसरे दिन मंगलवार को भारी संख्या मे कार्यकर्ताओं ने राजधानी के बुढ़ा तालाब मे सरकार के खिलाफ हल्ला बोला अपनी मांगो को बुलंद करती कार्यकर्ताओं का जोश देखते ही बन रहा था। इस दौरान राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं कार्यकर्ताओं के आंदोलन पर चले जाने से पुरे प्रदेश के आंगनबाड़ी में ताला बंद की स्थिति बन गई है।

वेतन बढ़ाने ,समान काम समाने वेतन के आधार पर महिला बाल विकास विभाग मे मर्ज करने ,सेवा समाप्ति के बाद पांच लाख रूपए जिविकोपार्जन की मांग को लेकर दो दिनों से कार्यकर्ताओ ंद्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों में ताला लगाकर राजधानी समेत प्रांतस्तरीय धरना प्रर्दशन किया जा रहा है। इस दौरान आंगनबाड़ी केन्द्रों में पदस्थ अधिकांश कार्यकर्ता एवं सहायिका तीन सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से राजधानी रायपुर में धरना पर बैठे हुए हैं। जिस कारण क्षेत्र मे संचालित समस्त आंगनबाड़ी केन्द्रों में ताला जड़ने की स्थिति निर्मित हो गई है। वहीं प्रशासन द्वारा धरना पर बैठने वाले कार्यकर्ताओं का सैलरी काटे जाने की धमकी के बाद भी कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के अल्टीमेटम की परवाह न करते हुए राजधानी के बुढ़ा तालाब समेत प्रांतिय स्तर पर धरना शुरू कर दिया।

बुढा तालाब रायपुर मे धरना-प्रदर्शन पर बैठे छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका कल्याण संघ की प्राताध्यक्ष पदमावती साहू ने बताया कि अपने हक की लड़ाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, पुरे प्रदेश मे हम सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एंव सहायिकाएं वर्ष 1975 से राज्य शासन के महिला बाल विकास के अधिन कार्यरत हैं।हम लोग राज्य के सभी क्षेत्रों मे प्रतयेक गरीब एंव निम्न मध्यम वर्गीय परिवार तक अपनी पहुंच रखते है गर्भधारण से लेकर आहार टीकाकरण समेत बाल मित्र स्वसहायता समुह जैसे 14 योजनाओं मे दिन रात काम करने के अलावा राशनकार्ड,स्वास्थ्य बीमा,पल्स पोलियों समेत कई अन्य विभागों मे भी कार्य किया जाता है।परंतु इतने सारे काम के एवज मे कार्यकर्ताओं को चार हजार व सहायिकाओं को दो हजार ही मिलता है। मजबूरी मे काम कर रहे हम लोग मानसीक व शारीरीक रूप से प्रताड़ित हो रही है हमे तो श्रम कानूनों के अंतर्गत कलेक्टर दर की तय रकम भी नही मिल पा रहा है।

यहां मौजुद तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह चंद्राकर ने बताया कि वर्तमान मे प्रदेश मे महिला बाल विकास आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की दशा पूरे भारत वर्ष मे सबसे दयनीय बन चुकी है। प्रदेश मे महिलाओं के श्रम के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ ओर किसी राजय मे नही है जबकी अपनी जायज मांग को लेकर अनेकों बार प्रदेश की कार्यकर्ता ओर सहायिकाए आंदोलन कर चुकी है। हमारा संगठन उनके साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ा है और जब तक उनकी मांगे पुरी नही हो जाती उनके हर कदम मे साथ खड़ी रहेगी। यहां उपस्थित तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रातांध्यक्ष राकेश साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ जुझारू आंगनबाड़ी कार्यकर्ता-सहायिका कल्याण संघ के बैनर तले प्रदेश के समस्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका धरना प्रदर्शन के लिये रायपुर आए हुये हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं की मांग जायज है, इस दौरान तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के उपप्रातांध्यक्ष गजेश यदु ने भी कार्यकर्ताओं ओर सहायिकाओं को न्यूनतम वेतन 18 हजार रू.देते हुये समान वेतन व समान कार्य के आधार पर महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत शासकीय कर्मचारी घोषित कर सेवा समाप्ति के बाद 5 लाख रू. जीवकोपार्जन हेतु प्रदाय किये जाने की मांग का सर्मिन करते हुए उनके धरना प्रर्दशन मे अपनी सहभागिता निभाते नजर आए।

इस दौरान रूखमणी सज्जन बस्तर, राजकुमारी डहरिया, सुधा रात्रे महासमुंद, ताज बेगम जांजगीर, केजा ठाकुर गरियाबंद, भुनेश्वरी तिवारी रायपुर, वासंती वर्मा, हेमिन सोनी, गायत्री बाउल बलरामपुर, जयश्री राजपुत कांकेर, प्रेमवती नाग जगदलपुर, बेरनादित तिर्की जशपुर,सुलेखा शर्मा महासमुंद,लक्ष्मी मंहत अंबिकापुर,पार्वती यादव कर्वधा, गीता बाघ दुर्ग,विद्या जैन बेमेतरा, प्रमिला ठाकुर मुंगेली, कमलापति सिरदार सुरजपुर, पिंकी ठाकुर राजनांदगांव, राजलक्ष्मी वैष्णव धमतरी,षैलेष ज्योति बिलासपुर,जयश्री यादव बालोद,शतरूपा ध्रुव भाठापारा, फुलेश्वरी श्रीवास रायगढ़, शीला गोस्वामी कोरबा,किरण नाग दंतेवाड़ा, हेमलता ठाकुर बीजापुर,दयावती नाग सुकमा,पुष्पा राय कांडागांव,बेसन्त्री भद्र नारायणपुर, शकुन सोनी,विभा श्रीवास,ममता ढीढी,रोशनी शर्मा,मीना साहू,नीता काजवे,सारिका तिवारी,प्रतिमा गजभिये,मंजुला रेडडी,सावित्री पांडे,सरोज देवांगन,दुलौरिन,मेम बाई, शबिना,नरूलता,अरूणा,लता तिवारी,प्रभा कोठारे, रजनी,पंकजलता समेत सैकड़ो कार्यकताओं व सहायिकाओं ने मंच मे आकर प्रदेश सरका के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को लेकर आवाज बुंलद किया इन सभी का कहना था कि कम वेतन में अब परिवार का गुजारा नहीं होता है। हम आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका बच्चों को अक्षर ज्ञान देते हैं। आंगनबाड़ी केंद्र एक पाठशाला है इसलिए यह पद एक शिक्षक के पद के बराबर होना चाहिए व वेतन भी एक समान होने चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं का वेतन 18 हजार व सहायिकाओं को 9 हजार रुपए देने की मांग रखी। वहीं दूसरी तरफ केंद्रों में तालाबंदी के कारण सुबह से ही बच्चे केंद्र के बाहर खेलते रहे। वहीं कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में पंचायत व स्व सहायता समूह के माध्यम से बच्चों को भोजन नसीब हो सका।

 

धुप में छाता लेकर धरने में आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता सहायिका संघ के मुताबिक जिला कार्यक्रम अधिकारी को 15 दिन पूर्व से हड़ताल की सूचना दे दी गई थी। कार्यकर्ता 3 अगस्त को काम पर लौट आएंगे।

 

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