June 5, 2020
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छत्तीसगढ़ी भाषा है-“डउकी” कोटा-तहसीलदार-रिटर्निंग अधिकारी:–प्रमोद गुप्ता।

छत्तीसगढ़ी भाषा है-“डउकी” कोटा-तहसीलदार-रिटर्निंग अधिकारी:–प्रमोद गुप्ता।

महिला-कांग्रेसी अभ्यर्थी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का किया प्रयोग,, जिला सहित राज्य निर्वाचन आयोग को शिकायत।

*कोटा तहसीलदार के रूप में पदस्थ होने के बाद लगातार विवादों से रहा है,,नाता लोगों से दुर्व्यवहार की अक्सर होती शिकायत।*

*मीडिया के सवालों पर भी झल्लाए,,रिटर्निंग-ऑफिसर ने धमकी भरे लहजे में कहा जो करना है,,जहां जाना है जाओ।*


*दिनांक:-07-12-2019*

*संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।*

*करगीरोड-कोटा:-छत्तीसगढ़ की राजभाषा को भले ही 8-वी अनुसूची में जगह नही मिली हो पर छत्तीगसढ़ की राजभाषा में पत्नी को”डउकी” कहते हैं, ये शब्द खबर लिखने वाले कलमकार के नही है, ये शब्द वर्तमान नगरीय निकाय-चुनाव के लिए रिटर्निंग अधिकारी बनाए गए कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के है जिन्होंने प्रदेश की छत्तीसगढ़ी राजभाषा में हो सकता है पीएचडी किए हुए, इसलिए उन्हें ही सबसे पहले जानकारी हुई की छत्तीसगढ़ में पत्नी को “डउकी” कहते हैं, फिलहाल इस शब्द को गूगल पर कलमकार द्वारा सर्च किया जा रहा है।*


*06 दिसंबर को नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि थी, पूरे 15-वार्डों के लिए पार्षद पद के उम्मीदवारों ने अपने-अपने राजनीतिक दलों के माध्यम से नामांकन जमा कर दिए, नियमतःउम्मीदवारों के नामांकन जमा होने के बाद रिटर्निंग-ऑफिसर को सभी उम्मीदवारों के शपथ-पत्रों का प्रकाशन कर चस्पा कर देना चाहिए, पर ऐसा नहीं किया गया, रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा-?शनिवार को सुबह 11:00 बजे के आसपास सभी नामांकन-पत्रों की स्कूटनी रिटर्निंग-ऑफिसर और सहायक रिटर्निंग-ऑफिसर के द्वारा अभ्यर्थियों के उपस्थिति में स्कूटनी की गई वार्ड क्रमांक 01 से लेकर वार्ड क्रमांक 15 तक जिसमें की लगभग सभी अभ्यर्थियों के नामांकन स्वीकृत किए गए, रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा इसी बीच वार्ड क्रमांक 07 और वार्ड क्रमांक 12 के अभ्यर्थियों के द्वारा शपथ-पत्र को लेकर रिटर्निंग-ऑफिसर के समक्ष आपत्ति की गई पर रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा आपत्ति को अस्वीकार कर दिया गया, जिसके बाद वार्ड क्रमांक 12 के अभ्यर्थी रंजना सुभाष अग्रवाल के द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आपत्ति निरस्त किए जाने के बाद विरोध प्रकट किया, साथ ही रिटर्निंग ऑफिसर तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के दुर्व्यवहार की शिकायत भी की, इस पूरे मामले की खबर मीडिया को लगते ही तब मीडिया के द्वारा इसकी जानकारी लेने रिटर्निंग ऑफिसर प्रमोद गुप्ता के पास पहुंची, जहां पर कांग्रेस पार्टी के नेतागण और कार्यकर्ता के साथ आम आदमी पार्टी के भी वार्ड क्रमांक 12 के अभ्यर्थी पहुंचे, जहां पर अभ्यर्थियों के शपथ-पत्र के प्रकाशन के बारे में पूछा तो रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा बताया गया की शपथ पत्र का प्रकाशन रात में चस्पा कर दिया गया था, सुबह चस्पा वाला कागज किसी ने निकाल लिया, नगर पंचायत कोटा के पूरे 15 वार्डों में निष्पक्ष चुनाव कराने की जवाबदेही वर्तमान रिटर्निंग-ऑफिसर प्रमोद गुप्ता की है, शपथ पत्र को रात में चस्पा किए जाने और सुबह किसी के द्वारा निकाल लिए जाने की बात कहने वाले जिम्मेदार रिटर्निंग ऑफिसर के इस गैर-जिम्मेदारना बयान से आप समझ सकते हैं, की आने वाले दिनों में नगर पंचायत कोटा के वार्डों में चुनाव किस प्रकार होंगे वार्ड क्रमांक 12 के अभ्यर्थी के पति के साथ कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता के द्वारा जब इस बारे में आपत्ति दर्ज कराई गई तो सीधे तौर पर उनकी आपत्ति को अस्वीकार करते हुए धमकी भरे स्वर में रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा अभ्यर्थी के पति और कांग्रेसी नेताओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया साथ ही धमकी भरे लहजे में मीडिया के समक्ष जहां जाना है-? जो करना है-?आप लोग जा सकते हैं-?आपकी कोई भी आपत्ति यहां स्वीकार नहीं की जाएगी-?जब मीडिया के द्वारा इस बारे में सवाल किया गया की बाकी नगर पालिका में शपथ पत्र का प्रकाशन कर दिया गया है-?कार्यालय के बाहर चस्पा कर दिया गया है-?तो आपके द्वारा अभ्यर्थियों के शपथ पत्र का प्रकाशन क्यों नहीं किया गया जिसके बाद सवालों का स्पष्ट जवाब देने के बजाय मीडिया के ऊपर ही रिटर्निंग ऑफिसर प्रमोद गुप्ता द्वारा झल्लाते हुए मीडिया को धमकी भरे लहजे में बात करते हुए जहां जाना है वहां जा सकते हो कहकर बोला गया-? जिस पर मीडिया कर्मियों ने भी आपत्ति दर्ज कराई।*


*वर्तमान कोटा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष आदित्य-दीक्षित के द्वारा कोटा थाने से सूचना के अधिकार के माध्यम से विपक्षी दलों के कुछ अभ्यर्थियों से संबंधित अपराधिक मामले के दस्तावेज के आधार पर स्कूटनी के दौरान वार्ड क्रमांक 07 के कांग्रेस-प्रत्याशी बबलू अहिरवार ने बीजेपी के प्रत्याशी प्रमेंद्र-गंधर्व पर शपथ-पत्र में अपराधिक प्रकरण छुपाने सहित जनता कांग्रेस के प्रत्याशी अनिल मसीह के जाति-प्रमाण पत्र पर आपत्ति जताते हुए नामांकन रद्द करने की बात रिटर्निंग ऑफिसर प्रमोद गुप्ता से कही गई, जिस पर रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा एक सिरे से कांग्रेस उम्मीदवार की आपत्ति को खारिज कर दिया गया, वहीं पर वार्ड क्रमांक 12 के अभ्यर्थी रंजना सुभाष-अग्रवाल के द्वारा भी बीजेपी के उम्मीदवार अजय अग्रवाल और जनता कांग्रेस के उम्मीदवार विनीत तिवारी के द्वारा शपथ पत्र में अपराधिक मामले छुपाने को लेकर दावा-आपत्ति की थी, उसे भी रिटर्निंग-ऑफिसर ने एक सिरे से खारिज करते हुए, आपत्ति को अस्वीकार करते हुए कोर्ट जाने की बात कही, जिसके बाद मीडिया की उपस्थिति में कांग्रेसी नेताओं सहित आम आदमी पार्टी के अभ्यर्थी ने अपना विरोध प्रकट किया आपत्ति भी जताई, रिटर्निंग ऑफिसर और कांग्रेसी नेताओं सहित आम आदमी पार्टी के अभ्यर्थी के बीच काफी गर्मा गर्मी बहस रही, आरोप-प्रत्यारोप के बीच कुछ देर के लिए तहसील-कार्यालय का माहौल काफी गर्म रहा, वाद-विवाद और आरोप-प्रत्यारोप के बीच वार्ड-क्रमांक 07 के अभ्यर्थी की आपत्ति लेने की बात रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा कही गई, वह भी 3:00 बजे के बाद जब समय समाप्त हो चुका था।*


*पूरे स्कूटनी के दौरान और आपत्ति के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के द्वारा वार्ड क्रमांक 07 और वार्ड क्रमांक 12 के अभ्यर्थियों से दुर्व्यवहार करना-? उनकी आपत्तियों को एक सिरे से खारिज करना-? शपथ-पत्र का प्रकाशन नहीं करना पूरे 15 वार्डों के अभ्यर्थियों का शपथ पत्र का प्रकाशन चस्पा कार्यालय के बाहर नहीं करना-? मीडिया के द्वारा और अभ्यर्थियों के द्वारा सवाल उठाए जाने पर रात में चस्पा किए जाने की बात को स्वीकार कर सुबह किसी के द्वारा निकाल लिए जाने की बात कहना-? वार्ड क्रमांक 07 वार्ड क्रमांक 12 के अभ्यर्थियों के खिलाफ सूचना के अधिकार से मिले अपराधिक प्रकरण के दस्तावेज का शपथ- पत्र से बिना मिलान किए ही नामांकन स्वीकार कर लेना कहीं ना कहीं रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर सवाल उठाता है आने वाले समय में प्रचार-प्रसार मतदान, मतगणना, होगी पर वर्तमान रिटर्निंग-ऑफिसर के रहते निष्पक्ष चुनाव होने के आसार कम दिखाई पड़ रहे हैं, इस बात को लेकर कांग्रेस नेताओं के द्वारा जिला-निर्वाचन अधिकारी और राज्य-निर्वाचन आयोग से शिकायत करने की बात कही गई है, साथ ही वार्ड क्रमांक 12 के महिला अभ्यर्थी के खिलाफ अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करने वाले रिटर्निंग ऑफिसर प्रमोद गुप्ता के खिलाफ राज्य महिला आयोग में भी शिकायत करने की बात कहीं गई, वर्तमान रिटर्निंग ऑफिसर के रूप में पदस्थ तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के पदभार ग्रहण करने के बाद विवादों से लगातार इनका नाता जुड़ता जा रहा है, पहले कुछ वकीलों से इनकी नोकझोंक हुई उसके बाद किसी ना किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति कार्यालय में पैदा होती रहती है-?धान खरीदी से पहले कोटा और आसपास के राइस मिलो के मिलरों से भी अनियमितता के नाम से अवैध रूप से उगाही करने की शिकायत भी राईस मिलर द्वारा राजस्व-मंत्री से की जाने की बात कही गई है-? रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका में अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निष्पक्षता से पूरा नहीं किया जा रहा है-?देखना होगा इस पूरे मामले पर जिला निर्वाचन अधिकारी और राज्य निर्वाचन अधिकारी क्या निर्णय लेते हैं।*


*वार्ड-क्रमांक 12 की प्रत्याशी रंजना अग्रवाल के पति सुभाष अग्रवाल का कहना था कि – रिटर्निग आफिसर ने हमारी आपत्ति ही दर्ज नहीं की थी जबकि अभ्यर्थी की तरफ से मैने आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उन्होंने हमारी बात ही नहीं सुनी, बल्कि आपत्ति के दौरान दुर्व्यवहार भी किया गया, बाद में मुझे पता चला कि रिटर्निग आफिसर ने कुछ अर्मादित शब्दों का भी प्रयोग किया है जो कि निंदनीय है।*


*पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष वह कांग्रेस नेता अरूण त्रिवेदी ने कहा कि रिटर्निग आफिसर के द्वारा किसी भी प्रकार का दावा-आपत्ति स्वीकार नहीं किया गया, नाही स्कूटनी से पहले शपथ पत्र का प्रकाशन किया गया, जब हमने इस पर आपत्ति की तो उनका सीधे-सीधे तानाशाही रवैया अपनाते हुए धमकी भरे स्वर में कहना कि जहां जाना है वहां जाओ, साथ ही वार्ड क्रमांक 12 की महिला अभ्यर्थी के बारे में अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया जिसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।*


*वहीं पर इस पूरे मामले स्कूटनी से लेकर दावा आपत्ति और आरोप-प्रत्यारोप के बीच उपस्थित रहने वाले वार्ड क्रमांक 12 के आम आदमी पार्टी के अभ्यर्थी मोहम्मद जावेद खान में भी रिटर्निंग ऑफिसर के क्रियाकलापों पर सवाल उठाते हुए कहा कि नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद शपथ पत्र का प्रकाशन नहीं करना, और अगर कोई अभ्यर्थी दावा-आपत्ति करता है, तो उसके साथ दुर्व्यवहार करना उसके आपत्ति को सीधे-सीधे खारिज कर देना, अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना वह भी एक महिला के खिलाफ काफी निंदनीय है, वर्तमान रिटर्निंग ऑफिसर प्रमोद गुप्ता के रहते नगर पंचायत चुनाव की निष्पक्ष होने की संभावना कम ही दिखाई पड़ रही है, ऐसे अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और आगे भी हमारा विरोध इस बात को लेकर रहेगा।

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