September 24, 2021
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गुजरात अहमदाबाद अस्पताल में 3 दिन में 18 नवजात की मौत, कांग्रेस का प्रदर्शन जारी

अहमदाबादः गुजरात के अहमदाबाद स्थ‍ित सिविल अस्पताल में शुक्रवार रात से शनिवार रात के बीच 9 नवजात बच्चों समेत तिन दिन में २४ बच्चो की मौत का मामला सामने आया है  अहमदाबाद के असारवा स्थित सिविल अस्पताल में पिछले तीन दिन में करीब 18 और पिछले 24 घंटे में नौ शिशुओं की मौत से मची सनसनी के बीच राज्य सरकार ने इसके कारणों और अन्य पहलुओं की अगले 24 घंटे में जांच कर रिपोर्ट देने के लिए एक समिति का गठन किया है। इन मौतों के बाद कांग्रेस ने भी गुजरात सरकार से इस पर जवाब मांगा है. वहीं इस घटना को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया.

अस्पताल के अधीक्षक एम.एक. प्रभाकर ने बताया कि पिछले 24 घंटे में 9 नवजात शिशुओं की मौत हुई है। इनमें से पांच को वीरमगाम,सुरेन्द्रनगर, माणसा, हिम्मतनगर और सुरेन्द्रनगर से गंभीर हालत में लाया गया था। पिछले कुछ समय में हुई ऐसी मौतों का आंकलन भी किया जा रहा है। जो बच्चे मरे हैं उनमें से कुछ तीन दिन से इलाजरत भी थे। ऐसी मौतों पर रोकथाम के भी प्रयास किए जा रहे हैं।इस अस्पताल में नवजात शिशुओं की मौत का औसत प्रतिदिन लगभ 5 से 6 मौतों का है, इसलिए 9 बच्चों की मौत थोड़ा चिंताजनक स्थिति है. हालांकि अस्पताल प्रशासन किसी असामान्य घटना से इनकार कर रहा है. आपको यहां यह भी बता दें कि पिछले तीन दिनों में 18 नवजात शिशुओं की मौत हो चुकी है. इनमें 9 की मौत केवल 28 अक्टूबर को हुई

अत्याधुनिक संसाधनों से संपन्न है शिशु विभाग
अस्पताल के नवजात शिशु विभाग का आईसीयू जहां मौतें हुई हैं वह 100 बेड का है और अत्याधुनिक संसाधनों से संपन्न है। यह देश में ऐसी सबसे बडी सुविधाओं में शुमार है। मरने वाले कई बच्चे जन्म के समय कम वजन और अन्य समस्याओं से पीड़ित थे। इसके कारणों समेत हर पहलू की संपूर्ण जांच के लिए चिकित्सा शिक्षा के उप-निदेशक राघव दीक्षित की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहनगर वडनगर में हाल में उनके हाथों उद्घाटित मेडिकल कॉलेज के डीन नीलेश शाह और गांधीनगर मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष हिमांशु जोशी सदस्य हैं।

कांग्रेस नेता शक्ति सिंह गोहिल ने ट्वीट कर कहा कि गुजरात सरकार को इसके लिए जवाबदेही स्वीकार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार या तो यह स्वीकार करे कि डॉक्टरों ने लापरवाही की या तो यह माने कि उनकी माताएं कुपोषित थीं.

कांग्रेस नेता अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि एक दिन में 9 बच्चों की खबर सुनकर वे बेहद दुखी हैं, यह घटना सरकार के स्वास्थ्य के बारे में लापरवाह और सुस्त रवैए को उजागर करती है.स बीच सूत्रों ने बताया कि इन बच्चों की मौत एक तरह के संक्रमण (सेप्टिशिमिया) के चलते हुई बताई गई है। बताया गया है कि जिन नौ बच्चों की मौत पिछले 24 घंटे में हुई हैं उनमें से पांच दूसरे जिलों से गंभीर हालत में यहां लाये गये थे जबकि चार का इसी अस्पताल में जन्म हुआ था। इनमें से कुछ के वजन मात्र एक से सवा किलो तक थे जो सामान्य वजन ढाई किलो से काफी कम थे। देश के सबसे बडे नवजात शिशु आईसीयू वाले अस्पताल में औसतन प्रतिदिन चार से पांच ऐसी मौतें होती हैं। बताया जाता है कि गुजरात में दीवाली और गुजराती नववर्ष के साथ होने कारण छुट्टियों के चलते निजी अस्पताल में डाक्टरों की संख्या भी कम हो जाने से ऐसे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।

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