July 24, 2021
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नोटबंदी से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई : रमन

हरित छत्तीसगढ़ रायपुर । नोटबंदी से भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। ये बात मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कही। उन्होंने रविवार को अपने निवास में प्रेस वार्ता की। इसमें नोटबन्दी के बाद भारत की मजबूत होती अर्थव्यवस्था के बारे में और नोटबन्दी कि उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देशव्यापी काला धन विरोधी दिवस छत्तीसगढ़ में भी 6 से 9 नवम्बर तक मनाया जाएगा। इस मौके पर उनके साथ सांसद रायपुर रमेश बैस और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक भी मौजूद थे।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि, सरकार ने कालेधन की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के कार्य किए हैं। नोटबंदी का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। एफडीआई को बढ़ावा मिला है। आर्थिक सशक्तिकरण में हम आगे बढ़े हैं। केन्द्र सरकार के प्रयासों से बिचौलियों पर लगाम कसी है। मोबाइल बैंकिंग के खातेदारों की संख्या बढ़ी है। नोटबंदी से नक्सलियों और आतंकवादियों की आर्थिक कमर टूटी है।
 बैंकों में जमा हुई 3 लाख करोड़ की अतिरिक्त राशि : 
उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद बैंकिंग प्रणाली में जमा राशि में लगभग 3 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। बैंकों में आए अतिरिक्त धन के कारण ब्याज दरों में 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई। डिजीटल भुगतान में 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नोटबंदी के बाद 18 लख संदिग्ध खातों की जांच की गई। सरकार को इस दौरान 4 लाख 73 हजार संदिग्ध लेनदेन का पता चला है। 29 हजार 213 करोड़ की अघोषित आय का पता चला है। 1.25 लाख करोड़ रुपए के कालेधन का पता चला है। बाजार में कैश सर्कुलेशन 21 प्रतिशत घटा। इस दौरान 400 से अधिक बेनामी संपत्ति की पहचान की गई और 800 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त की गई। करदाताओं की संख्या में इजाफा हुआ, 56 लाख नए करदाता जुड़े। रिटर्न भरने वालों की संख्या में 24.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। नोटबंदी के बाद 1 करोड़ से अधिक श्रमिकों को ईपीएफ और ईएसआईसी प्रणाली से जोड़ा गया। 50 लाख से अधिक श्रमिकों का बैंक खाता खुला जिससे उनका पारिश्रमिक सीधे उनके खाते में जमा हो रहा है। उन्होंने कहा कि, 2.89 लाख करोड़ रुपए के कैश डिपॉजिट की जांच की जा रही है। नोटबंदी के बाद 16 हजार करोड़ रुपए का कालाधन अब भी बाहर है, जिसे लाने का प्रयास केन्द्र सरकार कर रही है। 3 लाख से अधिक शेल कंपनियों पर नजर रखी जा रही है, 2.1 लाख का पंजीयन रद्द हुआ और कालाधन-हवाला के लेनदेन को छुपाने में शामिल 37 हजार शेल कंपनियों की पहचान की गई है।

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