April 7, 2020
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नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में,,,कांग्रेस-पार्षदो के क्रॉस-वोटिंग,,,के बाद कोटा ब्लॉक-अध्यक्ष पर आरोप लगने शुरू।

नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में,,,कांग्रेस-पार्षदो के क्रॉस-वोटिंग,,,के बाद कोटा ब्लॉक-अध्यक्ष पर आरोप लगने शुरू।

नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में,,,कांग्रेस-पार्षदो के क्रॉस-वोटिंग,,,के बाद कोटा ब्लॉक-अध्यक्ष पर आरोप लगने शुरू।

कोटा-ब्लाक-अध्यक्ष सहित पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष के इशारे पर कांग्रेस पार्षदो ने क्रॉस-वोटिंग किया:–संतोष गुप्ता–कांग्रेस नेता।

कोटा-विधानसभा की चारो निकायों में बीजेपी का कब्जा,,विधायक-छजका का सत्ता-सरकार कांग्रेस की।

दिनांक:-04-02-2020

संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।

कोटा-ब्रेकिंग:—

करगीरोड़-कोटा:-कोटा नगर पंचायत में बीजेपी के दूसरी बार नगर-पंचायत अध्यक्ष बनने के साथ ही नगर पंचायत-उपाध्यक्ष के निर्विरोध चुने जाने के बाद कोटा नगर कांग्रेस-संगठन में कांग्रेसी नेताओं कार्यकर्ताओ में फुट पड़ना शुरू हो गया है, कांग्रेस-संगठन में दो फाड़ होते हुए नजर आना शुरू हो गया है कांग्रेस-पदाधिकरियों के इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया है, कोटा नगर पंचायत में कांग्रेस की करारी हार के साथ ही आज नगर पंचायत अध्यक्ष में मिली हार के बाद व्यथित होकर कोटा महिला ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती माया-मिश्रा ने सोशल-मीडिया में अपने इस्तीफे के पोस्ट डाल दिए, कोटा नगर पंचायत में अध्यक्ष पद की ससक्त दावेदार माया-मिश्रा वार्ड क्रमांक 11 से चुनाव हार चुकी है, चुनाव हारने के बाद श्रीमती माया-मिश्रा ने भी वर्तमान कोटा ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष पर चुनाव में छजका प्रत्याशी को डेढ़ लाख रुपए देकर चुनाव हरवाने का आरोप लगाते हुए सोशल-मीडिया में पोस्ट डाला था, वही पर कोटा-कांग्रेस के एक नेता ने तो कोटा के एक व्हाट्सएप ग्रुप में कोटा ब्लॉक कांग्रेस को राष्ट्रीय-कांग्रेस पार्टी न होकर कोटा कांग्रेस लिमिटेड होकर रह गई है करके पोस्ट डाला गया।*

चुनाव-परिणाम से हताश कांग्रेसी-नेताओं सहित कार्यकर्ता आज अध्यक्ष के हार के बाद फुट पड़े:—–

कोटा नगर पंचायत चुनाव में कांग्रेस की करारी-हार के बाद से ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अंदर जो एक आग भड़की हुई थी, जो कि बाहर निकलने के लिए बेताब थी, आज नगर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी हार के बाद खासकर कांग्रेस पार्षदो के क्रॉस वोटिंग के बाद कोटा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ सभी के सभी कांग्रेसी फुट पड़े कांग्रेस नेताओं में विरोध के स्वर उठने शुरू हो गए, नगर पंचायत कोटा अध्यक्ष के उम्मीदवार श्रीमती गीता गुप्ता के पति संतोष गुप्ता के द्वारा कांग्रेस की हार के साथ कांग्रेस के दो पार्षदो के क्रॉस-वोटिंग का ठीकरा कांग्रेस के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष सहित वर्तमान ब्लाक कांग्रेस-अध्यक्ष के सिर फोड़ा, मीडिया को दिए गए अपने बयान में आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेता संतोष गुप्ता ने कोटा में कांग्रेस की हार का कारण वर्तमान कोटा ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष के कमजोर नेतृत्व को बताया, मीडिया के सामने अपनी भड़ास निकालते हुए संतोष गुप्ता ने बताया कि नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव उन्हें हरवाया गया है, खासकर आज के नगर पंचायत अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस पार्टी के दो पार्षदो को बीजेपी के पक्ष में वोट करने के लिए बीती-रात से ही प्रयास कोटा कांग्रेस-संगठन के दो नेताओ के द्वारा ही शुरू कर दिया गया था, इस बात की शिकायत छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सहित राहुल गांधी तक करने की बात कांग्रेस नेता संतोष गुप्ता के द्वारा कही गई।

कांग्रेस-पार्टी के दो पार्षदो ने किया क्रॉस-वोटिंग बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में किया मतदान:—-

गौरतलब हो कि कांग्रेस पार्टी के द्वारा आज सुबह ही श्रीमती गीता संतोष गुप्ता को कांग्रेस पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के रूप में बीजेपी के विरुद्ध उम्मीदवार बनाया गया था, जहा पर बीजेपी उम्मीदवार श्रीमती अमृता प्रदीप कौशिक को 10-मत प्राप्त हुए, वही पर श्रीमती गीता संतोष गुप्ता को केवल 04-मत ही प्राप्त हुए, जबकि कांग्रेस के 05 पार्षद चुने गए थे, श्रीमती गीता संतोष गुप्ता को 03-कांग्रेस पार्षद के ही मत प्राप्त हुए, बल्कि 01-मत छजका पार्षद का श्रीमती संतोष गुप्ता को जरूर मिला, वही बीजेपी पार्षद अमरनाथ साहू का एक मत पीठासीन अधिकारी ने रद्द कर कुल मिलाकर देखा जाए तो श्रीमती अमृता प्रदीप कौशिक को 11 मत मिले थे, जिसमे की 09 बीजेपी के व 02 कांग्रेस पार्षदो के मत भी बीजेपी उम्मीदवार को ही मिले, नगर पंचायत उपाध्यक्ष के लिए बीजेपी ने अपने ही पूर्व पार्षद व पूर्व में नगर पंचायत उपाध्यक्ष रह चुके अजय अग्रवाल का नाम आगे बढ़ाया, जिसके बाद उपाध्यक्ष पद की प्रक्रिया शुरू की गई, कांग्रेस ने उपाध्यक्ष पद के लिए अपना कोई भी प्रत्याशी नही उतारा, जिसके बाद अजय अग्रवाल निर्विरोध उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए,अजय अग्रवाल दूसरी बार नगर पंचायत उपाध्यक्ष चुने गए, अजय अग्रवाल वार्ड नं 12 से दूसरी बार पार्षद चुने गए हैं, इससे पहले अजय अग्रवाल वार्ड नं 13 से बीजेपी के पार्षद रह चुके हैं।

आने वाले दिनों में कोटा कांग्रेस-के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के और इस्तीफे की बात सामने आ सकती है, साथ ही क्रॉस-वोटिंग करने वाले पार्षदो के खिलाफ भी कांग्रेस संगठन कार्रवाई कर सकती है, इसके अलावा पूरे नगर पंचायत चुनाव में पार्टी के प्रमुख कारणों की समीक्षा भी जिला व प्रदेश के संगठन के पदाधिकारियों द्वारा किया जा सकता है, फिलहाल वतर्मान में कांग्रेस पार्टी के संगठन के नेताओ द्वारा कार्यवाही करना दिखाई नही पड़ता, विधानसभा चुनावों में भीतरघात करने वालो गैर कांग्रेसी नेताओं पर आज तक कांग्रेस पार्टी ने कोई कार्रवाई नही की,विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव आ गया वैसे ही नगर पंचायत चुनाव खत्म होते ही जिला-जनपद-सरपंच-पंच के चुनाव आ गए, इसमे भी प्रचार प्रसार के नेताओ कार्यकर्ताओ की आवश्यकता पड़ेगी,हो गया सकता है, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद कांग्रेस में भारी संख्या में गैर कांग्रेसी-नेताओ की घुसपैठ के साथ प्रवेश शुरू हो जाए, ये बात इसलिए लिखा जा रहा है, कि आज नगर पंचायत अध्यक्ष चुनाव के दौरान गैर कांग्रेसी-नेताओं के कांग्रेस-नेताओं के साथ गठजोड़ देखने को मिला,इसके अलावा पिछले कुछ दिनों से सत्ता का केंद्र-बिंदु बने कोटा नगर के एक धाकड़ दबंग टाइप नेता के डेहरी पर सत्ताधारी-दल के नेताओं का आवागमन चुनावी कसरत का ही हिस्सा दिखाई पड़ रहा है, जैसा कि पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के हवाले से ये खबर उड़ती हुई मीडिया के कानों तक पहुच रही है, कि कोटा नगर कांग्रेस में कांग्रेस का एक धड़ा को कमजोर करते हुए, दूसरा मजबूत धड़ा को करने की कोशिश की जा रही है, बिलासपुर-कांग्रेस के एक कद्दावर नेता के घर के दरवाजे से कांग्रेस प्रवेश की बात भी मीडिया सहित नगर में चर्चा का विषय है, हो भी सकता है-?राजनीति में दोस्त कब दुश्मन हो जाते हैं-?दुश्मन कब दोस्त हो जाए कुछ कहा नही जा सकता-?राजनीति और क्रिकेट में संभावनाएं बनी रहती है-?फिलहाल कोटा विधानसभा में तीन राजनीतिक दलों की सरकारें चलेगी-?कोटा विधानसभा के चारो निकायों में बीजेपी का परचम लहराया है-?कोटा विधानसभा का विधायक छजका का-?प्रदेश ने सत्ता कांग्रेस की इन तीनो दलों की सरकार में जनता के कितने काम होते हैं-?कितने कामों में रुकावटें सामने आती है-? ये तो कुछ समय बाद ही पता चलेगा, फिलहाल नगरीय-निकाय चुनावों के बाद त्रिस्तरीय-पंचायत चुनाव के परिणाम के बाद ही प्रदेश के सत्ताधारी-दल कांग्रेस की स्थिति के बारे में पता चल पाएगा-?की बचे हुए सालो में प्रदेश की भूपेश-बघेल की सरकार में नेतृत्व-परिवर्तन की संभावना बनती है-?या फिर प्रदेश के मुखिया के रूप में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अगले पांच सालों तक बने रहेंगे।

harit

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