August 13, 2020
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राज्य-जिला-निर्वाचन अधिकारी पर भारी,,,कोटा रिटर्निंग अधिकारी तहसीलदार प्रमोद गुप्ता,,,मीडिया से हुए दुर्व्यवहार मामले पर अब तक नहीं हुई कार्यवाही

राज्य-जिला-निर्वाचन अधिकारी पर भारी,,,कोटा रिटर्निंग अधिकारी तहसीलदार प्रमोद गुप्ता,,,मीडिया से हुए दुर्व्यवहार मामले पर अब तक नहीं हुई कार्यवाही

08-जनवरी को कोटा-प्रेस के पत्रकारों ने धरना-प्रदर्शन कर,,,,मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम कोटा को सौंपा था ज्ञापन।

*मीडिया के प्रदर्शन में कोटा-रतनपुर बार एसोसिएशन सहित,,,,अखिल-भारतीय-पत्रकार सुरक्षा-समिति के पदाधिकारी ने दिया था समर्थन।*

*सरपंच-पद की महिला-अभ्यर्थी ने निर्वाचन-कर्मियों के माध्यम से,,,,तहसीलदार पर 25000-रुपए मांगने का लगाया था,,,गंभीर आरोप।*

*01-हफ्ते के बाद भी तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के खिलाफ,,,कार्यवाही होने पर कोटा-प्रेस के पत्रकार जिला-स्तर पर मोर्चा खोलने हो रहे लामबंद।*

*दिनांक:-15-01-2020*

*सवांददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।*

*करगीरोड-कोटा:-त्रिस्तरीय-पंचायत चुनाव के लिए रिटर्निंग-अधिकारी बनाए गए कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के द्वारा कोटा-प्रेस के मीडिया-कर्मियों के द्वारा पंचायत चुनाव संबंधित सवाल पूछने से सवाल पर बवाल करने वाले कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के द्वारा मीडिया-कर्मियों से किए गए, बदसलूकी के बाद कोटा प्रेस के सभी पत्रकारों द्वारा कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था, तहसीलदार कोटा के तानाशाही रवैये के बाद घटना के दूसरे दिन 08 जनवरी को गिरते पानी मे तहसीलदार कोटा को तत्काल निलंबित की मांग करते हुए एसडीएम कार्यालय कोटा के सामने कोटा प्रेस के सभी पत्रकारों ने धरना प्रदर्शन किया था, धरना प्रदर्शन को कोटा रतनपुर बार एसोसिएशन ने भी समर्थन दिया था, साथ ही धरने में बिलासपुर से आए हुए पत्रकार संगठन अखिल-भारतीय-पत्रकार सुरक्षा-समिति के पदाधिकारियो ने भी धरने में शामिल होकर कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता को तत्काल निलंबित करने की मांग की गई थी।*

*गिरते पानी में कोटा प्रेस के पत्रकारों के द्वारा धरना प्रदर्शन के बाद एसडीएम कार्यालय कोटा को माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन भूपेश बघेल जी के नाम का ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमे की कोटा तहसीलदार पर त्वरित कार्रवाई की मांग की गई थी ज्ञापन की प्रतिलिपि राज्य निर्वाचन-अधिकारी सहित जिला-निर्वाचन अधिकारी के नाम भी भेजा गया था, साथ ही बिलासपुर महापौर के शपथ-ग्रहण समारोह में पहुंचे छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल जी को भी अखिल-भारतीय-पत्रकार सुरक्षा-समिति के पदाधिकारियों ने ज्ञापन सौंपा था, ज्ञापन सौंपने के एक हफ्ते के बाद भी राज्य-निर्वाचन अधिकारी या जिला-निर्वाचन अधिकारी के द्वारा अब तक वर्तमान रिटर्निंग-अधिकारी तहसीलदार कोटा प्रमोद गुप्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की कोई भी कार्यवाही अब तक नहीं की गई, जिसको लेकर कोटा प्रेस के पत्रकार आक्रोशित हो रहे है, तहसीलदार-कोटा के खिलाफ कार्यवाही को लेकर कोटा प्रेस के पत्रकारों सहित जिला-स्तर के पत्रकार-संगठन लामबंद हो रहे हैं,आने वाले दिनों में बिलासपुर-मुख्यालय में धरना प्रदर्शन की तैयारी की जाने की बात कही जा रही है कोटा प्रेस के पत्रकारों के द्वारा।*

*मीडिया-कर्मियो से की गई बदसलूकी पर तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के खिलाफ कार्यवाही में हो रही देरी से दबंग न्यूज़ लाइव के एडिटर इन चीफ संजीव शुक्ला ने कहा:–निर्वाचन कार्यो में लापरवाही सहित गंभीर शिकायतों के आरोप लगने के बाद भी जिला निर्वाचन-अधिकारी के द्वारा वर्तमान रिटर्निंग अधिकारी प्रमोद गुप्ता को हटाया नही जाना आश्चर्यजनक है, हाल ही में जशपुर और मुंगेली निर्वाचन अधिकारी के द्वारा निर्वाचन कार्यो में लापरवाही बरतने वाले तहसीलदार को चुनाव के दौरान ही निलंबित कर दिया गया, तो कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के खिलाफ कार्यवाही में देरी क्यो की जा रही है-? क्या कोटा ब्लॉक में प्रशासनिक-अधिकारियों का अकाल पड़ गया है,या फिर राज्य निर्वाचन-अधिकारी में या जिला-निर्वाचन-अधिकारी में वर्तमान रिटर्निंग-अधिकारी प्रमोद गुप्ता का कोई खौफ व्याप्त है।*

दबंग-न्यूज के स्टेट हेड आनंद अग्रवाल ने तहसीलदार कोटा मामले में कार्रवाई में हो रही देरी पर कहा कि 4-थे स्तंभ का काम ही सवाल पूछना होता है, सवालों का जवाब देने के बजाए मीडिया के ऊपर ही भड़कने वाले वर्तमान रिटर्निंग अधिकारी के ऊपर अब तक कार्रवाई नही होना और भी कई सवालों को जन्म दे रहा है क्या तहसीलदार कोटा प्रमोद गुप्ता को किसी सत्ताधारी दल के किसी बड़े नेता का आशीर्वाद प्राप्त है-? या फिर किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी का आशीर्वाद प्राप्त है-?कांग्रेस सरकार में नगर पंचायत चुनाव के दौरान कांग्रेस की महिला अभ्यर्थी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने महिला अभ्यर्थी को “ड़उकी” कहकर संबोधित करने वाले तहसीलदार कोटा के खिलाफ अब तक कोई कार्यवाही नहीं किया जाना काफी गंभीर है, तत्कालीन सरकार के जाने के बाद भी प्रशासनिक-अधिकारियों का रवैया नहीं बदल रहा है।*

दैनिक-भास्कर कोटा के प्रतिनिधि हरीश चौबे ने कहा कि मीडिया का काम ही सवाल पूछना है, सवाल का जवाब देने के बजाए मीडिया के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के खिलाफ जिला निर्वाचन अधिकारी के द्वारा अब तक कोई कार्यवाही नही किया जाना काफी गंभीर मामला है, जल्द ही कोटा प्रेस के पत्रकारों के साथ मिलकर बिलासपुर जिले सहित प्रदेश स्तर के पत्रकार संगठन के साथ आंदोलन किया जाएगा।*

कोटा नवभारत अखबार के प्रतिनिधि वरिष्ठ पत्रकार राकेश शर्मा:— ने कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के द्वारा कोटा के मीडिया कर्मी के खिलाफ अभद्र व्यवहार करने को लेकर हमला बोलते हुए कहा कि सवाल-पूछने का हक पत्रकारों को ही होता है,अगर सवालों से इतना भय और डर लगता है वर्तमान रिटर्निंग अधिकारी कोटा तहसीलदार को तो ऐसे जगह अपना ट्रांसफर करा लें जहा पर जनता से जुड़े सवाल पूछे नही जाते, या फिर पत्रकारों के सवालों से ज्यादा ही डर लगता है-?तो रिटायर-मेंट लेकर घर बैठे-?सवालो का जवाब देने वाले दूसरे नौकर साह को मौका दे जो कि जनता से जुड़े मीडिया के सवालो का जवाब देना जानता हो।*

कोटा कांग्रेस संगठन के ही कांग्रेस नेता प्रकाश जयसवाल ने कहा कि:– वर्तमान में कुछ प्रशासनिक अधिकारी अभी भी तत्कालीन सरकार के जाने का भरोसा नही कर पा रहे हैं, अभी भी उसी प्रकार का व्यवहार कर रहे हैं, वर्तमान रिटर्निंग अधिकारी कोटा तहसीलदार प्रमोद गुप्ता के प्रभार लेते ही गंभीर शिकायतें सामने आने लगी सबसे गंभीर बात नामांकन प्रक्रिया के दौरान नाम निर्देशन के अंतिम दिनों में यह बीच में गायब हो जाते हैं, और समय सीमा के बाद निर्वाचन कर्मियों के माध्यम से उम्मीदवारों से अवैध-उगाही करते हैं, यह क्या है, इससे पहले भी नगर पंचायत चुनाव के दौरान दावा आपत्ति के समय गायब हो गए थे,साथ ही कांग्रेस की महिला अभ्यर्थी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया था, अवैधानिक कृतियों में अगर आप शामिल रहोगे तो चौथा स्तंभ आप से सवाल पूछेगा ही नौकरशाह को जवाब देना पड़ेगा ही जनता के सेवक होते हैं, नौकरशाह शासक नहीं, मीडिया कर्मियों से अभद्र व्यवहार करने वाले वर्तमान रिटर्निंग अधिकारी तहसीलदार कोटा प्रमोद गुप्ता को राज्य निर्वाचन आयोग सहित जिला निर्वाचन अधिकारी को त्वरित संज्ञान लेते हुए तत्काल निलंबित कर देना चाहिए।

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