November 30, 2021
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विप्र महिला समिति ने मनाया आंवला नवमी का त्यौहार

विप्र महिला समिति ने मनाया आंवला नवमी का त्यौहार harit chhattisgarh vivek tiwari/sanjay tiwari

नगर की विप्र महिला समिति ने हनुमान कुञ्ज पथलगांव के गौशाला में आंवला पेड़ की पूजा अर्चना की और आंवला पेड़ के निचे ही भोजन ग्रहण किया

काठमांडू नेपाल से आए श्री दुर्गा महाराज ने सभी को आंवला नवमी त्यौहार की विशेषता एवम् मनाने का तरीका कथा सूना कर बताया
जिसमे मुख्य रूप से शारदा शर्मा,सीता शर्मा,मन्जू मिश्रा,गायत्री शर्मा,ममता शर्मा,मालती शर्मा,उर्मिला शर्मा,मीनू शर्मा,सविता मिश्रा,यामिनी शर्मा,सुधा तिवारी,वंदना शर्मा,कंचन तिवारी,नारायणी शर्मा एवम् अन्य महिलाए शामिल हुई
इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर ब्राह्मणों को खिलाना चाहिए इसके बाद स्वयं भोजन करना चाहिए। भोजन के समय पूर्व दिशा की ओर मुंह रखें। शास्त्रों में बताया गया है कि भोजन के समय थाली में आंवले का पत्ता गिरे तो यह बहुत ही शुभ होता है। थाली में आंवले का पत्ता गिरने से यह माना जाता है कि आने वाले साल में व्यक्ति की सेहत अच्छी रहेगी।
इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे बैठने और खाना खाने से कष्ट दूर हो जाते हैं। अक्षय नवमी का शास्त्रों में वही महत्व बताया गया है जो वैशाख मास की तृतीया का है। शास्त्रों के अनुसार अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य कभी समाप्त नहीं होता है। इस दिन जो भी शुभ कार्य जैसे दान, पूजा, भक्ति, सेवा किया जाता है उनका पुण्य कई-कई जन्म तक प्राप्त होता है।
आंवले के वृक्ष को विष्णु और शिव का प्रतीक चिन्ह मानकर मां लक्ष्मी ने आंवले की वृक्ष की पूजा की। पूजा से प्रसन्न होकर विष्णु और शिव प्रकट हुए। लक्ष्मी माता ने आंवले के वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर विष्णु और भगवान शिव को भोजन करवाया। इसके बाद स्वयं भोजन किया। जिस दिन यह घटना हुई थी उस दिन कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि थी। इसी समय से यह परंपरा चली आ रही है।

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