December 4, 2021
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जाने तुलसी विवाह- महत्व एवं मुहूर्त तुलसी विवाह आइये पहले जाने तुलसी हैं कौन-

जाने तुलसी विवाह- महत्व एवं मुहूर्त
तुलसी विवाह
आइये पहले जाने तुलसी हैं कौन-

हरितछत्तीसगढ़ संजय तिवारी पत्थलगांव

देवउठानी एकादशी के दिन जो लोग तुलसी विवाह कर रहे हैं वो इस दिन अवश्य ही व्रत करें। तुलसी विवाह के दौरान तुलसी के साथ विष्णु जी की मूर्ति भी उनके साथ अवश्य स्थापित करनी चाहिए। इसके बाद तुलसी के पौधे और विष्णु जी की मूर्ति को पीले वस्त्रों से सजाना चाहिए। इसके बाद तुलसी के गमले को गेरु से सजाएं। गमले के आस-पास शादी का मंडप बनाएं। इसके पश्चात गमले को वस्त्र से सजाएं और लाल चूड़ी पहनाएं और इसके बाद बिंदी आदि लगाकर श्रृंगार करें। इसके साथ टीका करने के लिए नारियल और दक्षिणा के रुप में तुलसी के आगे रखें। इसके बाद भगवान शालीग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसी के चारों ओर सात बार परिक्रमा करवाएं। इसके बाद आरती करें। विवाह इसके साथ ही संपन्न हो जाएगा। पौराणिक कथा के अनुसार,राक्षस कुल में एक कन्या का जन्म हुआ जिसका नाम वृंदा रखा गया जो कि भगवान विष्णु की परम भक्त थी।कालांतर में वृंदा का विवाह जालंधर नाम के राक्षस से कर दिया गया।जालंधर पत्नी वृंदा के पतिव्रत धर्म के प्रभाव से अत्यंत पराक्रमी हो गया था कोई भी जालंधर को पराजित नहीं कर पा रहा था जिसके कारण उसका आतंक दिनों दिन बढ़ता जा रहा था।देवता उसके पराक्रम से घबराकर भगवान विष्णु की शरण में गये,और इस परेशानी से मुक्ति की याचना की।

भगवान ने देवताओं के कष्ट को हरण करने हेतु,जालंधर जब युद्ध हेतु रण क्षेत्र में गया था, अपनी माया से जालंधर का रूप धारण किया और वृंदा के पतिव्रत धर्म को नष्ट कर दिया।जिसके कारण जालंधर युद्ध भूमि में मारा गया।जब वृंदा को भगवान विष्णु के छल का पता लगा तो उसने भगवान को पत्थर हो जाने का श्राप दिया।भगवान को पत्थर होते देख देवताओं में हाहाकार मच गया और सब माता लक्ष्मी के शरण में गए। माता लक्ष्मी ने वृंदा से प्रार्थना की,तब वृंदा ने अपना श्राप वापस ले लिया और अपने पति जालंधर के साथ सती हो गई,चिता की राख से एक पौधा निकला जिसे भगवान विष्णु ने ‘तुलसी’ का नाम दिया,और खुद को एक पत्थर के रूप में समाहित करते हुए कहा कि आज के बाद से बिना तुलसी के प्रसाद मैं स्वीकार नहीं करूँगा,और इस पत्थर को शालिग्राम का नाम दिया जो तुलसी के साथ पूजा जाएगा।कार्तिक महीने में इसी तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से किया जाता है।

इस वर्ष तुलसी विवाह कब सम्पन्न होगा ?

इस वर्ष तुलसी विवाह किस तारीख को सम्पन्न होगा इसके विषय में द्वंद की स्थिति बनी हुई है।
काशी में प्रचलित पंचांगों में दो तारीखों का उल्लेख है।परंपरानुसार हरि प्रबोधिनी एकादशी को हीं विवाह की शुभ नक्षत्र की प्राप्ति होने पर विवाह का कार्य पूर्ण कर लिया जाता है।
महावीर पंचाङ्ग वाराणसी के अनुसार एकादशी से पूर्णिमा के अंत तक शुभ नक्षत्र की प्राप्ति होने पर विवाह का कार्य उस दिन किया जा सकता है।
परंतु इस बार एकादशी जो कि 31 अक्तूबर 2017 को है विवाह का नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद रात्रि में 05:29 के उपरांत प्राप्त हो रहा है।
शास्त्र के एक निर्णय “एकादश्याम द्वादश्याम वा षोडशोपचारै: विष्णु तुलसी: च विधिवत्संपूज्य” के अनुसार एकादशी या द्वादशी को विष्णु और तुलसी की विधिवत पूजा की जानी चाहिये।
दिनाँक 31 अक्तूबर गत 1 नवम्बर को विवाह नक्षत्र उत्तराभाद्रपद के शेष रात्रि 05:29 से प्राप्त होने के कारण तुलसी विवाह
दिनाँक 1 नवम्बर को करना श्रेयष्कर रहेगा। यह तुलसी विवाह सुहागन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति कराता है।

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