December 4, 2021
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आज है देव दीपावली,आज का गुडलक,देवता मनाएंगे देव दिवाली, जानिए क्या है इसका रहस्य

आज है देव दीपावली,आज का गुडलक,देवता मनाएंगे देव दिवाली, जानिए क्या है इसका रहस्य
देव दीपावली 2017: आपको बता दें कि यह पर्व दीपावली के 15 दिनों के बाद मनाया जाता है. ऐसा माना गया है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव और देवता दीपावली मनाते हैं और इस दिन सभी देवी और देवता काशी जाते हैं. ऐसे में यह पर्व उत्तर प्रदेश के लिए काफी अहम हो जाता है.
देव दिवाली का त्योहार कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन यानी दिवाली से ठीक 15 दिन बाद मनाया जाता है। वैसे तो देश में हर त्योहार सभी जगहों पर मनाया जाता है लेकिन देव दिवाली विशेषतौर पर वाराणसी में मनाई जाती है। इस साल यह 3 नवंबर को मनाई जा रही है।

देव दिवाली पर श्रद्धालु काशी के संत रविदास घाट से लेकर राजघाट तक लाखों दिए जलाते हैं साथ ही माता गंगा की पूजा की जाती है। इस त्योहार को मनाने के पीछे कई तरह की कथाएं प्रचलित हैं।

क्यों मनाते हैं देव दिवाली

मान्यताओं के अनुसार इस दिन सभी देव धरती पर आकर गंगा मैया की पूजा करते हैं इसलिए इसे देव दिवाली भी कहा जाता है। वहीं इसके लिए एक अन्य कथा हैं जिसके अनुसार स्वयं भगवान शिव ने देवताओं का संकट दूर करने के लिए त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था।

भगवान शिव ने जब राक्षस का संहार किया तो सभी देवताओं ने इस बात की खुशी जाहिर की और दीपोत्सव मनाया बस तभी से देव दिवाली हर साल मनाई जाती है। आज शुक्रवार दी॰ 03.11.17 चौमासी चौदस व कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा के उपलक्ष्य में देव दीपावली पर्व मनाया जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर सभी को उत्पीड़ित करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, जिसके उल्लास में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे देव दीपावली के रूप में मान्यता मिली। इसी तिथि को भगवान शंकर ने अपने हाथों बसाई काशी के अहंकारी राजा दिवोदास के अहंकार को नष्ट कर दिया। यह पर्व ऋतुओं में श्रेष्ठ शरद, मासों में श्रेष्ठ कार्तिक व तिथियों में श्रेष्ठ पूर्णमासी के दिन मनाया जाता है, इसे देवताओं का भी दिन माना जाता है। इस माह की पवित्रता इस बात से भी है कि इसी माह में ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्वों को प्रमाणित किया है। इस माह किए हुए स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का अनन्त फल है। इस पर्व को कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर काशी के घाटों पर दीप जलाकर मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवताओं का पृथ्वी पर आगमन होता है। देव दीपावली के विशेष पूजन व उपायों से व्यक्ति का भाग्य उज्ज्वल होता है, संकट समाप्त होते हैं तथा जीवन में खुशहाली आती है।

पूजन विधि: शिवालय जाकर विधिवत षोडशोपचार पूजन करें। गौघृत का दीप करें, चंदन की धूप करें, गुलाब के फूल चढ़ाएं, चंदन से शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाएं, अबीर चढ़ाएं, खीर पूड़ी व बर्फी का भोग लगाएं तथा इस विशेष मंत्र से 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।

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