August 5, 2021
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नौ दिनों के बाद सामने आया सीडी कांड का सूत्रधार प्रकाश बजाज

रायपुर । सीडी कांड के अहम सूत्रधार प्रकाश बजाज भी रविवार को सामने आए। इनको प्रदेश भाजपा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक का नजदीकी माना जाता है। नौ दिन बाद सामने आए बजाज ने पुलिस के सवालों का गोलमोल ही जवाब दिया है। इसने मामले की पेंचीदगी को और भी बढ़ा दिया है।
उनके बयान से ऐसा लग रहा है कि उनके पास जो फोन आए थे, वे किसी नेता विशेष को लेकर नहीं थे। बजाज ने कहा-मुझे यह नहीं मालूम कि ब्लैकमेलर किस आका के बारे में बोल रहे थे। ब्लैकमेलर ने मुझे फोन कर कहा था तुम्हारे आका बदनाम हो जाएंगे।
मैं पुलिस को सब बता चुका, अब जो कहूंगा अदालत के सामने कहूंगा। धरमलाल कौशिक का करीबी होने के कारण बजाज के गायब होने को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी थीं। पिछले दो दिनों से राजनीतिक हलकों में एक और सीडी के जारी होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इस कारण बजाज से यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि वास्तव में सीडी को लेकर क्या-क्या चल रहा है।
दरअसल रायपुर पुलिस ने बजाज की रिपोर्ट को ही आधार बनाकर पत्रकार विनोद वर्मा को उनके गाजियाबाद स्थित निवास से गिरफ्तार किया है। बजाज के अचानक गायब होने के बाद कई अटकलें लग रही थीं।
00 नौ दिनों तक नदारद रहने वाले प्रकाश का इकबालिया बयान:
प्रकाश बजाज ने पुलिस को बताया कि 3 दिन रिश्तेदार के यहां रहा सुबह ही निकल जाता था। 10-12 दिन पहले मेरे लैंड लाइन पर फ ोन आया। कॉल करने वाले ने मेरा नाम पूछा, मैंने जैसे ही नाम बताया उसने कहा- मेरे पास तुम्हारे आका की सेक्स सीडी है। उन्हें बचाना चाहते हो तो पैसे लेकर दिल्ली आ जाओ। इतना बोलकर उसने फोन डिस्कनेक्ट कर दिया। मुझे लगा किसी ने मजाक किया है, मैं दूसरे कामों में व्यस्त हो गया। 26 अक्टूबर की सुबह लैंड लाइन पर फिर फोन आया। इस बार भी कॉल करने वाले ने मुझसे कहा- आका को बचाना चाहते हो तो दिल्ली आकर मिलो और पैसे दो, इतना कहने के बाद फिर कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया। लेकिन इस बार आए फ ोन ने मुझे बेचैन कर दिया, मैं सीधा थाने गया और रिपोर्ट दर्ज कराई।
अगले दिन सुबह जब मैं सो रहा था अचानक फोन की घंटी बजी, मेरी नींद उसी से खुली। मोबाइल पर भी लगातार कॉल आ रहे थे। मैंने फोन रिसीव किया, तब पता चला कि दिल्ली में पुलिस ने किसी पत्रकार को गिरफ्तार किया है। पहले तो मुझे कुछ समझ नहीं आया।
00 लगातार आ रहे फोन कॉल्स से आ गए दहशत में :
मैंने संगठन और पार्टी के कुछ साथियों से फ ोन पर बात की, पता चला मेरी ही रिपोर्ट पर गिरफ्तारी की गई है। मुझे इतने फोन आ रहे थे कि मैं घबरा गया। दोपहर तक स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मेरे घर वाले भी दहशत में आ गए। उनकी हालत देखकर मैंने अपना मोबाइल बंद किया और रिश्तेदार के घर चला गया। 3 दिन वहां रहने के बाद घर तो आ गया था, लेकिन सुबह ही बाहर चला जाता था। रात होने पर ही घर लौटता था। मैंने जब रिपोर्ट दर्ज कराई तब मुझे अंदेशा नहीं था कि मामला इतना बढ़ जाएगा। दिल्ली से जब सीडी जब्त हुई तब मुझे अहसास हुआ कि ये कितनी बड़ी बात है।Óउन्होंने पुलिस को ये नहीं बताया कि उन्होंने इन नौ दिनों में एक भी दिन अखबार या फिर दूरदर्शन पर समाचार नहीं देखा था?

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