August 5, 2021
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स्वच्छता अभियान का खिल्ली उडा रहा तहसील कार्यालय डभरा *तहसील कार्यालय डभरा मे सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नही

स्वच्छता अभियान का खिल्ली उडा रहा तहसील कार्यालय डभरा

*तहसील कार्यालय डभरा मे सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नही
डभरा*– तहसील कार्यालय डभरा में सार्वजनिक शौचालय नहीं होने के कारण यहां आने जाने वाले लोगों को खुले में शौच करना मजबूरी बन गया है ,जहां पूरे देश में स्वच्छता अभियान के लिए आम नागरिकों को प्रेरित किया जा रहा है वहीं तहसील कार्यालय जहां पांच बड़े कार्यालय एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, उप पंजीयक कार्यालय, उप कोषालय ,एवं व्यवहार न्यायालय संचालित है शौचालय नहीं बना है नहीं यहां आने वाले पक्षकारों के लिए पानी पीने की व्यवस्था है ,इस कार्यालय के बड़े अधिकारी गांव में जा जा कर लोगों को खुले में शौच करने से मना करते हैं ,तथा इन्हीं के कार्यालय में सार्वजनिक शौचालय का अभाव है डभरा तहसील क्षेत्र में तीन बडे पावर प्लांट संचालित हैं फिर भी यहां पर सी०एस०आर०का एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा रहा है , जिले में ले जाकर खर्च किया जा रहा है, डभरा तहसील भवन सालों से उपहास झेल रहा है, यहां आने वाले लोगों को पानी पीने के लिए भी किसी होटल या दुकान में से मांग कर पीना पड़ता है गंदगी का आलम इस तरह है कि आप तहसील कार्यालय के अंदर जाकर देखें तो कचरे का ढेर बना रहता है, इस संबंध में यहां के अधिकारियों द्वारा कई बार मौखिक रुप से जिला कलेक्टर महोदय को सूचना दी गई है परंतु आज दिनांक तक यहां सार्वजनिक शौचालय निर्माण नहीं हो सका, सोचने वाली बात यह है कि जहां एक ओर पूरा डभरा ब्लॉक खुले में शौच मुक्त होने जा रहा है वही जहां हजारों लोगों का प्रतिदिन आना जाना है वही सार्वजनिक शौचालय नहीं बन पाया हैं, यहां के अधिकारी आए दिन स्वच्छता अभियान पखवाड़े के तहत साफ सफाई कर अपनी उपस्थिति दर्ज करते रहते हैं इस तरह 1 दिन सफाई कर देने से स्वच्छता अभियान पूरा नहीं हो जाता जब तक यहां पीने की पानी एवं सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था नहीं हो जाती है स्वच्छता अभियान सफल नहीं हो पाएगा, डभरा तहसील कार्यालय में लगभग प्रतिदिन एक से दो हजार लोगों का आना जाना लगा रहता है, अगर देखा जाए तो डभरा का बाजार यही तहसील कार्यालय में आने वाले लोगों के ऊपर निर्धारित है ,आज इस तहसील कार्यालय के चलते कई लोगों को रोजगार मिला हुआ है, इसके बावजूद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है और यहां आने वाले लोग खुले में शौच करने पर मजबूर हैं, पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारी इस भवन को हमेशा नजरअंदाज करते आ रहे हैं इस भवन की हालत उस विधवा औरत जैसी हो गई है जिसका पति पहले ही भ्रष्टाचार कि भेंट चढ गए हो और बेटो ने रोटी कपडा देना बन्द कर दिया हो ,तहसील कार्यालय भवन धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होते जा रहा है मरम्मत के नाम पर संबंधित विभाग के अधिकारी बस खानापूर्ति करते नजर आते हैं आज तक डभरा तहसील में ऐसा कोई अधिकारी नहीं आया जिन्होंने इस भवन की मूलभूत सुविधाओं पर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया होगा ,इतने बड़े कार्यालय में मूलभूत सुविधाओं का ना होना शासन की व्यवस्था की पोल खोलता है, यहां आए लोगों के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं रखी गई है, जो व्यवस्था बनाई गई थी वहां हमारे वकील साहब लोग कब्जा जमाए बैठे हैं, जो वकील साहब लोगों को बार रूम आवंटित की गई है वहां वकिल साहब लोग ताला लगाकर जनता के बैठने की जगह पर अपना दुकानदारी चला रहे हैं ,आज के समय में हर शासकीय भवन में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं परंतु डभरा तहसील कार्यालय में मूलभूत सुविधाएं सालों से नहीं है यहां कार्यरत अधिकारी इस संबंध में कोई बात करने को तैयार नहीं रहते पूछे जाने पर बताया जाता है कि हमने उच्च अधिकारियों को इन कमियों की सूचना दे दी है परंतु आज दिनांक तक न यहां पानी पीने की भी व्यवस्था नही की गई और ना ही सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था की गी है , क्या यही है शासन का स्वच्छता अभियान, डभरा तहसील कार्यालय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छता अभियान को ठेंगा दिखाता हुआ आज उसी स्थिति में पड़ा हुआ है।

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