July 13, 2020
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जलकुंभी से प्रदूषित बंधवा-तालाब की साफ-सफाई सहित,,,,गहरीकरण को 05-जून विश्व-पर्यावरण-दिवस पर एक वर्ष पूर्ण होने जा रहा हैं।

जलकुंभी से प्रदूषित बंधवा-तालाब की साफ-सफाई सहित,,,,गहरीकरण को 05-जून विश्व-पर्यावरण-दिवस पर एक वर्ष पूर्ण होने जा रहा हैं।

पिछले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण-दिवस पर बंधवा तालाब की साफ-सफाई और गहरीकरण के लिए एक जन आंदोलन चलाया गया था।

अल्पसमय के लिए कोटा एसडीएम रहे डॉ.आशुतोष चतुर्वेदी ने जल-संरक्षण के लिए,,आमजनों के सहयोग से अभियान की शुरुआत की थी।

बंधवा-तालाब में पूरे साल रहा पानी,,,इस बार कोटा नगर के 15 वार्डों में पानी की कोई किल्लत नहीं हुई,,,वाटर लेबल भी बना रहा।

कोरोना-वायरस के चलते इस बार जल-संरक्षण के लिए तालाबों के गहरीकरण और साफ-सफाई अभियान धीमी पड़ी।

दिनांक:-05/06/2020

संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।
संवाददाता:-मोहम्मद जावेद खान करगी रोड कोटा हरित छत्तीसगढ़।

करगीरोड-कोटा:-2020 के नए वर्ष के शुरुआती साल में पूरे विश्व मे कोविड-19 के बढ़ते प्रभाव के साथ भारत देश मे कोरोनो-वायरस के पैर-पसारने के बाद से मार्च के महीने में शुरू हुए लॉकडाउन के बीच कोटा नगर सहित नगर पंचायत कोटा का पूरा 15 वार्ड पिछले वर्ष के गर्मी माह के अप्रेल-मई की अपेक्षा इस वर्ष के अप्रेल-मई में वार्ड-वासियों को होने वाली पानी की किल्लत, पानी के लिए हाहाकार, पानी के टैंकर, मोटर जलने जैसी खबरों के बगैर गुजर गया, कोटा नगर पंचायत के पूरे 15-वार्डो के वार्डवासियों, वार्डो के जनप्रतिनिधि, नगर में मौजूद विभिन्न राजनीतिक दलों व उनके नेताओं के बगैर हो-हल्ला के बीच गुजर गया, जून महीने की शुरूवात भी हवा तूफान बारिश के साथ हो गई ये चमत्कार हुआ तो हुआ कैसे।*

इस पूरी खबर की गहराइयों में जाने के जरूरत थी, इसके लिए कोटा नगर पंचायत के पूरे 15 वार्डो में वार्ड-वासियों की प्यास बुझाने वाले, जल-विभाग का पूरा दारोमदार जिनके कंधो पर पूरे साल रहता है, खासकर भीषण गर्मी के समय, मोटर जलने से लेकर, पानी के टैंकर पहुचाने से लेकर, नलों के रिपेयरिंग, तक मे अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगर पंचायत कोटा के कर्मचारी, जिन्हें कोटा नगर के आमजन सहित जनप्रतिनिधि भी जल-मंत्री के नाम से संबोधित करते हैं, उनसे जब इस बारे में “हरित छत्तीशगढ़” ने अप्रेल-मई में होनी वाली पानी की किल्लत के बारे में जानकरी ली गई तो जानकारी काफी-चौकाने वाले थी, वर्तमान नगर पंचायत के पूरे 15 वार्डो में लगभग 66 पंप हाउस है, पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार कोई नया बोर कोटा नगर पंचायत के किसी भी वार्डो में नही किया गया वर्तमान में पानी का लेबल भी लगभग 70 से 80 फीट बताया जा रहा है, इस बार मीडिया में किसी भी वार्ड से पानी को लेकर हाहाकार की कोई खबर या शिकायत नही, ऐसा तो नही की ये चमत्कार नई परिषद के बैठने के बाद हुआ है, फिर सवाल ये भी आता है कि वर्तमान परिषद में तो कुछ ही चेहरे बदले है, कुछ पुराने चेहरों की एक बार पुनः वापसी हुई है, प्रदेश में सरकार जरूर बदली है, पर नगर पंचायत कोटा में जो पिछले पंचवर्षीय में जो राजनीतिक-दल सत्ता में थी वो वर्तमान में भी है, केवल नेतृत्व बदला है, चेहरा बदला है, नगर पंचायत कार्यालय का रंग बदला है, फर्नीचर बदले गए है, वर्तमान नए नेतृत्व के द्वारा व्यवस्था बदलने का प्रयास जरूर किया जा रहा है पर इस बार पिछले वर्ष की तुलना में अप्रेल-मई के महीने में पानी को लेकर किसी भी प्रकार की कोई भी विकट-परिस्थिति निर्मित नही हुई।

अंततः”हरित-छत्तीसगढ़” कलमकार के द्वारा इस पूरी कहानी के फ्लेशबैक याने की 05-जून-2019 अंतराष्ट्रीय विश्व-पर्यावरण-दिवस पर जाते हुए उस प्रशासनिक-अधिकारी के नेतृत्व को याद किया, जिसने पिछले वर्ष अंतर्राष्ट्रीय-पर्यावरण-दिवस के अवसर पर जल-संरक्षण के लिए पिछले कई वर्षों से जलकुंभी से प्रदूषित वार्ड क्रमांक 8 में बंधवा-तालाब को साफ करने का बीड़ा उठाया, ऐसा नही था कि इस प्रदूषित तालाब के बारे में इसके पूर्व किसी जनप्रतिनिधि या फिर प्रशासनिक-अधिकारी को जानकारी नहीं थी,जानकारी थी, पर कहीं ना कहीं नीति-नीयत और क्षमता की कमी थी, पर इस प्रशासनिक-अधिकारी के द्वारा अपनी प्रशासनिक-नेतृत्व-क्षमता का उपयोग करते हुए, कोटा नगर के आमजनों, बुद्धिजीवी, गणमान्य-नागरिकों, विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों को एक सूत्र में जोड़कर, एक जन-आंदोलन का रूप दिया, अपनी प्रशासनिक-क्षमता का उपयोग करते हुए, कोटा ब्लॉक में थोड़े ही समय के लिए पदस्थ रहे युवा-तेजतर्रार एसडीएम डॉ.आशुतोष चतुर्वेदी के द्वारा कोटा-नगर के आमजनों सहित सभी-वर्गों के सहयोग से जलकुंभी से पटी हुई वर्षों से प्रदूषित बंधवा-तालाब को पुनर्जीवित किया, तालाब की साफ-सफाई व तालाब के गहरीकरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका-निभाई जिसके वजह से आज बंधवा-तालाब में पूरे साल पानी रहा, साथ ही उसके बगल में एक और तालाब जिसे अंधरी-तलाब भी कहा जाता है, पूरे साल पानी रहा और वर्तमान में भी पानी भरा हुआ है, जहां वार्ड-वासियों के निस्तारी के अलावा जल-संरक्षण के कारण पूरे कोटा नगर के वार्डों में कहीं ना कहीं अप्रैल-मई माह के महीने में पानी के लेबल बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाई है, जिस कारण से कोटा नगर के वार्डों में अधिकतर पंप-हाउस के बोर में पानी का लेवल बना हुआ है, किसी भी पंप-हाउस के बोर में पानी का लेबल नीचे जाने की किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त नहीं हुई है, वह अलग बात है, की आंधी तूफान-बिजली गरजने की वजह से मोटर जरूर जले हैं, पर वाटर-लेबल में कोई कमी नहीं आई है, उसके अलावा बंधवा-तालाब के गहरीकरण के बाद तालाब के चारों तरफ पेड़-पौधे भी लगाए गए, जो कि वर्तमान में तालाब के किनारे-किनारे आकार ले चुका है,

डा आशीष चतुर्वेदी

पर्यावरण प्रेमी रहे डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी वर्तमान में साजा-बेमेतरा में एसडीएम के पद पर पदस्थ हैं, जनता से जुड़ाव आज भी उनकी पहली प्राथमिकता में है, थोड़े समय के लिए ही कोटा एसडीएम रहे डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी आज भी गाहे-बगाहे बंधवा-तालाब की जानकारी लेते रहते हैं, बिलासपुर में निवास स्थान होने के कारण जब कभी भी डॉ.चतुर्वेदी का बिलासपुर आना होता है, तो समय निकालकर अक्सर कोटा के इस बंधवा-तालाब को देखने जरूर आते हैं, अल्प-समय के लिए ही कोटा एसडीएम के पद पर रहने वाले डॉ.आशुतोष चतुर्वेदी का आज भी कोटा नगर से व नगर के लोगो से काफी भावनात्मक लगाव है।

शुक्रवार 05 जून 2020 को अंतरराष्ट्रीय-पर्यावरण-दिवस पर जल संरक्षण के लिए कोटा नगर के आमजनों के सहयोग से एक प्रशासनिक-अधिकारी के नेतृत्व में बंधवा-तालाब की सफाई और गहरीकरण को पूरे 1 साल हो जाएंगे, कोरोना-वायरस के बीच चल रहे लॉकडाउन में अप्रैल-मई के महीनों में इस बार कोटा नगर में पानी के लिए हाहाकार, पानी की किल्लत नहीं होना कहीं ना कहीं जल-संरक्षण के लिए तालाबों के गहरीकरण के लिए उठाए गए, सराहनीय कदम का ही असर था, जो कि इस बार मार्च-अप्रैल-मई के महीनों में पानी को लेकर कोई किल्लत नही हुई,

आनन्द रूप तिवारी एसडीएम कोटा

वर्तमान कोटा एसडीएम आनंद रूप तिवारी से जब इस बारे में चर्चा की गई तो, उन्होंने बताया कि जल-सरंक्षण की दिशा ने नगर से लेकर ग्रामीण तक जो भी तालाब हैं, उन तालाबों की भी साफ-सफाई के साथ गहरीकरण का काम किया जाना था, जिससे बारिश का पानी-तालाबों में पूरा साल भरे रहे, जिससे पानी का लेवल भी बना रहे, कोटा नगर सहित आसपास के इलाकों में भी वाटर लेबल बना रहे, साथ ही गर्मी के महीनों में आमजनो को पानी की किल्लत ना हो, पर वर्तमान में कोरोना-वायरस के बढ़ते हुए प्रभाव, प्रवासी-मजदूरों की वापसी के बाद कोविड-19 के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इस कारण से वर्तमान प्रशासनिक-अधिकारी इन्हीं कार्यों में उलझे रहने के कारण जल-संरक्षण के कार्यों में समय नहीं दे पाए, पर अगर आने-वाले महीने में कोविड-19 के मामले अगर कम हुए तो जल-संरक्षण के लिए वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से भी जरूरी कदम उठाए जाने की बात जरूर कही।*

वर्तमान नगर पंचायत अध्यक्ष अमृता प्रदीप कौशिक से जल संरक्षण की दिशा में इस वर्ष तालाबों की साफ-सफाई व गहरीकरण के संबंध में बात किए जाने के बाद उन्होंने भी बताया कि कोटसागर-तालाब अमृत सागर कॉलोनी, सहित कुछ और तालाबों में लाकडाउन के दौरान पूरा तालाब-पत्तों से पटा हुआ हैं हाल ही में कुछ लोगों को तालाबों की सफाई के लिए लगाया गया है, ताकि आमजनों के निस्तारी के लिए परेशानी ना हो वर्तमान कोरोनो-वायरस के चलते लाकडाउन लगातार बढ़ता जा रहा है, नहीं तो पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी तालाबों में जल-संरक्षण के लिए तालाबों के गहरीकरण का कार्ययोजना बनाई गई थी, वर्तमान लॉकडाउन के बीच कोटा नगर के पूरे 15 वार्डों में पानी के लिए किसी भी प्रकार की किल्लत नहीं हुई, जिसका कहीं ना कहीं तालाबों में जल संरक्षण होने से नगर के 15 वार्डों के मोटर-पंपों में पानी का लेवल बना रहा, पानी के बोर नही सूखे ना ही इस बार कोई नया बोर कराया गया, इसमें कहीं ना कहीं पिछले वर्ष जो जल-संरक्षण के लिए तालाबों की साफ-सफाई और गहरीकरण का कार्य किया गया था, जिसके कारण इस बार कोटा नगर में वार्ड वासियों को पानी की कोई भी किल्लत नहीं हुई।*

 

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