August 3, 2021
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ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल बना सकता है बहरा

डॉक्टरों का कहना है कि ईयरफोन का लगातार यूज करने से सुनने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। इससे सुनने की क्षमता 40 से 50 डेसिबेल तक कम हो जाती है। इसीलिए ज्यादा तेज आवाज में गाना नहीं सुनना चाहिए। इससे आपके कान के पर्दे में कंपन होता है, जिसके कारण धीरे-धीरे आपको दूर की आवाजें सुनाई देना बंद हो जाती है। आपको बहरापन भी हो सकता है।तेज आवाज में ईयरफोन या हेडफोन से गाने सुनने की आपकी आदत न केवल सुनने की क्षमता कम कर सकती है, बल्कि यह दुर्घटना की भी वजह बन जाती है। आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, जिसमें ईयरफोन लगाए टीनेजर्स ऐक्सीडेंट का शिकार हो जाते हैं।डॉक्टर का कहना है कि 60:60 फॉर्म्युला यूज करने की आदत डालें। अगर म्यूजिक सुनते हैं तो साउंड लेवल को 60 पर्सेंट से ज्यादा नहीं करें और पूरे दिन-रात में 60 मिनट से ज्यादा ईयरफोन का इस्तेमाल नहीं करें। इसलिए जहां तक संभव हो, ईयरफोन कम वॉल्यूम में सुनें, आवाज को 60 पर्सेंट से कम रखें। चाइनीज या लोकल मोबाइल हो, तो 40-50 पर्सेंट के बीच ही साउंड लेवल रखना चाहिए।20-35 वर्ष के युवाओं में ईयरफोन का उपयोग करने की आदत बढ़ती जा रही है। कई बार एक कान से सुनना कम हो जाता है। जानकारी के अभाव में शुरुआती दौर में तेज आवाज से उपजी बीमारी को पहचान नहीं पाते। तब दोनों कान से सुनना कम हो जाता है या कान में सीटी की आवाज सुनाई देने लगती है। ऐसी स्थिति हो तो तुरंत अस्पताल जाकर इलाज कराएं वरना सुनना बंद हो सकता है।डॉक्टर का कहना है कि अक्सर रात में कान में हेडफोन लगाकर गाना सुनते-सुनते लोग सो जाते हैं। यह बेहद खतरनाक हो सकता है, क्योंकि लंबे समय तक कानों को डिस्टर्बेंस होती है। इसके अलावा अगर घर से बाहर हैं या सड़क के किनारे चल रहे हैं तो हाई साउंड लेवल की वजह से बाहर की आवाज अंदर नहीं आती है और पीछे से आ रही गाड़ी के शिकार हो जाते हैं। चाहे ट्रेन की आवाज हो या फिर बस या ट्रक की,100 डेसिबेल के बाद बाहर की आवाज कान के अंदर नहीं पहुंच पाती है। 85 डेसिबेल से ज्यादा की आवाज नुकसानदायक है।

खबर सूत्र नवभारत टाइम्स

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