July 25, 2021
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पेंशनरों ने की सातवें वेतनमान के अनुरूप पेंशन व महंगाई भत्ते की मांग को लेकर पेंशनर 17 नवंबर को बुढ़ा तालाब मे धरना देंगे

पेंशनरों ने की सातवें वेतनमान के अनुरूप पेंशन व महंगाई भत्ते की मांग को लेकर पेंशनर 17 नवंबर को बुढ़ा तालाब मे धरना देंगे

हरित छत्तीसगढ़ रायपुर। पेंशनरों ने सातवें वेतन के अनुरूप परिवार पेंशन स्वीकृत किए जाने की मांग को लेकर 17 नवंबर को बुढ़ा तालाब मे धरना देने का निर्णय लिया है। पेंशनरों का कहना है कि राज्य निर्माण के बाद से मध्यप्रदेश के साथ पेंशनरों के आर्थिक स्वत्वों का बंटवारा नहीं होने के कारण पेंशनरों को सातवां वेतनमान व महंगाई भत्ता का लाभ नहीं मिल पा रहा है। छत्तीसगढ़ संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष चेतन भारती ने बताया कि केंद्र और कई राज्य सरकारों ने सातवें वेतनमान के अनुरूप अपने पेंशनरों को पेंशन स्वीकृत कर भुगतान भी प्रारंभ कर दिया है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार ने सातवें वेतनमान दिए जाने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन पेंशनरों को पेंशन व परिवार पेंशन, मंहगाई राहत 1 जनवरी 2016 से दिए जाने के संबंध में कोई घोषणा नहीं की है। छत्तीसगढ़ सरकार और मध्य प्रदेश सरकार ने 1 जनवरी, 2016 से सातवां वेतनमान और 1 जनवरी, 2017 से 2 प्रतिशत महंगाई भत्ता देने का मामला अब तक मामला अधर में लटका है। पेंशनरों का कहना है कि छत्तीसगढ़ अलग राज्य बने 17 साल बीत गया है परंतु पेश्ंनरों के मामले मे आज भी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एक दुसरे पर आश्रित है। विदीत हो कि पेंशनरों के आर्थिक स्वत्वों के मामले में 74 प्रतिशत राशि का भुगतान मध्यप्रदेश और 26 प्रतिशत राशि छत्तीसगढ़ सरकार को वहन करना पड़ता है। दोनों सरकारों के बीच पेंशनर्स पिस रहे हैं।उन्होने बताया कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार ने सातवें वेतनमान दिए जाने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन पेंशनरों को पेंशन व परिवार पेंशन, मंहगाई राहत 1 जनवरी 2016 से दिए जाने के संबंध में कोई घोषणा नहीं की है। इस संबध मे पेंशनरों ने बताया कि उनके द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री डा रमन सिंग से भी निवेदन किया गया है पंरतु उनकी मांग पर कोई पहल नही किए जाने से पेशनरों मे आक्रोश का माहौल व्याप्त है। अब पेंशनरों द्वारा धरना प्रर्दशन का रास्ता अख्तियार करने के अलाव कोई रास्ता नही बचा है 17 नवबंर को रायपुर बुढ़ा तालाब मे धरना पर्दशन के बावजुद भी यदि सरकार ने उनकी अनसुनी की तो फिर पुरे प्रदेश के नब्बे हजार पेंशनर आने वाले चुनाव मे सरकार के खिलाफ अपने मतदान का उपयोग कर सरकार के खिलाफ प्रचार करने से भी नही चुकेंगे। पेंशनरों ने कहा कि उनकी मांगों पर कोई भी दल विचार नही कर रहा है  भाजपा सत्ते के मद चुर होकर अनसुनी कर रहा है वहीं विपक्षी दलों ने भी अभी तक उनकी सुध नही ली है। बहरहाल पुरा जीवन देश व समाज की सेवा कर अब अपने हक के लिए धरने पर बैठने जा रहे इन बुजुर्गों के प्रति छग हो या फिर एमपी सरकार या फिर विपक्षी दल किसी का भी रवैया संवेदनशील नजर नहीं आता. उनके प्रति उपेक्षा का यह भाव संवेदना को उद्वेलित करने वाला है।

 

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