August 13, 2020
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अदाणी फाउंडेशन द्वारा श्रीविधि का प्रशिक्षण प्राप्त कर किसानों ने शुरू की 800 एकड़ जमीन पर धान की रोपाई

अदाणी फाउंडेशन द्वारा श्रीविधि का प्रशिक्षण प्राप्त कर किसानों ने शुरू की 800 एकड़ जमीन पर धान की रोपाई

अंबिकापुर । अदाणी फाउंडेशन तथा मब्स के सहयोग से परसा गांव के 200 से अधिक किसानों ने श्रीविधि का प्रशिक्षण लेकर करीब 300 एकड़ भूमि पर धान की रोपाई का कार्य शुरू कर दिया है जबकि आसपास के 11 ग्रामों में करीब 300 किसानों ने श्री विधि का प्रशिक्षण प्राप्त कर 500 एकड़ खेत में श्री विधि से धान की रोपाई किया। श्रीविधि का प्रशिक्षण प्राप्त करके, किसानों को कम पानी की खपत कर, धान की बेहतर पैदावार करने में मदद मिलेगी। बता दें कि धान का कटोरा कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के परसा स्थित पीईकेबी माइंस के समीप आने वाले 12 गांवों की कुल 800 एकड़ जमीन पर स्थानीय किसानों द्वारा जीराफूल तथा धान की अन्य किस्मों की रोपाई का कार्य, अदाणी फाउंडेशन तथा महिला सहकारी समिति (मब्स) के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। धान की खेती में SRI विधि का उपयोग करते हुए किसान खाद, पानी, बीज और मजदूरी में लगने वाली लागत को कम कर पाने में सक्षम होंगे।

SRI विधि का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे किसानों को भी इस वर्ष अपनी फसल से काफी उम्मीद हैं। साथ ही उन्हें आर्थिक रूप से भी काफी राहत मिल रही है। इसके अलावा किसान SRI विधि के जरिए फसल में रोग या कीट लगने के खतरे को भी कम कर पा रहे हैं। परसा के पूर्व उपसरपंच श्री उमाशंकर यादव ने अदाणी फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसान भाइयों के लिए अदाणी फाउंडेशन का सहयोग और मार्गदर्शन बेहद सराहनीय है। मब्स के सहयोग से जारी जैविक कृषि अभियान से किसानों तथा उपभोक्ताओं को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। परसा ग्राम के एक अन्य जिज्ञासु किसान श्री दिनेश यादव ने भी इस विधिवत खेती के तरीके को लेकर ख़ुशी व्यक्त की। उन्होंने इस विधि के उपयोग के लिए अदाणी फाउंडेशन और मब्स का धन्यवाद दिया।बता दें कि सघन धान प्रनाली (System of Rice Intensification-SRI) या श्रीपद्धति को मेडागास्कर विधि के नाम से भी जाना जाता है। इसे धान उत्पादन की ऐसी तकनीक के रूप में देखा जाता है जिसके द्वारा पानी के बहुत कम प्रयोग से भी धान का बहुत अच्छा उत्पादन सम्भव होता है।

गौरतलब है कि मब्स, अदाणी फाउंडेशन के निरंतर सहयोग से स्थापित एक स्वतंत्र समिति है जिससे जुड़ी 250 महिलाएँ अपने कौशल से विभिन्न आजीविका परियोजनाओं का संचालन करती हैं। सहकारी समिति के सदस्य सतत उत्पादन को भी बढ़ावा देते हैं और जिले के किसान क्लब द्वारा उगाये अनाज और सब्ज़ियों का विपणन करते हैं जिससे जिले के किसानों को फसल पर निश्चित आमदनी होती है। स्कूल के लिए मिड-डे मील बनाने में मब्स की महिलाएँ इन अनाजों और सब्ज़ियों का इस्तेमाल करती हैं जिससे ग्रामीण भारत के छात्रों की पोषण-सम्बन्धी ज़रूरतें पूरी होती हैं।

अदाणी फाउंडेशन के बारे में:
1996 में स्थापित, अदाणी फाउंडेशन वर्तमान में 18 राज्यों में सक्रिय है, जिसमें देश भर के 2250 गाँव और कस्बे शामिल हैं। फाउंडेशन के पास प्रोफेशनल लोगों की टीम है, जो नवाचार, जन भागीदारी और सहयोग की भावना के साथ काम करती है। वार्षिक रूप से 3.2 मिलियन से अधिक लोगों के जीवन को प्रभावित करते हुए अदाणी फाउंडेशन चार प्रमुख क्षेत्रों- शिक्षा, सामुदायिक स्वास्थ्य, सतत आजीविका विकास और बुनियादी ढा़ंचे के विकास, पर ध्यान केंद्रित करने के साथ सामाजिक पूंजी बनाने की दिशा में काम करता है। अदाणी फाउंडेशन ग्रामीण और शहरी समुदायों के समावेशी विकास और टिकाऊ प्रगति के लिए कार्य करता है, और इस तरह, राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देता है।

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