July 25, 2021
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पद्मावती के बाद अब ब्राम्हण समुदाय को ठेस पहुचाने वाली फिल्म ‘दशक्रिया का विरोध, 

 पद्मावती के बाद अब ब्राम्हण समुदाय को ठेस पहुचाने वाली फिल्म ‘दशक्रिया का विरोध, 

महाराष्ट्र। दशक्रिया फ़िल्म को लेकर ब्राह्मण समाज द्वारा विरोध प्रदर्शन होने लगे हैं. ‘दशक्रिया’ राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित प्रादेशिक मराठी भाषा में बनाई गई फिल्म के विरोध में शुक्रवार को पुणे में भारतीय ब्राह्मण महासंघ ने कड़ा विरोध व्यक्त किया. पुणे में इस फिल्म के प्रदर्शन के खिलाफ शुक्रवार को आंदोलन भी किया गया.मराठी फिल्म ‘दशक्रिया के विरोध में ब्राह्मण महासभा के कार्यकर्ताओं ने पैठण में आज एक शांति रैली निकाली।फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हुए ब्राह्मण समुदाय ने बम्बई उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल करते हुए कहा कि इस फिल्म के कारण ब्राह्मण समुदाय को ठेस पहुंची है। हालांकि अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

रैली में शामिल पुरोहितों ने कहा कि इस फिल्म के जरिए श्राद्ध कर्म कराने वालों का मजाक उड़ाया गया है। फिल्म की निर्माता कल्पना कोठारी और निदेशक संजय पाटिल पर आरोप लगाते हुए कहा कि फिल्म में इस समुदाय के संबंध में निचले स्तर पर बताया गया है। यह फिल्म बाबा भांड द्वारा 1994 लिखित उपन्यास पर बनायी गया है।

औरंगाबाद पुरोहित संगठन के औरंगाबाद के कार्यर्ताओं ने आज प्रोजोन माल के समीप बने सत्यम सिनेमा हाल में फिल्म को रूकवाने के लिए गये थे।

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि ‘दशक्रिया’ में ब्राह्मण समाज और हिंदू प्रथा- परंपराओं की बदनामी की गई है इसलिए फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगनी चाहिए. पुणे के कई फिल्म थिएटरों पर जाकर आंदोलन कारियों ने ‘दशक्रिया’ फिल्म की स्क्रीनिंग पर रोक लगाने की गुहार लगाई. पुणे के सिटी प्राईड और किबे लक्ष्मी थिएटर के मालिक ने आश्वासन दिया है कि उनके थिएटर में इस फिल्म का प्रदर्शन नहीं होगा. शुक्रवार दोपहर को 3:30 सिटी प्राइड थिएटर में दशक्रिया इस मूवी का प्रदर्शन होने वाला था.

पुणे के अलावा नासिक, अकोला में भी फिल्म पद्मावती फिल्म के बाद ‘दशक्रिया’ को लेकर ब्राह्मण समाज द्वारा विरोध प्रदर्शन हो रहा है. अकोला में अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज की ओर से स्थानिय बिग सिनेमा थिएटर में चल रही मराठी फिल्म ‘दशक्रिया’ के शो बंद किए. इतना ही नहीं उन्होंने फिल्म के पोस्टर फाड़कर भी अपना रोष व्यक्त किया. बताया जाता है कि इस फिल्म में ब्राह्मण समाज को लोभी बताया गया है.

 

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